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    Gorakhpur-Shamali Expressway: बरेली के इन 68 गांवों से गुजरेगा नया ग्रीन फील्ड एक्सप्रेस-वे, देखें पूरी लिस्ट

    Updated: Sat, 07 Mar 2026 08:35 AM (GMT+05:30)

    गोरखपुर-शामली ग्रीन फील्ड लिंक एक्सप्रेस-वे के लिए बरेली में भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया शुरू हो गई है। यह एक्सप्रेस-वे नवाबगंज और बहेड़ी तहसील के 68 गांव ...और पढ़ें

    प्रतीकात्‍मक च‍ित्र

    प्रतीकात्‍मक च‍ित्र

    जागरण संवाददाता, बरेली। गोरखपुर-शामली ग्रीन फील्ड लिंक एक्सप्रेस-वे निर्माण के लिए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआइ) की गतिविधियां आरंभ हो चुकी हैं। नवाबगंज और बहेड़ी तहसील क्षेत्र के 68 गांवों से यह गोरखपुर शामली एक्सप्रेसवे निकल रहा है। इनमें बरेली एनएचएआइ के जिम्मे नवाबगंज के 17 गांव हैं, जबकि 51 गांवों में निर्माण की जिम्मेदारी एनएचएआइ मुरादाबाद को दी गई है। चयनित गांवों की भूमि का अधिग्रहण करने के लिए थ्री ए की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

    पूर्वांचल से पश्चिमी उत्तर प्रदेश तक कई सीधी ट्रेनाें का संचालन तो होता है, लेकिन सड़क मार्ग से आवागमन मुश्किल होता है। सरकार ने इस समस्या का स्थायी निदान कराने की दिशा में ठोस कदम बढ़ा दिया है। गोरखपुर-शामली ग्रीन फील्ड लिंक एक्सप्रेस-वे निर्माण के प्रस्ताव को कुशीनगर तक विस्तार करने की मंजूरी देकर भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया आरंभ कर दी गई है।

    बरेली जिले की बात करें तो यहां से उत्तराखंड से सीधा जुड़ाव बढ़ाने के लिए बरेली-सितारंज हाईवे का निर्माण कराया जा रहा है। इसमें बरेली-पीलीभीत पैकेज में 50 प्रतिशत जबकि पीलीभीत-सितारगंज पैकेज में 30 प्रतिशत काम हो चुका है। मथुरा, आगरा तक का सफर आसान बनाने के लिए बरेली-मथुरा हाईवे का चौड़ीकरण भी तेजी से हो रहा है।

    इस हाईवे से जहां बदायूं में गंगा एक्सप्रेसवे से जुड़ाव बन रहा है, वहीं मथुरा में यमुना एक्सप्रेसवे से भी जुड़ाव हो जा रहा है। गोरखपुर-शामली ग्रीन फील्ड लिंक एक्सप्रेस-वे बन जाने से जिले में एक्सप्रेसवे की कमी दूर हो जाएगी। नवाबगंज के 34 और बहेड़ी के 34 गांव आ रहे हैं, जहां की भूमि का अधिग्रहण की प्रक्रिया आरंभ कराई जा चुकी है।

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    एनएचएआइ की ओर से राजस्व विभाग को पत्र लिखकर चयनित गांवों में भू-परिवर्तन करते समय एहतियात बरतने के सुझाव दिए गए हैं। उत्तर प्रदेश में कृषि भूमि को गैर-कृषि (आवासीय, व्यावसायिक) में बदलने के लिए धारा 143 (उत्तर प्रदेश जमींदारी उन्मूलन और भूमि सुधार अधिनियम, 1950) सबसे महत्वपूर्ण प्रावधान है, जिसे अब उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता, 2006 की धारा 80 के तहत समझा जाता है।

    यह प्रावधान एसडीएम को कृषि भूमि को गैर-कृषि घोषित करने का अधिकार देता है। परियोजना निदेशक एनएचएआइ नवरत्न ने बताया कि गोरखपुर-शामली ग्रीन फील्ड लिंक एक्सप्रेस-वे में आने वाले गांवों में राजस्व विभाग को भू-परिवर्तन में सावधानी बरतने के सुझाव दिए गए हैं, ताकि बाद में कोई समस्या उत्पन्न न होने पाए। निर्माण की जिम्मेदारी एनएचएआइ को दी गई है।

    कार्य आवंटन के अनुसार जिले के 17 गांवों में निर्माण एनएचएआइ, बरेली कराएगा, जबकि 51 गांवों में निर्माण एनएचएआइ, मुरादाबाद कराएगा। अब इसमें प्रशासन की भूमिका बढ़ जाएगी। किसानों को मुआवजा की धनराशि तो एनएचएआइ देगा, लेकिन उनका वितरण कर कब्जा प्रशासन दिलाएगा।

     

    गोरखपुर-शामली ग्रीन फील्ड लिंक एक्सप्रेस-वे निर्माण के लिए चयनित किसानाें का भूमि अधिग्रहण कराने की प्रक्रिया अभी शुरूआती दौरा में है। एनएचएआइ, बरेली को जिले के 17 गांवों में निर्माण की जिम्मेदारी मिली है। जबकि अन्य गांवों में निर्माण एनएचएआइ, मुरादाबाद कराएगा। बड़ी परियोजना है, भूमि अधिग्रहण हो जाने के बाद ही निर्माण कार्य आरंभ हो सकेगा।

    - नवरत्न, परियोजना निदेशक एनएचएआइ


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