चित्रकूट: मंडी निर्माण में आठ करोड़ के घोटाले में तत्कालीन उपनिदेशक और सहायक लेखाधिकारी गिरफ्तार
चित्रकूट के कर्वी में विशिष्ट मंडी निर्माण में हुए 8 करोड़ रुपये के गबन मामले में ईओडब्ल्यू ने बड़ी कार्रवाई करते हुए तत्कालीन उपनिदेशक अशोक कुमार और ...और पढ़ें


समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
जागरण संवाददाता, चित्रकूट। जिला मुख्यालय कर्वी स्थित विशिष्ट मंडी निर्माण में करीब आठ करोड़ रुपये के सरकारी धन के गबन के मामले में आर्थिक अपराध अनुसंधान संगठन (ईओडब्ल्यू) उत्तर प्रदेश ने बड़ी कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपित तत्कालीन उपनिदेशक (निर्माण) अशोक कुमार और सहायक लेखाधिकारी सतीश कुमार यादव को गिरफ्तार किया है।
दोनों आरोपित लंबे समय से फरार चल रहे थे और सोमवार को सर्विलांस और सटीक सूचना के आधार पर उन्हें दबोच लिया गया। दोनों आरोपित राज्य कृषि उत्पादन मंडी परिषद बांदा में तैनात थे। अशोक कुमार सेवानिवृत्त हो चुके हैं जबकि सतीष कुमार यादव वर्तमान में बाराबंकी जनपद में मंडी सचिव है। इस मंडी का निर्माण सपा सरकार में हुआ था।
यह मामला वर्ष 2019 में कर्वी कोतवाली में तत्कालीन डिप्टी डायरेक्टर निर्माण लालचंद्र सिंह ने भारतीय दंड संहिता की धारा 409, 120-बी तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कराया था, जिसमें ठेकेदार सहित तत्कालीन उप निदेशक (निर्माण) एमएम कांत, तत्कालीन सहायक अभियंता अनिल त्रिपाठी और अवर अभियंता रामेंद्र सिंह को आरोपित बनाया गया था।
बाद में 22 जून 2021 को शासन के आदेश पर विवेचना ईओडब्ल्यू को सौंप दी गई। वर्ष 2014 में कर्वी स्थित विशिष्ट मंडी निर्माण के लिए निविदा के माध्यम से कार्यदायी संस्था का मेसर्स ग्लेयर इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड गाजियाबाद चयन किया गया था।
खबरें और भी
ईओडब्ल्यू की जांच में सामने इन दोनों आरोपितों के भी नाम सामने आए थे। निर्माण कार्य के दौरान आरोपितों ने कार्यदायी संस्था मेसर्स ग्लेयर इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड गाजियाबाद के पदाधिकारियों के साथ कथित मिलीभगत कर वास्तविक सत्यापन और वित्तीय परीक्षण किए बिना नियमों के विपरीत अधिक माप (ओवर मेजरमेंट), अनुचित मूल्यांकन और अनधिकृत भुगतान कराए।
इससे शासन को लगभग आठ करोड़ रुपये से अधिक की आर्थिक क्षति हुई। दस्तावेजी, मौखिक और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर दोनों अधिकारियों की भूमिका प्रथम दृष्टया प्रमाणित पाई गई है।
मामला सामने आने पर उपनिदेशक व एई थे निलंबित, जेई हुआ था बर्खास्त
डिप्टी डायरेक्टर (निर्माण) रामनरेश मौर्या ने बताया कि विशिष्ट मंडी निर्माण घोटाले का खुलासा होने के बाद मंडी परिषद ने तत्कालीन उपनिदेशक (निर्माण) एमएम कांत, सहायक अभियंता अनिल त्रिपाठी और अवर अभियंता रामेंद्र सिंह को निलंबित कर दिया था।
जांच में सामने आया था कि बिना निर्माण कार्य पूरा कराए ठेकेदार को करीब आठ करोड़ रुपये का अग्रिम भुगतान कर दिया गया। साथ ही कार्य पूर्ण होने की झूठी रिपोर्ट मुख्यालय भेजी गई।
मामले में तीनों अधिकारियों और ठेकेदार के खिलाफ कर्वी कोतवाली में मुकदमा दर्ज हुआ। बाद में अवर अभियंता रामेंद्र सिंह को सेवा से बर्खास्त भी कर दिया गया।
झूठी रिपोर्ट और वसूली में लापरवाही पर भी कार्रवाई
तत्कालीन जिला विकास अधिकारी (डीडीसी) लालचंद्र सिंह की तहरीर पर ठेकेदार और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ गबन व झूठी रिपोर्ट भेजने का मुकदमा दर्ज कराया गया था।
अनुबंध रद्द करने के साथ ही फर्म पर 4.85 करोड़ रुपये का जुर्माना भी लगाया गया था। इस लापरवाही पर तत्कालीन उपनिदेशक (निर्माण) सुरेश चंद्र और अशोक कुमार के विरुद्ध भी विभागीय कार्रवाई के आदेश दिए गए थे।
57.89 करोड़ की परियोजना, 2015 तक होना था पूरा निर्माण
कर्वी स्थित विशिष्ट मंडी स्थल के निर्माण का निर्णय समाजवादी पार्टी सरकार के कार्यकाल में लिया गया था। परियोजना की कुल लागत 57.89 करोड़ रुपये स्वीकृत हुई थी। योजना में दुकानें, नीलामी चबूतरे, गोदाम, कैंटीन, जलाशय, कृषक विश्राम गृह और आंतरिक सड़कें शामिल थीं।
निर्माण कार्य मई 2015 तक पूरा होना था, लेकिन वर्ष 2017 तक भी परियोजना अधूरी रही। निर्माण का जिम्मा मेसर्स ग्लेयर इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड, गाजियाबाद को दिया गया था।
यह भी पढ़ें- फर्जी क्राइम ब्रांच अधिकारी बनकर एक लाख की रंगदारी वसूली, रेवाड़ी से दो आरोपी गिरफ्तार