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    MJPRU 24th Convocation: रुहेलखंड विवि के 24वें दीक्षांत समारोह में बेटियों का दबदबा, 85 में से 71 गोल्ड मेडल छात्राओं के नाम

    Updated: Wed, 05 Aug 2026 05:43 PM (IST)

    रुहेलखंड विश्वविद्यालय के 24वें दीक्षा समारोह में 85 स्वर्ण पदकों में से 71 छात्राओं ने जीते, जो उनकी अकादमिक उत्कृष्टता को दर्शाता है। राज्यपाल आनंदी ...और पढ़ें

    रूहेलखंड विश्वविद्यालय के दीक्षा समारोह में उपाधि मिलने के बाद खुशी का इजहार करते छात्र-छात्राएं। जागरण

    रूहेलखंड विश्वविद्यालय के दीक्षा समारोह में उपाधि मिलने के बाद खुशी का इजहार करते छात्र-छात्राएं। जागरण

    HighLights

    1. रुहेलखंड विश्वविद्यालय के अटल सभागार में 24वें दीक्षा समारोह का हुआ आयोजन, राजभवन से ऑनलाइन जुड़ीं राज्यपाल

    जागरण संवाददाता, बरेली। रुहेलखंड विश्वविद्यालय के 24वें दीक्षा समारोह में जनभवन से आनलाइन जुड़ीं राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने 85 मेधावियों को स्वर्ण पदक और एक डी-लिट और 104 शोधार्थियों को पीएचडी उपाधि प्रदान की। आधे घंटे के संबोधन में राज्यपाल ने शिक्षा, शोध और देशहित पर जोर दिया।

    हाथों में पदक, कंधों पर नीला पटका पहने मेधावियों के चेहरे पर सफलता की चमक देखते ही बन रही थी। वहीं लाल पटका पहने उपाधि धारक प्रतिज्ञा लेते वक्त गौरवान्वित दिखे। वंदेमातरम और कुलगीत संग कार्यक्रम की शुरुआत हुई। शोभायात्रा के साथ कुलपति, कार्य परिषद, विद्या परिषद सदस्य और अतिथि सभागार में पहुंचे।

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    वहां सभी अतिथियों को सम्मानित किया गया। कुलाधिपति आनंदीबेन ने ‘स्वर्ण जयंती द्वार’ स्थित ‘युवा प्रेरणा स्थल’ पर स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा का आनलाइन अनावरण किया। पीएम-उषा अंतर्गत नवीनीकृत कृषि एवं प्रौद्योगिकी संकाय का लोकार्पण किया गया। साथ ही, जिला प्रशासन के सहयोग से आयोजित एचपीवी टीकाकरण कार्यक्रम के प्रमाणपत्रों का वितरण भी किया गया।

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    कुल 1,00,631 छात्र-छात्राओं को उपाधियां प्रदान की गईं। इन उपाधियों को डिजिलाकर पर अपलोड करने की व्यवस्था भी की गई। उपाधि प्राप्त करने वालों में 62 प्रतिशत छात्राएं और 38 प्रतिशत छात्र शामिल रहे। 85 स्वर्ण पदक विजेताओं में 71 छात्राएं और 14 छात्र शामिल रहे। सभी को मंच पर सम्मानित किया गया।

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    इस्लाम को डी-लिट, दो प्रोफेसरों को मिला सर्वश्रेष्ठ शिक्षक सम्मान

    पारंपरिक जयपुरी लाख की चूड़ियों की हस्तकला के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए इस्लाम अहमद को ‘डी-लिट’ (मानद उपाधि) से विभूषित किया गया। विवि परिसर से प्रो. विनय ऋषिवाल और संघटक महाविद्यालय मीरापुर बांगर, बिजनौर से डा. सचिन कुमार को सर्वश्रेष्ठ शिक्षक सम्मान प्रदान किया गया। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को ‘आंगनबाड़ी किट’ और प्राथमिक विद्यालयों के दो प्रधानाचार्यों को राजभवन से प्राप्त पुस्तकें वितरित की गईं

    माही के परिचय ने सभी का ध्यान किया आकर्षित

    राज्यपाल ने विवि की वार्षिक रिपोर्ट पुस्तक का विमोचन किया। वहीं, गोद लिए गए गांवों के विद्यालयों में आयोजित चित्रकला, भाषण और कहानी कथन प्रतियोगिताओं के विजेताओं को पुरस्कृत किया। इसमें प्राथमिक विद्यालय लालपुर की छात्रा माही ने मेरा विद्यालय पर विचार साझा किए।

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    कहा, मेरा विद्यालय में बहुत अच्छी पढ़ाई होती है। मेरा विद्यालय बहुत सुंदर हैं, साफ-सुथरा है, बहुत पेड़-पौधे हैं। जय हिंद, जय भारत, भारत माता की जय...। कक्षा तीन की छात्रा के इन शब्दों पर सभागार तालियों से गूंज उठा। राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।

    कुलपति ने गिनाईं उपलब्धियां

    कुलपति प्रो. कृष्ण पाल सिंह ने वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए कहा, विवि को नैक ए डबल प्लस का दर्जा और यूजीसी से ‘कैटेगरी-1’ का दर्जा प्राप्त है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआइ) के युग में विश्वविद्यालय ने बीटेक-एआइ पाठ्यक्रम की शुरुआत की है। विवि में 55 विदेशी छात्र शिक्षा हासिल कर रहे हैं। जल्द इंटरनेशनल ट्रांजिट हास्टल बनाया जाएगा।

    सकारात्मक सोच से मिलती है सफलता

    मुख्य अतिथि भारत सरकार के स्वास्थ्य विभाग में पूर्व संयुक्त सचिव डा. राकेश कुमार ने कहा, आज आपके जीवन का एक महत्वपूर्ण अध्याय समाप्त हो रहा है और नए अध्याय की शुरुआत हो रही है। ‘शिक्षार्थ आइए, सेवार्थ जाइए’, इसी मंत्र को अपने जीवन में उतारें। सीखने की कोई उम्र नहीं होती। सफलता प्राप्त करने के लिए 80 प्रतिशत योगदान सकारात्मक सोच का होता है।

    समारोह के बाद शुरू होती है वास्तविक परीक्षा

    अति विशिष्ट अतिथि सांसद छत्रपाल गंगवार ने कहा कि दीक्षा समारोह के बाद अब आपकी वास्तविक परीक्षा समाज में शुरू होती है। अब समय है कि आप अपनी शिक्षा का उपयोग समाज के कमजोर और वंचित वर्गों के उत्थान के लिए करें।

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    कहा, उन्होंने 1979 में रुवि से स्नातकोत्तर और बीएड की शिक्षा ग्रहण की। संदेश दिया कि शपथ लेना सरल है, निभाना कठिन है। त्याग और तप से इंद्र बनना सरल है, स्वर्ग का ऐश्वर्य पाकर मद भूलाना कठिन है। विशिष्ट अतिथि एसएस विवि के कुलपति प्रो. पीबी सिंह ने विद्यार्थियों को प्रोत्साहित किया।

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