UPSC में फेल हुई तो बनी 'फर्जी IAS': बरेली की तीन बहनों ने ऐसे लगाया करोड़ों का चूना, पुलिस भी हैरान
यूपीएससी में असफल होने के बाद विप्रा शर्मा ने अपनी बहनों के साथ मिलकर फर्जी आईएएस बनकर लोगों को सरकारी नौकरी का झांसा देकर ठगी की। पुलिस ने तीनों बहनो ...और पढ़ें

पुलिस की गिरफ्त में ठगी की आरोपित बहनें
HighLights
बाद में अपनी बड़ी बहन और ममेरी बहन को भी गिरोह में किया शामिल
जागरण संवाददाता, बरेली। खुद को आइएएस बनकर कभी एसडीएम तो कभी एडीएम बताकर लोगों से ठगी करने वाली विप्रा शर्मा समेत तीन बहनों को गिरफ्तार कर लिया गया है। पूछताछ में सामने आया कि विप्रा यूपीएससी में चयनित नहीं हो सकी थी तो उसने ठगी का काम शुरू किया। बाद में अपनी बड़ी बहन शिखा पाठक और ममेरी बहन दीक्षा को भी गिरोह में शामिल कर लिया।
तीनों मिलकर लोगों को नौकरी का झांसा देकर फंसती और बाद में ठगी की घटना को अंजाम देती थी। आरोपितों के खाते से पुलिस ने 55 लाख रुपए फ्रिज किए हैं साथ ही 4.5 लाख रुपए नकद बरामद किए हैं। तीनों को जेल भेज दिया गया है। आगे की जांच जारी है।
फाइक एन्क्लेव निवासी प्रीति लायल ने बारादरी थाने में प्राथमिकी लिखाई है। उन्होंने पुलिस को बताया कि वर्ष 2022 में शिखा पाठक से उनकी मुलाकात हुई थी। शिखा ने उन्हें बताया कि उसकी बहन डा. विप्रा शर्मा एसडीएम है और वह पैसे लेकर सरकारी नौकरी लगवा देती है।
शिखा ने झांसा दिया कि कंप्यूटर आपरेटर की नियुक्तियां यूपीएसएसएससी के माध्यम से होनी हैं, जिसमें उसकी बहन डा. विप्रा शर्मा नौकरी लगवा देगी। झांसे में आई प्रीति लायल ने खुद के साथ अपने तीन साथियों आदिल खान, मुशाहिद अली और संतोष को भी यह बात बताई।
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इसके बाद सभी ग्रेटर ग्रीन पार्क निवासी विप्रा शर्मा व शिखा शर्मा से मिलने पहुंचे। आरोप है कि विप्रा शर्मा और उनके पिता विरेंद्र कुमार शर्मा ने चारों लोगों की नौकरी लगवाने का भरोसा दिया। इसके एवज में उन्होंने प्रीति लायल से दो लाख रुपये, आदिल खान से 1.80 लाख रुपये, मुशाहिद अली से 5.21 लाख रुपये और संतोष कुमार से दो लाख रुपये लिए।
आरोप है कि इसके कुछ दिनों बाद डा. विप्रा ने आयुक्त एवं सचिव राजस्व परिषद उत्तर प्रदेश लखनऊ अनुभाग-4 में कंप्यूटर आपरेटर पद पर तैनाती के नियुक्ति पत्र आयुक्त एवं सचिव उत्तर प्रदेश शासन लखनऊ मनीषा त्रिघाटिया के नाम से फर्जी हस्ताक्षर व फर्जी दस्तावेज तैयार कर जारी कर दिए।
प्रकरण की उन्होंने जांच की तो मामला फर्जी मिला। इसके बाद उन्होंने आरोपितों के विरुद्ध शिकायत की तो बारादरी पुलिस ने दोनों बहनों को नामजद करते हुए प्राथमिकी पंजीकृत कर ली। पुलिस ने विप्रा शर्मा और शिखा शर्मा को गिरफ्तार किया तो पूछताछ में उन्होंने अपनी ममेरी बहन दीक्षा का भी नाम लिया। पुलिस ने तीनों को जेल भेज दिया है।