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    चित्रकूट में पर्यावरण बचाने को DM की अनोखी पहल, दो साल तक पौधे सूखे तो रुकेगा कार्यदायी संस्था का भुगतान

    Updated: Sat, 18 Jul 2026 06:38 PM (IST)

    चित्रकूट में पर्यावरण संरक्षण को लेकर जिलाधिकारी ने अनोखी पहल की है। अब पौधरोपण करने वाली कार्यदायी संस्थाओं को सिर्फ पौधे लगाने से काम नहीं चलेगा, बल ...और पढ़ें

    बेड़ी पुलिया-रामघाट मार्ग में किया जा रहा पौधारोपण। जागरण

    बेड़ी पुलिया-रामघाट मार्ग में किया जा रहा पौधारोपण। जागरण 

    HighLights

    1. लगभग एक लाख पौधों के संरक्षण को निविदा की अनिवार्य शर्त बनाया गया है

    2. देखभाल में लापरवाही मिली तो कार्यदायी संस्था का भुगतान रोक दिया जाएगा

    जागरण संवाददाता, चित्रकूट। सरकारी योजनाओं में वर्षों से बड़े पैमाने पर पौधारोपण तो होता रहा, लेकिन कुछ ही महीनों में अधिकतर पौधे सूख जाने से हरियाली बढ़ाने का उद्देश्य अधूरा रह जाता था। अब चित्रकूट में इस व्यवस्था को बदलने की शुरुआत की गई है।

    सीतापुर तिराहे से बेड़ी पुलिया तक करीब 12.98 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे फुटपाथ एवं सौंदर्यीकरण परियोजना में लगाए जाने वाले लगभग एक लाख पौधों के संरक्षण को निविदा की अनिवार्य शर्त बनाया गया है। यदि पौधे सूख गए या उनकी देखभाल में लापरवाही मिली तो कार्यदायी संस्था का भुगतान रोक दिया जाएगा। अंतिम भुगतान तभी होगा, जब दो वर्ष बाद भौतिक सत्यापन में पौधे जीवित और सुरक्षित मिलेंगे।

    जिला प्रशासन ने पूर्व वर्षों के अनुभवों को देखते हुए इस बार केवल पौधारोपण नहीं, बल्कि पौधों के संरक्षण को प्राथमिकता दी है। पहले लाखों पौधे लगाने के बावजूद नियमित देखभाल न होने से बड़ी संख्या में पौधे सूख जाते थे, जिससे सरकारी धन खर्च होने के बावजूद पर्यावरण संरक्षण का उद्देश्य पूरा नहीं हो पाता था।

    नई व्यवस्था के तहत जिस संस्था को पौधारोपण का कार्य दिया जाएगा, वही दो वर्षों तक पौधों की नियमित सिंचाई, ट्री-गार्ड की व्यवस्था, निराई-गुड़ाई, खाद, कटाई-छंटाई और सूखने पर नए पौधे लगाने की जिम्मेदारी भी निभाएगी। अधिकारियों की टीम समय-समय पर मौके पर पहुंचकर पौधों का भौतिक सत्यापन करेगी। यदि कहीं पौधे सूखे मिले तो संस्था को उन्हें तत्काल बदलना होगा। संतोषजनक स्थिति न मिलने पर भुगतान रोकने के साथ संविदा की शर्तों के अनुसार कार्रवाई भी की जाएगी।

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    परियोजना के तहत सीतापुर तिराहे से बेड़ी पुलिया तक सड़क किनारे आधुनिक फुटपाथ, हरित पट्टियां, लैंडस्केपिंग, डिवाइडरों का सौंदर्यीकरण, सजावटी पौधों की श्रृंखला और बैठने की व्यवस्था विकसित की जा रही है। यह मार्ग चित्रकूट आने वाले हजारों श्रद्धालुओं और पर्यटकों का प्रमुख प्रवेश मार्ग है।

    प्रशासन का लक्ष्य इसे जिले का सबसे आकर्षक, स्वच्छ और हरा-भरा कारिडोर बनाना है। पर्यावरणविद गुंजन मिश्रा का मानना है कि यदि यह व्यवस्था प्रभावी ढंग से लागू हुई तो केवल पौधारोपण के आंकड़े नहीं बढ़ेंगे, बल्कि वास्तव में हरित क्षेत्र का विस्तार होगा। इससे सड़क किनारे हरियाली बढ़ेगी, धूल और प्रदूषण कम होगा तथा श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों को स्वच्छ, सुंदर और छायादार वातावरण मिलेगा।

    इनका कहना है

    पौधे लगाना ही पर्याप्त नहीं है, उन्हें जीवित रखना सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। इसी उद्देश्य से इस बार पौधारोपण के साथ दो वर्षों तक संरक्षण की जिम्मेदारी भी कार्यदायी संस्था को दी गई है। पौधों के जीवित रहने की पुष्टि के बाद ही अंतिम भुगतान किया जाएगा।
    - पुलकित गर्ग-जिलाधिकारी

     

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