ज्यादा मत समझाओ… कहकर बदल दिए थे वाहन, एटा में इंस्पेक्टर और विवेचक दोषी; पुलिस विभाग में हड़कंप
एटा में सड़क हादसे के बाद वाहन बदलकर फर्जी बरामदगी दिखाने के मामले में दैनिक जागरण की खबर सही साबित हुई है। जांच रिपोर्ट में तत्कालीन थाना प्रभारी, वि ...और पढ़ें

सांकेतिक तस्वीर।

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
जागरण संवाददाता, एटा। कोतवाली देहात क्षेत्र में सड़क हादसे के बाद वाहन बदलकर फर्जी बरामदगी दिखाने के मामले में दैनिक जागरण की खबर सही साबित हुई। जागरण ने मामले को प्रमुखता से प्रकाशित किया था। इसके बाद शासन स्तर से जांच के आदेश पर तत्कालीन एसएसपी श्याम नारायण ने सीओ सिटी को जांच सौंपी थी।
सोमवार को सौंपी गई जांच रिपोर्ट में तत्कालीन थाना प्रभारी, विवेचक और चौकी प्रभारी को दोषी पाया गया है। जांच रिपोर्ट वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को भेजी गई है।
दैनिक जागरण ने खबर प्रकाशित कर खोली थी पुलिस की पोल,
मामला आठ जनवरी 2026 को गांव अंबारी के पास हुए सड़क हादसे से जुड़ा है। हादसे में निगोह हसनपुर निवासी सतेंद्र की मौके पर मौत हो गई थी, जबकि उसकी पुत्री गंभीर रूप से घायल हो गई थी। घटना के बाद मृतक पक्ष ने आरोप लगाया था कि पुलिस ने आर्थिक लाभ लेकर वास्तविक दुर्घटनाकारी वाहन को बचा दिया और उसकी जगह दूसरे ट्रैक्टर व बाइक को केस में दाखिल कर दिया।
दैनिक जागरण ने इस पूरे प्रकरण को प्रमुखता से प्रकाशित कर पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए थे। इसके बाद मामले की जांच सीओ सिटी कीर्तिका सिंह को सौंपी गई थी। जांच में सामने आया कि हादसे में शामिल वास्तविक ट्रैक्टर और बाइक का सही तरीके से सत्यापन ही नहीं कराया गया। बाद में दूसरे वाहनों की बरामदगी दर्शाकर उन्हें केस में शामिल कर दिया गया।
सीओ सिटी की जांच में तत्कालीन इंस्पेक्टर, विवेचक और चौकी प्रभारी दोषी पाए
जांच रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि जिन वाहनों को दुर्घटना में प्रयुक्त दिखाया गया, उनका घटनास्थल पर मिले साक्ष्यों से मेल नहीं था। इसके बावजूद विवेचना आगे बढ़ाई जाती रही। जांच रिपोर्ट के अनुसार विवेचक राजकुमार सिंह ने दुर्घटना में प्रयुक्त वाहनों का समुचित सत्यापन नहीं कराया और विवेचना में गंभीर लापरवाही बरती। रिपोर्ट में चौकी प्रभारी की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं।
खबरें और भी
एसएसपी को भेजी गई रिपोर्ट
जांच में कहा गया कि चौकी प्रभारी को पूरे मामले की जानकारी होने के बावजूद संबंधित वाहनों को थाने की रोजनामचा में दर्ज नहीं कराया गया। तत्कालीन थाना प्रभारी विनोद कुमार पर भी प्रभावी पर्यवेक्षण न करने और विवेचना की समय-समय पर समीक्षा न करने के आरोप लगाए गए हैं।
यह भी पढ़ें- आपके दिमाग में क्या चल रहा है, बताएगी डीप लर्निंग मशीन; AMU के इंजीनियरिंग छात्रों ने बनाई डिवाइस
विवेचक राजकुमार सिंह का बयान भी सामने आया
जांच के दौरान विवेचक राजकुमार सिंह का बयान भी सामने आया। उन्होंने कहा कि जब उन्होंने वाहन बदलने को गलत बताया तो तत्कालीन थाना प्रभारी विनोद कुमार ने कहा, ज्यादा मत समझाओ, जो बताऊं वो करो। इस कारण उनको मजबूरी में वो ही करना पड़ा जिसे थानाध्यक्ष चाहते थे।
जांच रिपोर्ट में स्पष्ट कहा गया है कि यदि एफआइआर दर्ज होने के बाद वाहनों का सही सत्यापन कराया जाता तो मामले का खुलासा पहले ही हो सकता था। रिपोर्ट सामने आने के बाद पुलिस विभाग में हड़कंप है। माना जा रहा है कि दोषी पाए गए पुलिसकर्मियों पर जल्द विभागीय कार्रवाई हो सकती है।