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    बरेली: लाल बत्ती वाली कार और 'ADM' का रौब, दो सगी बहनों के फर्जी IAS बनने के खेल का ऐसे हुआ पर्दाफाश

    Updated: Tue, 28 Apr 2026 05:33 AM (IST)

    बरेली में खुद को आइएएस बताकर सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी करने वाली दो सगी बहनों समेत तीन लोगों को पुलिस ने हिरासत में लिया है। इन पर चार लोगों स ...और पढ़ें

    एआई जेनरेटेड इमेज है।

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    1. बारादरी पुलिस का कहना, तीनों आरोपितों से की जा रही पूछताछ, जल्द होगा घटना का राजफाश

    2. आरोपितों ने चार लोगों से नौकरी के नाम पर ठगे 11 लाख, कार पर लिखाया था एडीएम एफआर

    जागरण संवाददाता, बरेली। खुद को आइएएस बनकर कभी एसडीएम तो कभी एडीएम बताकर लोगों से ठगी करने वाली महिला को पुलिस ने हिरासत में लिया है। उसके साथ उसकी सगी बहन और एक अन्य से भी पूछताछ की जा रही है। पूछताछ के बाद तीनों को मंगलवार के लिए जेल भेजा जाएगा। आरोपितों ने चार लोगों से 11 लाख रुपये की ठगी की थी।

    फर्जी आइएएस बनकर घूमने वाली महिला ने अपनी कार पर एडीएम एफआर लिखवाया था। इससे लोग उसे असली एडीएम समझे। फाइक एन्क्लेव निवासी प्रीति लायल ने पुलिस को बताया था कि वर्ष 2022 में शिखा पाठक से उनकी मुलाकात हुई थी।

    शिखा ने उन्हें बताया कि उसकी बहन डा. विप्रा शर्मा एसडीएम है और वह रुपये लेकर सरकारी नौकरी लगवा देती है। शिखा ने झांसा दिया कि कंप्यूटर आपरेटर की नियुक्तियां यूपीएसएसएससी के माध्यम से होनी हैं, जिसमें उसकी बहन डा. विप्रा शर्मा नौकरी लगवा देगी।

    झांसे में आई प्रीति ने खुद के साथ अपने तीन साथियों आदिल खान, मुशाहिद अली और संतोष को भी यह बात बताई। इसके बाद सभी ग्रेटर ग्रीन पार्क निवासी विप्रा शर्मा व शिखा शर्मा से मिलने पहुंचे। आरोप है कि विप्रा और उनके पिता विरेंद्र कुमार शर्मा ने चारों लोगों की नौकरी लगवाने का भरोसा दिया।

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    इसके एवज में उन्होंने प्रीति से दो लाख रुपये, आदिल खान से 1.80 लाख रुपये, मुशाहिद अली से 5.21 लाख रुपये और संतोष कुमार से दो लाख रुपये की ले लिए।

    आरोप है कि इसके कुछ दिनों बाद डा. विप्रा ने आयुक्त एवं सचिव राजस्व परिषद उत्तर प्रदेश लखनऊ अनुभाग-4 में कंप्यूटर आपरेटर पद पर तैनाती के नियुक्ति पत्र आयुक्त एवं सचिव उत्तर प्रदेश शासन लखनऊ मनीषा त्रिघाटिया के नाम से फर्जी हस्ताक्षर व फर्जी दस्तावेज तैयार कर जारी कर दिए।

    मामले में उन्होंने जांच की तो मामला फर्जी मिला। इसके बाद उन्होंने आरोपितों के विरुद्ध शिकायत की तो बारादरी पुलिस ने दोनों बहनों को नामजद करते हुए प्राथमिकी पंजीकृत कर ली। सोमवार को पुलिस ने दोनों बहनों के साथ ही एक और संदिग्ध को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है।

    मंगलवार को तीनों को जेल भेजा जाएगा। अभी तक की जांच में सामने आया है कि तीनों आरोपित गिरोह बनाकर लोगों से ठगी करते थे। इस गिरोह में अन्य लोगों के भी शामिल होने की आशंका है पुलिस इसकी जांच कर रही है।

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