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    'लाश भी नहीं मिलेगी...' धमकी देकर बिना पोस्टमार्टम कर दिया था अंतिम संस्कार, अब बुढ़ापे में कोर्ट ने सास को सुनाई 7 साल की सजा

    Updated: Thu, 28 May 2026 03:08 PM (IST)

    बरेली की अदालत ने दहेज हत्या के मामले में मृतका राजेश्वरी देवी की सास राजवंत कौर को सात साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। बहू को दहेज के लिए प्रताड ...और पढ़ें

    प्रतीकात्मक चित्र

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    1. - बहेड़ी थाना क्षेत्र का मामला, 2017 में हुई थी मृतका की शादी

    जागरण संवाददाता, बरेली। दहेज हत्या के मामले में अदालत ने मृतक बहू की सास को सात साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। मृतका राजेश्वरी देवी के पति सिमरन जीत सिंह की मृतका की मौत के 15 दिन के बाद ही मृत्यु हो गई थी। सास राजवंत कौर उर्फ राजदीप कौर को बुढ़ापे में सात साल की सजा भुगतना होगी। अपर सेशन जज पांच संतोष कुमार यादव की अदालत में यह फैसला सुनाया है।

    वारदात 2017 की है। सतलना गांव निवासी दर्शन लाल की बेटी राजेश्वरी का विवाह सितंबर 2017 को सिमरनजीत सिंह से हुआ था। शादी के कुछ दिन बाद ही सिमरनजीत अपनी पत्नी से 10 लाख रुपये की मांग कर तंग करने लगा। मायके वालों ने कई बार समझाया और कुछ मोहलत भी मांगी, लेकिन सिमरनजीत का बर्ताव दिन-ब-दिन क्रूर होता गया।

    मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना से तंग आकर 11 अक्टूबर 2017 को राजेश्वरी के पिता दर्शन लाल की हार्ट अटैक से मृत्यु हो गई। इसके बाद भी ससुराल वालों का रवैया नहीं बदला। 26 अप्रैल 2020 को राजेश्वरी ने अपने दादा को फोन कर बताया कि सिमरनजीत उसे जान से मारने की धमकी दे रहा है और नशीला पदार्थ खिला रहा है।

    रात 10 बजे सिमरनजीत का खुद फोन आया कि हमने तुम्हारी बहन को जहरीला पदार्थ खिला दिया है, दो लाख रुपये लेकर आओ नहीं तो लाश भी नहीं मिलेगी। अगले दिन 27 अप्रैल 2020 को सुबह 10 बजे उसने फिर फोन कर कहा कि तुम्हारी बहन मर चुकी है, अंतिम संस्कार कर दिया है। आनन-फानन में मायके वाले बहेड़ी पहुंचे तो पता चला कि बिना पोस्टमार्टम के ही शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया।

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    वादी मुकदमा बिजेंद्र सिंह के शिकायती पत्र पर बहेड़ी थाने में मुकदमा दर्ज हुआ। पुलिस विवेचना में सामने आया कि सिमरनजीत ने पहली शादी भी छुपाई थी और राजेश्वरी को लगातार मायके से रुपये लाने के लिए पीटा जाता था। 2015 में ही सिमरनजीत की पहली शादी हो चुकी थी, लेकिन राजेश्वरी और उसके परिवार को इसकी भनक तक नहीं लगने दी गई।

    2017 में तलाक के बाद दूसरी शादी की गई। गवाहों और बैंक ट्रांजेक्शन से साबित हुआ कि वादी पक्ष ने सिमरनजीत के खाते में लगभग आठ लाख रुपये ट्रांसफर भी किए थे। पुलिस ने मृतका के पति व सास के विरुद्ध आरोप पत्र प्रेषित किया। सरकारी वकील दिगंबर पटेल ने कोर्ट में सात गवाह पेश किए। अदालत ने दोषी सास पर 35,000 रुपए का जुर्माना भी लगाया है।

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