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    एशिया की सबसे बड़ी होलसेल फिश मार्केट में लगा ताला, 75 करोड़ से बनी 110 से अधिक दुकानों का नहीं हुआ आवंटन

    Updated: Sun, 05 Jul 2026 07:37 PM (GMT+05:30)

    चंदौली में देश की सबसे बड़ी होलसेल फिश मार्केट का निर्माण पूरा हो चुका है, जिसका लोकार्पण अक्टूबर 2025 में पीएम मोदी ने किया। 75 करोड़ की लागत वाली इस ...और पढ़ें

    एशिया का सबसे बड़ी होलसेल फिश मार्केट में लगा ताला।

    एशिया का सबसे बड़ी होलसेल फिश मार्केट में लगा ताला।

    HighLights

    1. चंदौली में 75 करोड़ की फिश मार्केट का निर्माण पूरा।

    2. पीएम मोदी ने अक्टूबर 2025 में किया था लोकार्पण।

    3. 110 से अधिक दुकानों का आवंटन अभी तक नहीं।

    जागरण संवाददाता, चंदौली। जिले में देश की सबसे बड़ी स्टेट ऑफ आर्ट होलसेल फिश मार्केट का निर्माण पूरा हो चुका है। अक्टूबर 2025 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इसका लोकार्पण भी कर दिया है। धीरे-धीरे नौ महीने बीत गए लेकिन अभी तक दुकानों का आवंटन नहीं हो सका है। आलम यह है कि 75 करोड़ की लागत से अंतरराष्ट्रीय स्तर की अल्ट्रा माडल मत्स्य मंडी में ताला लटका हुआ है।

    मंडी के निर्माण से पूर्वांचल के मत्स्य पालन करने वालों की आय दोगुनी से भी ज्यादा होगी। साथ ही 1500 से ज़्यादा लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार देने का दावा किया गया था। मछली से संबंधित सभी कारोबार एक छत के नीचे होगा। यहां फिश रेस्टोरेंट, प्रशिक्षण के लिए कांफ्रेंस हाल, प्रोसेसिंग यूनिट समेत कई तरह की सुविधाएं होंगी।

    दुकानों के आवंटन ने फंसाया पेंच

    मत्स्य मंडी के अंदर 110 से अधिक दुकानें हैं। इन दुकानों को किसानों को आवंटित करना था। मंडी समिति की ओर से एक दुकान का किराया मनमानी तरीके से निश्चित कर दिया गया था। इससे इसका लाभ किसानों को कम व्यापारियों को अधिक मिलता। जिलाधिकारी चंद्रमोहन गर्ग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए शासन से दुकानों के आवंटन को लेकर गाइडलाइन मांगी है।

    बताया जा रहा है कि इसके निर्माण के लिए मत्स्य विभाग ने 61.87 करोड़ जबकि मंडी समिति ने दस करोड़ दिया है। मत्स्य विभाग से मिला बजट खर्च हो गया लेकिन मंडी समिति की ओर से अभी तक उपकरण और एसी आदि नहीं लगवाए गए हैं।

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    जिलाधिकारी की ओर से अब तक तीन बार शासन को पत्र जारी किया गया है। दुकानों के आवंटन को लेकर दिशा निर्देश मांगे गए हैं। मंडी समिति ने अधिक दर निर्धारित कर दिया था। कुछ दिन पहले शासन को फिर पत्र भेजा गया है। -रामलाल निषाद, मत्स्य निदेशक, चंदौली।

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