बरेली में प्रदूषण पर लगी लगाम: 7 साल में 207 से 78.9 पर पहुंचा PM-10, सांस लेना हुआ सुरक्षित
बरेली में राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम के तहत किए गए कार्यों से वायु प्रदूषण में उल्लेखनीय कमी आई है। पिछले सात वर्षों में PM-10 का स्तर 207 से घटक ...और पढ़ें

सिविल लाइंस में सड़क पर धूल-मिट्टी को साफ़ करती मैकेनिकल रोड स्वीपिंग मशीन। जागरण
HighLights
हर दिन 50 किमी. सड़क की मशीन से सफाई, मियावाकी वन, श्मशान घाट के उन्नयन समेत कई अन्य कार्यों से हवा हुई साफ
जागरण संवाददाता, बरेली। शहर में वायु प्रदूषण रोकने को राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम के तहत किए जा रहे कार्यों का सकारात्मक असर दिखने लगा है। शहर में बीते एक वर्ष (जून-2025 से जून 2026 तक) में 352 दिन सांसों को साफ हवा मिली। वायु गुणवत्ता का स्तर संतोषजनक रहा। इन दिनों में पीएम-10 औसत 78.9 दर्ज किया गया।
निगम अधिकारियों के दावे के अनुसार प्रमुख निर्माण और प्रदूषण प्रवण स्थलों पर एंटी स्माग गन से पानी का छिड़काव, नियमित जागरुकता, श्मशान घाटों का उन्नयन, निरंतर निगरानी, दस एकड़ में मियावाकी वन का विकास करने समेत कई अन्य प्रमुख कार्यों के चलते पीएम-10 में काफी सुधार दर्ज किया गया।

एक वर्ष पहले नगर निगम क्षेत्र का पीएम-10 औसत 106 दर्ज किया गया था। जो सात वर्ष पहले यानी वर्ष-2018-2019 में पीएम-10 का स्तर 207 था। नगर आयुक्त संजीव कुमार मौर्य के अनुसार ''राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम'' (एनकैप) के तहत चुने गए देश भर के 130 शहरों में से 97 शहरों में 2017-18 की तुलना में हवा की गुणवत्ता में सुधार हुआ है।
इनमें से 55 शहरों में पीएम-10 के स्तर में 20 प्रतिशत से ज़्यादा की कमी देखी गई। वाराणसी में पीएम-10 के स्तर में 68 प्रतिशत की दर्ज की गई जो देश में शीर्ष पर है, जबकि बरेली में पीएम-10 का स्तर 207 से घटकर 78.9 हो गया।
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उल्लेखनीय है कि, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की ओर से जनवरी 2019 में शुरू किए गए एनकैप के तहत देश भर के 130 शहरों में वायु गुणवत्ता में सुधार के कार्य किए जा रहे हैं।
प्रदूषण नियंत्रण को 61 करोड़ की मिली दूसरी किश्त
नगर आयुक्त के अनुसार प्रदूषण के स्रोत-जैसे वाहनों से निकलने वाला धुआं, सड़क की धूल और औद्योगिक प्रदूषण को कम करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। पहली किश्त के रूप में नगर निगम को 33 करोड़ जारी की गई थी।
इसके तहत निगम की ओर से सुभाषनगर, जोगी नवादा में नगर वाटिका, मढ़ीनाथ में सीसी रोड का विकास, रामपुर, बदायूं रोड, कर्मचारी नगर समेत कई अन्य कच्चे मार्ग पर पौधारोपण व टाइल्स लगाने व संजय नगर में हरित श्मशान भूमि का विकास, एंटी स्माग गन और सड़क की सफाई के लिए आधुनिक मशीनें खरीदी गई हैं। बताया कि शासन ने 61 करोड़ की दूसरी किश्त जारी की है।
पीएम-10 का 100 से कम स्तर ही सुरक्षित
दस माइक्रोन या उससे कम व्यास वाले कण (पीएम-10) इतने छोटे होते हैं कि गले और नाक से होकर फेफड़ों में प्रवेश कर जाते हैं। एक बार सांस के साथ अंदर जाने पर, ये कण हृदय और फेफड़ों को प्रभावित करते हैं।
पीएम-10 का स्तर 100 के अंदर होने पर ही हवा को सांस लेने के लिए सुरक्षित माना जाता है। पीएम-10 सड़क-भवन निर्माण के दौरान उड़ने वाले धूल, कच्चे रोड साइड पटरी, कूड़ा व पराली जलाने से ज्यादा बढ़ता है।
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