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    सावन शुरू होते ही DDU जंक्शन हुआ 'शिवमय', प्लेटफॉर्म पर देवघर जाने वाले श्रद्धालुओं की भीड़

    Updated: Thu, 30 Jul 2026 07:11 PM (IST)

    सावन के पहले दिन पीडीडीयू जंक्शन पर बाबा बैद्यनाथ धाम जाने वाले हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी, जिससे पूरा स्टेशन परिसर 'शिवमय' हो गया। रेलवे प् ...और पढ़ें

    सावन शुरू होते ही DDU जंक्शन हुआ 'शिवमय'।

    सावन शुरू होते ही DDU जंक्शन हुआ 'शिवमय'।

    HighLights

    1. सावन के पहले दिन DDU जंक्शन पर भीड़।

    2. हजारों श्रद्धालु बाबा बैद्यनाथ धाम के लिए रवाना।

    3. रेलवे प्रशासन ने सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए।

    जागरण संवाददाता, पीडीडीयू नगर (चंदौली)। पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन पर सावन के पहले दिन से ही शिवभक्ति का अद्भुत वातावरण देखने को मिला। दिल्ली-हावड़ा रेल मार्ग के इस प्रमुख स्टेशन से झारखंड के देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम में जलाभिषेक के लिए हजारों श्रद्धालु ट्रेनों के माध्यम से सुल्तानगंज की ओर रवाना हुए।

    पूरा परिसर बोल बम और हर-हर महादेव के उद्घोष से देर तक गूंजता रहा। सुबह से ही प्लेटफॉर्म पर यात्रियों की लंबी कतारें लगनी शुरू हो गईं।

    कंधों पर कांवड़, भगवा परिधान और चेहरे पर उत्साह लिए श्रद्धालु निर्धारित ट्रेनों का इंतजार करते दिखाई दिए। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक में धार्मिक उल्लास स्पष्ट नजर आया। बड़ी संख्या में महिलाएं भी परिवार के साथ यात्रा पर निकलीं।

    कई श्रद्धालुओं के लिए यह पहली कांवड़ यात्रा रही, जबकि अनेक भक्त वर्षों से इस परंपरा का निर्वहन कर रहे हैं। श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए रेलवे प्रशासन ने विशेष प्रबंध किए।

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    जीआरपी, आरपीएफ तथा रेलकर्मियों की अतिरिक्त तैनाती कर प्लेटफॉर्म पर सतत निगरानी रखी गई। यात्रियों को सुरक्षित ढंग से ट्रेन में चढ़ाने, भीड़ का सुचारु संचालन करने तथा किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए सुरक्षा दल पूरी तरह सक्रिय रहा।

    जंक्शन पर मिले श्रद्धालु पवन पाल ने बताया कि वे लगातार बाबा धाम की यात्रा करते हैं और हर बार करीब 120 किलोमीटर पैदल चलकर जलाभिषेक करते हैं। उनका कहना था कि कठिन रास्ते के बावजूद बाबा का आशीर्वाद उन्हें हर वर्ष फिर इस यात्रा के लिए प्रेरित करता है।

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    वहीं, जीउत नामक श्रद्धालु ने बताया कि वह पिछले 36 वर्षों से बिना नागा बाबा बैद्यनाथ धाम पहुंच रहे हैं। उनके अनुसार यह केवल धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि भगवान शिव के प्रति अटूट विश्वास, अनुशासन और समर्पण का जीवंत प्रतीक है, जिसे वह पूरे मनोयोग से निभाते आ रहे हैं।

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