Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    यूपी के इन 5 सरकारी आयुर्वेद कॉलेजों में शुरू होंगे PG कोर्स, बरेली समेत इन शहरों के छात्रों को बड़ा तोहफा

    Updated: Wed, 27 May 2026 06:15 AM (IST)

    उत्तर प्रदेश के पांच राजकीय आयुर्वेद कॉलेजों में परास्नातक (पीजी) कोर्स शुरू करने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है, जिसमें बरेली का एसआरएम राजकीय आयुर् ...और पढ़ें

    राजकीय आयुर्वेद‍िक कालेज, बरेली

    राजकीय आयुर्वेद‍िक कालेज, बरेली

    HighLights

    1. प्रदेश के झांसी, बांदा, प्रयागराज और मुजफ्फरनगर के कालेजों में भी शुरू होंगे कोर्स

    जागरण संवाददाता, बरेली। प्रदेश के पांच राजकीय आयुर्वेद कालेजों में परास्नातक (पीजी) कोर्स शुरू करने का प्रस्ताव है। इनमें झांसी, बांदा, हंडिया (प्रयागराज), बरेली और मुजफ्फरनगर के राजकीय कालेज शामिल हैं। बरेली के एआरएम राजकीय आयुर्वेदिक अस्पताल से पांच विभागों में पीजी कोर्स शुरू करने का प्रस्ताव शासन को भेजा जा चुका है।

    एसआरएम राजकीय आयुर्वेदिक कालेज में 14 विभाग हैं। अभी स्नातक की 75 सीटें हैं, जिनमें 15 ईडब्ल्यूएस की हैं। यहां से जिन पांच पाठ्यक्रमों में पीजी कोर्स शुरू करने के लिए प्रस्ताव शासन को भेजा गया है उनमें आयुर्वेदिक बेसिक प्रिंसिपल, शल्य चिकित्सा, एनोटामी, गायनी आदि हैं।

    प्रत्येक कोर्स में पांच सीटें होंगी। इन विभागों में प्रोफेसर हैं और अन्य मानक भी पूरे हो रहे हैं। प्रिंसिपल प्रो. प्रीति शर्मा ने बताया कि शासन के निर्देश पर पांच विभागों में पीजी कोर्स शुरू करने का प्रस्ताव भेजा गया है। शासन स्तर से ही कोर्स शुरू करने का निर्णय लिया जाएगा।

    वहीं प्रदेश में अभी राज्य के आठ कालेजों में से सिर्फ तीन में परास्नातक कोर्स संचालित हैं। आयुर्वेद निदेशालय ने पांचों कालेजों में से प्रत्येक में पीजी की 20-20 सीटें शुरू करने का प्रस्ताव शासन को भेजा है जिसे जल्द मंजूरी मिलने की संभावना है।

    खबरें और भी

    नए कालेजों में परास्नातक कोर्स की मंजूरी से न सिर्फ रसायनों पर शोध को बढ़ावा मिलेगा बल्कि आयुर्वेदिक पद्धति से उपचार करने वाले योग्य चिकित्सक अधिक संख्या में उपलब्ध होंगे। प्रदेश के राजकीय आयुर्वेद कालेजों में से पीलीभीत, लखनऊ और वाराणसी के कालेज ऐसे हैं, जहां आयुर्वेद में परास्तनाक की पढ़ाई होती है।

    इनमें सबसे अधिक 49 सीट लखनऊ राजकीय आयुर्वेद कालेज में हैं। 36 सीटें वाराणसी के कालेज में और छह सीटें पीलीभीत के कालेज में हैं। वहीं प्रत्येक वर्ष सिर्फ राजकीय आयुर्वेदिक कालेजों से 570 छात्र स्नातक (बीएएमएस) की डिग्री लेकर निकलते हैं। ऐसे में उनके सामने आगे की पढ़ाई के विकल्प सीमित हैं।

    राज्य में सिर्फ काशी हिंदू विश्वविद्यालय में आयुर्वेद में परास्नातक की 40 सीटें हैं। गोरखपुर स्थित महायोगी गोरखनाथ आयुष विश्वविद्यालय में पीजी की 20 सीटों की मान्यता हुई है। ऐसे में शेष छात्रों के पास दूसरे राज्यों में जाने का ही विकल्प है।

    आयुर्वेद निदेशक डा.नरेन्द्र दास का कहना है कि आयुर्वेद और प्राकृतिक चिकित्सा के प्रति लोगों का विश्वास बढ़ा है। कोरोना के दौरान आयुष पद्धति की उपयोगिता को व्यापक रूप से महसूस किया गया। इसके बाद से आयुर्वेदिक शिक्षा और चिकित्सा सेवाओं को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

    यह भी पढ़ें- बरेली में बिजली संकट पर व‍िभाग का बड़ा एक्शन: फोन न उठाने वाले SDO और XEN पर गिरी गाज