हाई कोर्ट के खेल मैदान को सार्वजनिक स्थल बनाने के आदेश की अवहेलना, बाराबंकी में दांव पर ‘बाबू’ की विरासत
Save GIC Barabanki Sports Ground: मैदान पर राजनीतिक गतिविधियों के संचालन पर कोर्ट ने रोक लगाते हुए वर्ष 2025 में आदेश पारित किया था। बावजूद बाबू के खे ...और पढ़ें

राजकीय इंटर कालेज बाराबंकी के मैदान में बना आडिटोरियम : जागरण
HighLights
बाराबंकी के जीआईसी के खेल मैदान पर बने आडिटोरियम का किराया वसूल रहा विनियमित क्षेत्र
जीआईसी खेल मैदान के आडिटोरियम से हर वर्ष दस लाख से अधिक की कमाई, खेल गतिविधियां शून्य
नरेन्द्र मिश्र, बाराबंकी। पद्मश्री केडी सिंह ‘बाबू’ की विरासत में शामिल राजकीय इंटर कॉलेज (जीआईसी) के मैदान को वर्ष 2012 में छीन लिया गया था। इसके बाद उस मैदान का दुरुपयोग होने लगा।
जिस खेल मैदान पर ककहरा सीखकर कुंवर दिग्विजय सिंह‘बाबू्’ ने विश्व के सर्वश्रेष्ठ हॉकी खिलाड़ी और एशिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी को मिलने वाली हेम्स ट्राफी के भारत के इकलौते विजेता होने का गौरव प्राप्त किया, अब यहां गाय घास खा रही हैं। यही नहीं खेल के मैदान को नुमाइश स्थल में तब्दील कर लाखों रुपये किराया विनियमित क्षेत्र प्रशासन वसूलने लगा। कॉलेज प्रबंधन असहाय हो गया।
यहां पर तो उच्च न्यायालय के आदेश का अनुपालन तक नहीं होता। हाईकोर्ट का आदेश है कि विद्यालय के मैदानों का केवल शैक्षिक गतिविधियों व खेलकूद के लिए उपयोग किया जाए। मैदान पर राजनीतिक गतिविधियों के संचालन पर कोर्ट ने रोक लगाते हुए वर्ष 2025 में आदेश पारित किया था। बावजूद बाबू के खेल मैदान को ही नुमाइश स्थल बना दिया गया।
अब जब बाबू की मूल विरासत को बचाने की मुहिम तेज हुई तो यह सामने आया कि खेल मैदान और ऑडिटोरियम में कार्यक्रम की अनुमति सदर एसडीएम देता है। ऑडिटोरियम का किराया विनियमित क्षेत्र लेता है और मैदान में लगने वाली प्रदर्शनी व मेला का किराया पोस्ट आफिस में कॉलेज के खाते में जमा होता है।
मैदान वर्ष 2012 में कॉलेज प्रबंधन से अलग
राजकीय इंटर कालेज के ऐतिहासिक खेल मैदान को वर्ष 2012 में कॉलेज प्रबंधन से अलग कर दिया गया था। इसके बाद मैदान को खेल गतिविधियों के बजाय नुमाइश, मेले और सार्वजनिक आयोजनों के लिए उपयोग में लाया जाने लगा। अब मैदान परिसर में बने ऑडिटोरियम के किराये को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
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एक दिन का किराया 25 हजार रुपये
आडिटोरियम का एक दिन का किराया 25 हजार रुपये निर्धारित है। यहां वर्षभर में औसतन 40 कार्यक्रम आयोजित होते हैं। इस हिसाब से विनियमित क्षेत्र प्रशासन को हर साल करीब आठ से दस लाख रुपये की आय केवल ऑडिटोरियम से होती है। मैदान में आयोजित प्रदर्शनी और मेले का किराया डाकघर के माध्यम से राजकीय इंटर कॉलेज के खाते में जमा कराया जाता है। ऑडिटोरियम का निर्माण विनियमित विभाग ने कराया था। जेई रोहन यादव ने बताया कि तत्कालीन डीएम योगेश्वर राम के आदेश के तहत ऑडिटोरियम का किराया विनियमित क्षेत्र के खाते में जमा होता।
व्यवसायिक गतिविधियों से खेल मैदान का स्वरूप खत्म
राजकीय इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य डा. राधेश्याम का कहना है कि आज मैदान में व्यवसायिक गतिविधियां होती हैं। इससे मैदान का मूल स्वरूप नहीं बचा। मैदान में खेल गतिविधि नहीं होती। इसके बीच में ऑडिटोरियम के लिए खड़ंजा मार्ग अवैध रूप से बना दिया गया। मैदान पर कार्यक्रम की अनुमति एसडीएम देते हैं। प्रशासन सर्वोपरि है और उसके निर्णय का सम्मान करना कर्तव्य है।
खेल के अतिरिक्त गतिविधियां बंद करने की मांग
जीआइसी पुरातन छात्र एसोसिएशन एवं खेल प्रेमियों ने गुरुवार को डीएम ईशान प्रताप सिंह से मिलकर पद्मश्री बाबू की मूल विरासत खेल मैदान को बचाने के लिए हस्तक्षेप करने की मांग की। मैदान में संचालित व्यवसायिक गतिविधियों को बंद करने के साथ ही खेल खिलाड़यों के लिए मैदान को सुरक्षित करने और कालेज प्रबंधन को मैदान की जिम्मेदारी सौंपने संबंधित ज्ञापन सौंपा। प्रतिनिधिमंडल में शामिल पूर्व बार एसोसिएशन के अध्यक्ष हरीश अग्निहोत्री, डा. सुधीर वर्मा, सभासद संघ के अध्यक्ष सुशील गुप्ता, डीएम ने मैदान को विकसित और सुरक्षित करने के लिए कार्ययोजना शासन को भेजने की बात करते हुए, मांगों पर कार्रवाई का आश्वासन दिया है।