चंदौली में किडनी मरीजों को नहीं करना होगा इंतजार, नए डायलिसिस भवन में होगी 30 बेड की सुविधा
चंदौली के बाबा कीनाराम मेडिकल कॉलेज में नए डायलिसिस भवन का शुभारंभ होने जा रहा है, जिससे किडनी रोगियों के लिए डायलिसिस सुविधा तीन गुना बढ़ जाएगी। अब 3 ...और पढ़ें
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नए डायलिसिस भवन में होगी 30 बेड की सुविधा।
HighLights
बाबा कीनाराम मेडिकल कॉलेज में नया डायलिसिस भवन शुरू।
डायलिसिस सुविधा तीन गुना बढ़ी, 30 बेड की व्यवस्था।
पूर्वांचल और बिहार के रोगियों को मिलेगा त्वरित उपचार।
जागरण संवाददाता, चंदौली। जिले सहित पूर्वांचल और बिहार के सीमावर्ती क्षेत्रों के किडनी रोगियों के लिए राहत भरी खबर है। बाबा कीनाराम मेडिकल कॉलेज में तैयार नए डायलिसिस भवन का शुभारंभ होगा। इसके शुरू होने के साथ ही डायलिसिस सुविधा का दायरा तीन गुना बढ़ जाएगा।
अब तक दस बेड वाले डायलिसिस केंद्र में सीमित संसाधनों के कारण प्रतिदिन केवल 30 रोगियों की डायलिसिस हो पाती थी। लेकिन, नए भवन में 30 बेड की व्यवस्था होने से प्रतिदिन लगभग 90 रोगियों का उपचार संभव हो सकेगा। इससे लंबे समय से डायलिसिस के लिए प्रतीक्षा कर रहे रोगियों को राहत मिलने की उम्मीद है। उन्हें अब प्रतीक्षा नहीं करनी होगी।
जिले की 24.50 लाख की जनसंख्या में एक मात्र डायलिसिस केंद्र मेडिकल कॉलेज में है। वर्तमान केंद्र पर प्रतिदिन दो-तीन की संख्या में रोगी पहुंचते हैं। सीमित क्षमता के कारण अभी भी लगभग 140 रोगी वेटिंग सूची में हैं और उन्हें डायलिसिस के लिए कई दिनों से प्रतीक्षा करनी पड़ रही है।
नए भवन के शुरू होने के बाद प्रतीक्षा सूची तेजी से घटने की संभावना है। भवन में आधुनिक डायलिसिस मशीनें, आक्सीजन, बिजली बैकअप और अन्य आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं, ताकि रोगियों को बेहतर और सुरक्षित उपचार मिल सके।
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मेडिकल कॉलेज में केवल जनपद ही नहीं, बल्कि सोनभद्र, वाराणसी, मीरजापुर, गाजीपुर और बिहार के कैमूर जिले से भी किडनी के रोगी उपचार के लिए पहुंचते हैं। मेडिकल कॉलेज प्रशासन के अनुसार, यहां आने वाले रोगियों में लगभग 15 प्रतिशत रोगी कैमूर जिले के होते हैं। नई सुविधा शुरू होने से इन सभी क्षेत्रों के रोगियों को समय पर डायलिसिस मिल सकेगी और गंभीर रोगियों को दूसरे नगरों का रुख नहीं करना पड़ेगा।
नए डायलिसिस भवन के शुरू होने से डायलिसिस की क्षमता तीन गुना हो जाएगी। नई व्यवस्था लागू होने के बाद प्रतीक्षा सूची को जल्द समाप्त करने का प्रयास किया जाएगा। यह सुविधा मेडिकल कॉलेज की स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत बनाएगी और रोगियों को समय पर बेहतर उपचार उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। -डॉ. नैंसी पारुल, उप प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज।
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