बरेली में उर्स-ए-रजवी शुरू, भड़काऊ सामग्री पोस्ट नहीं करने की अपील करेंगे उलमा
बरेली में आला हजरत का 108वां उर्स-ए-रजवी परचम कुशाई के साथ शुरू हो गया है। उलमा मुस्लिम युवाओं से इंटरनेट मीडिया पर भड़काऊ पोस्ट न करने और सामाजिक सुध ...और पढ़ें

108 वां उर्स-ए-रजवी का परचम कुशाई से हुआ आगाज इस्लामियां स्थित उर्स स्थल पर पहुंचा जुलूस।
HighLights
बरेली में परचम कुशाई के साथ उर्स-ए-रजवी का आगाज।
उलमा भड़काऊ सोशल मीडिया पोस्ट के खिलाफ अपील करेंगे।
सामाजिक सुधार, शिक्षा और आसान निकाह पर जोर दिया जाएगा।
जागरण संवाददाता, बरेली। आला हजरत इमाम अहमद रजा खां का 108 वां उर्स-ए-रजवी गुरुवार को परचम कुशाई (धार्मिक झंडारोहण) के साथ शुरू हो गया। शुक्रवार को इस्लामिया इंटर कालेज मैदान के मंच से उलमा विभिन्न मुद्दों पर विचार व्यक्त करेंगे। वे मुस्लिम युवाओं से अपील करेंगे कि इंटरनेट मीडिया पर भड़काऊ, शांति व्यवस्था को प्रभावित करने वाली पोस्ट न करें। यदि किसी ने ऐसा किया भी हो तो उस पोस्ट को साझा न करें।
मुस्लिम लड़कियों के बहकते कदमों को किस तरह रोका जाए, शैक्षिक पिछड़ापन किस प्रकार दूर किया जाए, निकाह को आसान कैसे बनाया जाए, आपसी झगड़े-हत्याएं कैसे रोकी जाएं आदि मुद्दों पर भी लोगों को संदेश देंगे। दरगाह की ओर से इस संबंध में एजेंडा जारी किया गया।
दरगाह के मीडिया प्रभारी नासिर कुरैशी ने बताया कि उलमा महिला हिंसा व शादियों में फिजूलखर्ची रोकने, इस्लाम की अमन व शांति वाली शिक्षा का प्रसार करने, जकात यानी दान की रकम गरीब बेटियों के निकाह पर खर्च करने की अपील भी करेंगे।
गुरुवार को आजम नगर से मुख्य परचमी जुलूस निकला। ठिरिया निजावत खान और रहपुरा चौधरी से भी परचम और चादरों के जुलूस दरगाह पहुंचे। सज्जादानशीन मुफ्ती अहसन मियां ने जुलूसों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। रास्ते में जगह-जगह फातिहाख्वानी और लंगर का आयोजन हुआ।
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परंपरागत मार्गों से गुजरते हुए जुलूस दरगाह पहुंचा और बाद में इस्लामिया मैदान लौटा। मार्ग में विभिन्न स्थानों पर हिंदू और मुस्लिम समाज के लोगों ने फूल बरसाकर स्वागत किया। जुलूस के दौरान हजारों की संख्या में अकीदतमंद शामिल हुए। जुलूस में शामिल अकीदतमंदों के चलते करीब एक किमी लंबा काफिला बन गया।
रिमझिम फुहारों के बीच रात सवा नौ बजे दरगाह प्रमुख सुब्हानी मियां ने सज्जादानशीन मुफ्ती अहसन मियां, सैयद आसिफ मियां और देश-विदेश से आए उलेमा की मौजूदगी में परचम कुशाई की रस्म अदा की।
इसके बाद महफिल-ए-मिलाद का आयोजन हुआ। रात 10:35 बजे आला हजरत के बड़े साहबजादे हुज्जतुल इस्लाम मुफ्ती हामिद रजा खान के कुल शरीफ की रस्म अदा की गई। इस अवसर पर मुफ्ती सलीम नूरी बरेलवी ने कहा कि हुज्जतुल इस्लाम ने शिक्षा और आर्थिक आत्मनिर्भरता पर विशेष बल दिया तथा सुन्नियत के प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
उर्स में देश-विदेश से बड़ी संख्या में जायरीन लगातार पहुंच रहे हैं। मीडिया प्रभारी नासिर कुरैशी ने बताया कि शुक्रवार को फज्र के बाद कुरानख्वानी, रेहाने मिल्लत और मुफस्सिर-ए-आजम के कुल शरीफ की रस्में होंगी। इसके बाद मजहब-ओ-जमालक कांफ्रेंस में नामूसे रिसालत, मिशन मसलक-ए-आला हजरत, समाज सुधार, आपसी सौहार्द और सामाजिक बुराइयों के उन्मूलन जैसे विषयों पर उलेमा विचार रखेंगे।
रात में तकरीरों के साथ मुफ्ती-ए-आजम हिंद के कुल शरीफ की रस्म अदा की जाएगी। उर्स की व्यवस्था में राशिद अली खान, मौलाना ज़ाहिद रजा, परवेज नूरी, अजमल नूरी, ताहिर अल्वी, शाहिद नूरी, औरंगजेब नूरी, हाजी जावेद खान, मंज़ूर रजा आदि ने सहयोग किया।
जिलानी मियां व हामिद मियां का मनाया गया उर्स
आला हजरत इमाम अहमद रजा खां फाजिले बरेलवी के तीन दिवसीय उर्स-ए-रजवी के कई आयोजन मथुरापुर स्थित जामियातुर्रजा में हो रहे हैं। दरगाह ताजुशरिया के सज्जादानशीन काजी-ए-हिंदुस्तान मुफ्ती मुहम्मद असजद रजा खां कादरी (असजद मिया) की सरपरस्ती में और जमात रजा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं उर्स प्रभारी सलमान मियां की में दरगाह ताजुशरिया पर जिलानी मियां और हामिद मियां के कुल शरीफ़ की रस्म अदा की गई।
जमात रजा के प्रवक्ता समरान खान ने बताया बाद नमाज-ए-फज्र दरगाह पर कुरानख्वानी और नात-ओ-मनकबत की महफिल सजाई गई। फिर सुबह 7:10 पर ताजुश्शरिया के वालिद इब्राहिम रजा खां (जिलानी मियां) के कुल शरीफ की रस्म अदा की गई। दिनभर दरगाह आला हजरत और दरगाह ताजुशरिया पर जायरीनों की हाजिरी व गुलपोशी का सिलसिला चलता रहा। फिर बाद नमाज-ए-मगरिब मिलाद-ए-मुस्तफा की महफिल सजाई गई।
मुख्य कार्यक्रम का आगाज बाद नमाज-ए-ईशा कारी वसीम रजवी ने कुरान शरीफ़ की तिलावत से किया। रात 10:35 पर हुज्जतुल इस्लाम (हामिद मियां) के कुल शरीफ़ की रस्म अदा की गई। फातिहा कारी शर्फोद्दीन और मौलाना अब्दुल सत्तार ने और खुसूसी दुआ काजी-ए-हिंदुस्तान ने की। महफिल की निजामत मौलाना गुलजार ने की।
इस मौके पर हुस्साम मियां, हुम्माम मियां, फैजू नबी, कारी काजिम, मौलाना सैयद अजीमुद्दीन अजहरी, मौलाना सैयद फुरकान मियां, मौलाना शम्स, मौलाना आबिद आदि उलमा मौजूद रहे।
देश-विदेश से पहुंचे जायरीन
आला हजरत की मोहब्बत में 108वें उर्स-ए-रजवी में देश-विदेश से जायरीनों का पहुंचना शुरू हो गया है, जिसमें देश के विभिन्न राज्यों उड़ीसा, बंगाल, महाराष्ट्र, जम्मू कश्मीर, राजस्थान, उत्तराखंड, झारखंड, छत्तीसगढ़, बिहार, केरला, बेंगलुरु, दिल्ली, पंजाब, आंध्र प्रदेश, असम, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश के अलावा श्रीलंका, सऊदी अरब, मारीशस, तुर्की, साउथ अफ्रीका, दुबई आदि देश-विदेश के अकीदतमंद शिरकत करने बरेली पहुंच चुके हैं।