बरेली में बड़ा भंडाफोड़: फर्जी फर्म बनाकर GST का ₹118 करोड़ डकारा, हवाला और सोने से सफेद करते थे काला धन
बरेली में फर्जी फर्मों के जरिए 118 करोड़ रुपये के इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) घोटाले का भंडाफोड़ हुआ है, जिसमें दो मुख्य आरोपी गिरफ्तार किए गए हैं। य ...और पढ़ें

पुलिस की गिरफ्त में आरोपित
HighLights
उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश समेत कई अन्य स्थानों पर फैला गिरोह
चार महीने से फर्जी बिलों के माध्यम से दर्शाया करोड़ों का व्यापार
जागरण संवाददाता, बरेली। फर्जी फर्मों के जरिये 118 करोड़ का इनपुट टैक्स क्रेडिट (आइटीसी) हड़पने वाले गिरोह के दो सदस्य गिरफ्तार कर लिए गए। आरोपित योगेंद्र शर्मा गाजियाबाद और टिंपू मध्यप्रदेश के दमोह का रहने वाला है। दोनों ने स्वीकारा कि पीसी इंटरप्राइजेज, इंडियन ट्रेडर्स, राधे ट्रेडर्स, सज्जन ट्रेडर्स आदि फर्जी फर्में बनाकर आइटीसी क्लेम हड़पते थे। इस रकम को हवाला, एयर-पे, फॉरेक्स एक्सचेंज आदि के माध्यम से निकाला जाता था। बुधवार दोपहर को दोनों आरोपितों को कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया गया।
चार महीने पहले शहर में पीसी इंटरप्राइजेज फर्म का आनलाइन पंजीकरण कराने के बाद व्यापार व्यापार दर्शाया जाने लगा। कुछ समय बाद राज्य कर विभाग की टीम भौतिक सत्यापन करने पहुंची फर्म या संचालक नहीं मिला। 30 मई को सहायक आयुक्त राज्य कर (जीएसटी) ने साइबर थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी।
उसमें लिखा गया कि पीसी इंटरप्राइजेज ने फर्जी बिल आदि कागजों के जरिये अन्य फर्जी फर्मों से व्यापार दर्शाते हुए 1.28 करोड़ रुपये की आइटीसी हड़प ली। एसएसपी अनुराग आर्य ने इस प्रकरण की जांच एसआइटी को सौंपी गई, तब गिरोह की पर्तें खुलीं।
पुलिस के अनुसार, मंगलवार रात को योगेंद्र व टिंपू को पकड़ा गया तो फर्जी आधार कार्ड व कई अन्य कागज, कई चेकबुक, करोड़ों रुपये के लेनदेन से जुड़ी डायरी बरामद हुई। डायरी व अन्य कागजों से स्पष्ट हुआ कि गिरोह अब तक अलग-अलग खातों के माध्यम से 118 करोड़ रुपये निकाल चुका था।
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आरोपितों ने बताया कि अनमोल, अंकित व शिशिर ने अलग जिलों में फर्जी फर्में खोलने के लिए गिरोह बनाया। गिरोह के सदस्य बंसल, सुनील, दीपक, साहिल समेत कई अन्य युवक लोगों को लालच देकर उनके आधार कार्ड, पैन कार्ड आदि कागज ले लेते थे। इनसे फर्जी फर्में खोलकर लेनदेन दर्शा आइटीसी हड़पी जाती थी।
लालच में आने वाले लोगों के बैंक खातों में ही आइटीसी क्लेम पहुंचता था मगर, उनके चेकबुक आदि कागज पहले ही गिरोह जब्त कर लेता था। खातों में क्लेम आने पर गिरोह के सदस्य सराफा कारोबारियों से सोना खरीदते। इसके बाद निजी तौर पर ग्राहक तलाशकर उस सोने की बिक्री करते थे।
फॉरेक्स एक्सचेंज व एयर पे जैसे डिजिटल वालेट का भी इस्तेमाल करते थे। हवाला कारोबारियों से कोड भाषा में नोटों के नंबर के आधार पर बातचीत कर रुपयों का लेनदेन करते थे। इन सभी माध्यम को सर्कुलर ट्रेडिंग नाम दिया गया। गिरोह के सदस्यों की गिरफ्तारी के लिए एसएसपी अनुराग आर्य ने 25 हजार रुपये का इनाम भी घोषित किया था। अब अन्य आरोपितों की तलाश की जा रही है।