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    भदोही में 15 टीमें करेंगी 2.09 लाख मवेशियों का वैक्सीनेशन, टीकाकरण से बढ़ रही है इम्यूनिटी

    Updated: Sat, 18 Jul 2026 02:39 PM (GMT+05:30)

    भदोही में पशुपालन विभाग 22 जुलाई से 8 सितंबर तक 2.09 लाख मवेशियों के लिए खुरपका-मुंहपका रोग टीकाकरण अभियान चलाएगा। बारिश में बीमारी के खतरे को देखते ह ...और पढ़ें

    15 टीमें करेंगी 2.09 लाख मवेशियों का वैक्सीनेशन। AI जेनरेटेड फोटो

    15 टीमें करेंगी 2.09 लाख मवेशियों का वैक्सीनेशन। AI जेनरेटेड फोटो

    HighLights

    1. भदोही में 2.09 लाख मवेशियों का टीकाकरण लक्ष्य।

    2. खुरपका-मुंहपका रोग से बचाव हेतु अभियान।

    3. पशुपालन विभाग ने 15 टीमें गठित कीं।

    जागरण संवाददाता, ज्ञानपुर (भदोही)। बारिश के साथ ही जगह-जगह जमने वाले गंदे पानी व सड़ी-गली घासों के सेवन से पशुओं (गाय-भैंस) में वैक्टीरिया जनित बीमारी खुरपका व मुंहपका के फैलने का खतरा बढ़ जाता है।

    रोग का प्रकोप भी शुरू होता है तो लगातार मवेशी जद में आने लगते हैं। इससे पशुओं के उपचार में जहां पालकों को दिक्कत उठानी पड़ती है तो मवेशियों की होने वाली मौत से नुकसान भी पहुंचता है। ऐसे में मवेशी सुरक्षित रहें, 2.09 लाख मवेशियों के टीकाकरण कराने का लक्ष्य तय किया गया है।

    22 जुलाई से शुरू होने वाले टीकाकरण अभियान की सफलता के लिए पशुपालन विभाग की ओर से पशु चिकित्साधिकारियों के निर्देशन में 15 टीमों का गठन कर किया है। अभियान आठ सितंबर तक चलेगा।

    मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डा. एके सचान ने बताया कि टीकाकरण से मवेशी में रोग का खतरा कम हो जाता है। बताया कि जिले में कुल दो लाख 18 हजार 650 गोवंश व महिषवंशीय मवेशी हैं। इसमें से चार माह से कम आयु के बछड़े-बछिया तथा सात माह की गर्भवती गाय एवं भैंस को यह टीका नहीं लगाया जाएगा। शेष 2.09 लाख पशुओं का टीका लगाने का लक्ष्य है।

    टीमों में शामिल पशु चिकित्सकों, पशु मित्रों के जरिए टीकाकरण का कार्य शुरू कराया जाएगा। उन्होंने अभियान के दौरान पशुपालकों को अपने मवेशियों का टीकाकरण अनिवार्य रूप से कराने का आह्वान किया है।

    खुरपका, मुंहपका रोग के लक्षण

    खुरपका-मुंहपका रोग से पीड़ित मवेशियों के मुंह एवं खुरों में छाले पड़ जाते हैं। तेज बुखार आता है तो वह लंगड़ाना शुरू कर देते हैं। चारा लेना यानी भोजन करना कम कर देते हैं तो दूध उत्पादन में कमी आ जाती है। समय पर उपचार एवं टीकाकरण न होने पर पशुओं की कार्यक्षमता एवं स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

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