नाक बंद कर कोर्ट परिसर में जाने को मजबूर लोग! न पीने को पानी, न टॉयलेट में सफाई; बदहाली की तस्वीरें हैरान कर देंगी
बरेली कोर्ट परिसर में शौचालयों की बदहाली, पानी की कमी और गंदगी से लोग परेशान हैं। पेयजल और पार्किंग की भी समस्या है, हालांकि बार एसोसिएशन सुधार के प्र ...और पढ़ें

कोर्ट परिसर में ओवरफ्लो हो रहा शौचालय का टैंक
HighLights
परिसर में लगा वाटर कूलर खराब, कर्मचारी बाहर से मंगा रहे पानी
हर दिन हजारों की संख्या में कोर्ट जाते हैं लोग, मगर नहीं सुविधाएं
जागरण संवाददाता, बरेली। कोर्ट परिसर में हर दिन हजारों की संख्या में लोग आते हैं मगर वहां पर सुविधाओं का कोई ध्यान नहीं दिया गया। कोर्ट परिसर के शौचालय इतने गंदे हैं कि वहां पर जाना भी इंसान को बीमार बना दे। मजबूरी में लोग वहां पर जाते हैं। उसमें भी पानी की कोई व्यवस्था नहीं हैं, शौचालय के टैंक भी ओवर फ्लो हो रहे हैं। पीने के पानी भी वहां पर कोई सुविधा नहीं हैं। एक ही टंकी है जहां से लोग पानी पी सकते हैं मगर वहां भी गंदगी है। दैनिक जागरण ने शुक्रवार को जब कोर्ट परिसर की पड़ताल की तो हकीकत सामने आई।

शुक्रवार दोपहर दैनिक जागरण की टीम कोर्ट परिसर पहुंची। वहां सबसे पहले शौचालय देखे। मुख्य द्वार के बाई ओर बने पुरुष शौचालय में पानी नहीं आ रहा था जो भी लोग शौचालय के इस्तेमाल के लिए जा रहे थे। वह यही कहकर निकल रहे थे कि पानी तक नहीं है...। पुरुष शौचालय से कुछ ही दूरी पर पीने के पानी की व्यवस्था की गई थी। मगर वह टंकी टूटी हुई थी।

उसमें से पानी नहीं आ रहा था। उधर, दूसरी ओर मुख्य द्वार के दायीं ओर बने हुए शौचालय का हाल और भी खराब था। उसमें भी पानी की कोई व्यवस्था नहीं थी। यूरिनल के पाइप भी टूटे हुए थे। मुख्य द्वार के दायीं ओर पार्किंग के सामने पीने के पानी का इंतजाम किया गया है। वहां पर टंकी में पानी तो आ रहा था लेकिन गंदगी काफी थी। ऐसा लग रहा था कि वहां पर कोई सफाई नहीं करता हो...।

पार्किंग भरी, कोर्ट परिसर में इधर-उधर लगे वाहन
कोर्ट परिसर में पार्किंग बनी हुई, इसके बाद भी लोग अपने वाहनों को इधर-उधर लगा रहे हैं। आखिर लोगों की भी मजबूरी है क्योंकि, पार्किंग पूरी तरह से भरी हुई है।

इसकी वजह से मजबूरी में उन्हें अपने वाहन बाहर खड़े करने पड़ रहे हैं। सड़क पर कई वाहन खड़े रहते हैं, जिस कारण वहां से अन्य वाहनों को निकलने में दिक्कत होती है।
पेयजल की व्यवस्था के लिए कोर्ट परिसर में पानी का टैंक बनाया जा रहा है। बोरिंग की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। छह से आठ पिंक टायलेट जिलाधिकारी के कोटे से शीघ्र ही बनेंगे। पार्किंग के लिए भी प्रयास किया जा रहा है।
- मनोज कुमार हरित एडवोकेट, अध्यक्ष, बरेली बार एसोसिएशन।
बरेली बार एसोसिएशन ने तत्कालीन प्रशासनिक जज न्यायमूर्ति जेजे मुनीर के कार्यकाल में पेयजल का मुद्दा उठाया था। रिड्रेसल कमेटी में बात रखी गई। उसी आधार पर परिसर में पानी का टैंक बनाया जा रहा है। जिला जज के प्रयासों से शौंचालयों को आउटसोर्सिंग के जरिए सुचारू किए जाने की बात सामने आई है।
-दीपक पांडेय एडवोकेट सचिव, बरेली बार एसोसिएशन।
कोर्ट परिसर में टायलेट की दुर्दशा है। नाक बंद करके टायलेट में घुसना पड़ता है। बीमारियां नालियों में टहल रही हैं। कोई टायलेट इस लायक नहीं है जिसे इस्तेमाल किया जा सके। कोर्ट परिसर की सभी टोंटी टूटी पड़ी हैं। थोड़े से पानी के लिए भी वादकार तरसते हैं।
- वरिष्ठ अधिवक्ता शशीकांत शर्मा, सदस्य बरेली बार एसोसिएशन।
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