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    बरेली पुलिस की बड़ी लापरवाही: महिला से छेड़छाड़ के केस में 76 दिन तक नहीं हुए बयान, SSP ने 4 दारोगाओं पर लिया कड़ा एक्शन

    Updated: Tue, 14 Jul 2026 04:58 PM (GMT+05:30)

    एसएसपी बरेली की समीक्षा बैठक में चार दारोगाओं की बड़ी लापरवाही सामने आई, जिन्होंने मुकदमों की विवेचना में 60 दिन की समय-सीमा को पार करते हुए 76 से 167 ...और पढ़ें

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    1. विवेचकों का हाल, 60 दिन में खत्म होने वाले मुकदमे को 150 से अधिक दिन लटका रहे

    रजनेश सक्सेना, बरेली। एसएसपी की बुधवार देर रात समीक्षा बैठक में जिन चार दारोगाओं की जांच खोली गई, वह यूं ही नहीं खुली..। दैनिक जागरण ने जब उन चारों दारोगाओं की जांच खुलने के बारे में पड़ताल की तो फैक्ट्स सामने आए। पता चला कि उन्होंने मुकदमों की विवेचनाओं को निस्तारित करने की प्रक्रिया में कोई काम ही नहीं किया था।

    इसमें भी एक केस ऐसा था जिसमें महिला से छेड़छाड़ के मुकदमे में 76 दिन बीत जाने के बाद भी विवेचक ने पीड़ित के बयान तक दर्ज नहीं किए थे। जबकि, यह मुकदमा 60 दिनों के भीतर निस्तारित हो जाना चाहिए था। जिन दारोगाओं की जांच खुली उनकी यह लापरवाही सामने आई...

    केस एक

    पीड़ित महिला के दर्ज नहीं किए बयान : यह मामला कैंट थाना क्षेत्र का है। 24 अप्रैल को एक महिला ने प्राथमिकी लिखाई। आरोप था कि क्यारा निवासी धर्मपाल ने महिला के साथ अश्लीलता करते हुए गाली-गलौच की। इसके अलावा बटाई पर दिए खेत के गेहूं को बिना बताए काट लिया।

    मामले की विवेचना कैंट थाने के दारोगा भीष्म सिंह को दी गई। भीष्म सिंह ने लापरवाही की पराकाष्ठा की, उन्होंने आरोपित की गिरफ्तारी तो दूर पीड़ित महिला के 164 के बयान तक दर्ज नहीं किए। इस पर एसएसपी ने उनकी जांच खोल दी।

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    केस दो

    प्रकाश में आया आरोपित फिर भी पता नहीं किया तस्दीक : यह मामला भी कैंट थाने का है। बहेड़ी के टांडा निवासी राशिद ने पिछले वर्ष 10 जुलाई को मुकदमा दर्ज कराया था। आरोप था कि किसी व्यक्ति ने उन्हें पार्सल भेजने के नाम पर 13,700 रुपये की ठगी कर ली। मामले की विवेचना दारोगा इंतजार हुसैन को दी गई।

    उनकी जांच में आरोपित अजय मल्हारी जय भाज्ञे का नाम सामने आया। मगर इंतजार ने मुकदमे के निस्तारण की जगह लापरवाही शुरू कर दी। आरोपित का नाम पता चलने के बाद भी उन्होंने उसके पते के बारे में जानकारी नहीं की। इसलिए इनकी जांच खोली गई।

    केस तीन

    60 दिन में खत्म होने वाले मुकदमों को अटकाया 151 और 167 दिन : फरीदपुर थाने के दारोगा सौरभ सिवाच की जांच दो मुकदमों में लापरवाही करने को लेकर खोली गई है। पहला मामला 27 फरवरी को थाना क्षेत्र के एक गांव निवासी व्यक्ति ने लिखाया था।

    आरोप था कि उनकी पत्नी और 11 वर्ष की बेटी को क्योलड़िया निवासी परमेश्वर सिंह बहला-फुसलाकर ले गया। विवेचना कर रहे सौरभ सिवाच ने 151 दिन बीत जाने के बाद भी न तो दोनों की बरामदगी की और न ही मुकदमे का निस्तारण किया।

    वहीं, एक और मुकदमा 24 जनवरी को थाना क्षेत्र निवासी एक व्यक्ति ने अपनी बेटी को ले जाने के आरोप में लिखाया। विवेचक ने 167 दिनों तक न तो आरोपितों की गिरफ्तारी की और मामले का निस्तारण किया। इसलिए जांच खोली गई।

    केस चार

    आरोपितों की नहीं की गिरफ्तारी : यह मामला भी फरीदपुर थाने का है। 28 मार्च को चौडेरा गांव निवासी लाल बहादुर ने प्राथमिकी लिखाई। आरोप था कि ममता, कप्तान, सत्यपाल, सतेंद्र, सुनील, संदीप और रणधीर खेत पर लगे तार के जाल को काटकर ले गए और गाली-गलौच की।

    मामले की विवेचना 90 दिन में खत्म होनी चाहिए थी। मगर विवेचक दयानंद शर्मा ने न तो कोई साक्ष्य संकलन किए और न ही आरोपितों की गिरफ्तारी की। इसलिए इनकी भी जांच खोली गई।

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