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    ऑनलाइन बिक रहे साइबर ठगी के हथियार, 2000 में विदेशी नंबर तो 15000 में म्यूल बैंक अकाउंट; पुलिस के लिए बड़ी चुनौती

    Updated: Sat, 16 May 2026 04:32 PM (GMT+05:30)

    बाराबंकी में साइबर अपराध पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बन गया है, क्योंकि टेलीग्राम पर साइबर ठगी के उपकरण और सामग्री खुलेआम बिक रही है। ...और पढ़ें

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    संवाद सूत्र, जागरण, बाराबंकी। बेलगाम हो रहा साइबर अपराध पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। ऐसे में टेलीग्राम ने पुलिस की सिरदर्दी और बढ़ा दी है। टेलीग्राम पर सरेआम साइबर फ्रॉड की सामग्री का कारोबार हो रहा है। ऑनलाइन चल रहे इस कारोबार से साइबर ठगों को फ्रॉड करने के लिए नए और अत्याधुनिक टूल मिल रहे हैं। पुलिस साइबर अपराधियों पर नकेल कसने में हांफ रही है।

    लूट, हत्या और डकैती के आरोपितों को पकड़ने की तुलना में पुलिस के लिए साइबर अपराधियों तक पहुंच पाना कहीं अधिक कठिन है। साइबर अपराधी लोगों की गाढ़ी कमाई पर नजर गड़ाए हैं और उसको हथियाने के लिए नित नए तरीके खोज रहे हैं।

    पुलिस एक पर काम करती तब तक फ्रॉड का नया तरीका बाजार में आज जाता है। हाल ही में पकड़े गए महाराष्ट्र के साइबर अपराधी फ्रॉड के ऐसे-ऐसे तथ्य और जानकारी पुलिस को दी है कि पुलिस स्वयं को बैकवर्ड महसूस करने लगी है।

    यह साइबर अपराधी यूएस और कनाडा के मोबाइल नंबरों का व्हाट्सएप कॉल के लिए प्रयोग करता था और साइबर ठगी की रकम खपाने के लिए म्यूल एकाउंट का उपयोग करता था।

    जेल जाने से पहले साइबर अपराधी ने बताया कि कनाडा और यूएस ही नहीं कई देशों के नंबर टेलीग्राम पर उपलब्ध है। यही नहीं म्यूल खातों के लिए भी टेलीग्राम पर बने ग्रुप पर संपर्क करने पर मात्र 15 हजार रुपये में ऐसे खाते मिल जाते हैं।

    जबकि विदेश के मोबाइल नंबर मात्र दो-दो हजार रुपये में उपलब्ध हैं, लेकिन इनसे केवल वाट्सअप काल ही की जा सकती है। टेलीग्राम पर बने ग्रुप पर ऐसी तमाम सामग्री उपलब्ध है। जिससे साइबर अपराधियों के लिए यह और आसान होता जा रहा है

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    क्या है म्यूल खाता

    यह वह बैंक खाते होते हैं जिनका उपयोग अपराधी साइबर ठगी, मनी लांड्रिंग या अवैध गतिविधियों से प्राप्त पैसे को खपाने के लिए करते हैं। यह खाते आम तौर पर किसी तीसरे व्यक्ति के नाम पर होते हैं, जिन्हें लालच देकर या धोखे से इस्तेमाल किया जाता है ताकि असली अपराधी कानून की पकड़ में न आएं।


    जेल भेजे गए साइबर अपराधी से पूछताछ में यह चौकाने वाली जानकारी पता चली है कि उसने टेलीग्राम पर बने ग्रुप से म्यूल एकाउंट और विदेशों के मोबाइल नंबर खरीदे थे। इस संबंध में उच्चाधिकारियों को टेलीग्राम पर इस तरह हो रहे कृत पर अंकुश लगाने के लिए पत्राचार किया जा रहा है।

    अर्पित विजयवर्गीय, पुलिस अधीक्षक बाराबंकी

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