गाजियाबाद में डेढ़ साल से छिपा था सैफई का सुमित, ट्रेनों से आकर देता था वारदातों को अंजाम
इटावा का कुख्यात बदमाश सुमित यादव, जो डेढ़ साल से गाजियाबाद में छिपा था और ट्रेनों से आकर वारदातों को अंजाम देता था, शिकोहाबाद में पुलिस मुठभेड़ में म ...और पढ़ें


समय कम है?
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जागरण संवाददाता, इटावा। डॉक्टर लूट के मामले में वांछित दो दिन पूर्व शिकोहाबाद रेलवे स्टेशन के पास एसओजी इटावा की पुलिस मुठभेड़ में मारे गए सैफई क्षेत्र के नगला हरनाथ निवासी शातिर बदमाश सुमित यादव उर्फ पहलवान ने गिरफ्तारी से बचने के लिए पिछले करीब डेढ़ साल से गाजियाबाद के खोड़ा थाना के खोड़ा कॉलोनी में ठिकाना बना लिया था।
वहीं से वह अपने गिरोह के सदस्यों के साथ ट्रेनों के जरिए इटावा, फिरोजाबाद, मैनपुरी और आसपास के जिलों में पहुंचकर लूट व अन्य वारदातों को अंजाम देता था। घटना के बाद वह तुरंत ट्रेन से वापस गाजियाबाद लौट जाता था, जिससे पुलिस उसकी सटीक लोकेशन तक नहीं पहुंच पाती थी।
पुलिस जांच में सामने आया है कि सुमित वर्ष 2016 में अपराध की दुनिया में सक्रिय हुआ था। उसके खिलाफ पहला मुकदमा इकदिल थाने पर हमले के मामले में दर्ज हुआ। इसके बाद उसने लूट, चोरी, पुलिस पर फायरिंग और अन्य गंभीर अपराधों की लंबी फेहरिस्त खड़ी कर ली।
दस वर्षों में उसके खिलाफ इटावा के सात थानों, फिरोजाबाद, लखनऊ समेत प्रदेश के विभिन्न जिलों में 26 मुकदमे दर्ज हुए। पुलिस के अनुसार उसका आपराधिक नेटवर्क उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं था, बल्कि गुजरात तक फैला हुआ था और वहां भी वह गिरोह के माध्यम से सक्रिय रहा।
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सुमित के पिता पूर्व सैनिक हैं, जबकि उसकी मां ऊसराहार क्षेत्र के एक गांव में रहती हैं। उसकी एक बहन मैनपुरी में किराये के मकान में रह रही है। पुलिस का कहना है कि सुमित लगातार ठिकाने बदलता था और आधुनिक संचार माध्यमों की बजाय आम ट्रेनों से सफर कर पुलिस की निगाह से बचने की कोशिश करता था। यही वजह रही कि लंबे समय तक वह गिरफ्तारी से बचता रहा, लेकिन आखिरकार शिकोहाबाद में पुलिस मुठभेड़ में उसका अंत हो गया।
जेल में बढ़ाता था दोस्ती, बाहर आते ही खड़ा कर देता था नया गिरोह
मुठभेड़ में मारे गए हिस्ट्रीशीटर सुमित उर्फ पहलवान की अपराध करने की कार्यशैली भी अलग थी। पुलिस सूत्रों के अनुसार वह हर गिरफ्तारी के बाद जेल में बंद अपराधियों से दोस्ती बढ़ाता और रिहा होने के बाद उनके साथ नया गिरोह सक्रिय कर देता था।
भरथना निवासी अंकित उर्फ सीपू समेत उसके अन्य साथियों से भी उसकी पहचान जेल में ही हुई थी। इसके बाद तीनों ने मिलकर इकदिल क्षेत्र के चितभवन में डा. आरएस पाल से चेन स्नेचिंग की वारदात को अंजाम दिया था। पुलिस अब सुमित से जुड़े अन्य अपराधियों और उसके नेटवर्क की कड़ियां खंगाल रही है।
पलक झपकते तोड़ देता था बाइक का लॉक
पुलिस के अनुसार सुमित उर्फ पहलवान वाहन चोरी में भी बेहद शातिर था। वह बाइक चोरी करने वाले गिरोह का सरगना रह चुका था और चौबिया क्षेत्र में चोरी की बाइकों को ठिकाने लगाने के मामलों में वांछित था।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक शिकोहाबाद में मुठभेड़ के दौरान भागते समय उसने एक मिस्त्री की बाइक लूटने का प्रयास किया और कुछ ही क्षणों में उसका लाक तोड़ दिया। हालांकि इटावा एसओजी और शिकोहाबाद पुलिस की घेराबंदी के चलते वह बचकर नहीं निकल सका। पुलिस अब उसके गिरोह से जुड़े अन्य सदस्यों की तलाश में जुटी है।
सिपाही डेविड चौहान के पेट से गोली निकाली गई
फिरोजाबाद के शिकोहाबाद क्षेत्र में एसओजी टीम पर हुई फायरिंग में गंभीर रूप से घायल इटावा एसओजी के सिपाही डेविड चौहान का आगरा स्थित पुष्पांजलि अस्पताल में सफल आपरेशन किया गया। डॉक्टर की टीम ने कई घंटे तक चले जटिल आपरेशन के बाद उनके पेट में धंसी गोली निकाल दी।
ऑपरेशन के बाद डेविड को आइसीयू में भर्ती रखा गया है, जहां विशेषज्ञ डाक्टरों की निगरानी में उनका उपचार जारी है। डॉक्टर के अनुसार उसकी हालत पहले से बेहतर है, लेकिन अगले कुछ दिन निगरानी में रखना जरूरी होगा। बताया गया कि मुठभेड़ के दौरान बदमाशों की गोली डेविड के पेट में लगी थी।
गंभीर हालत में उसे पहले स्थानीय स्तर पर प्राथमिक उपचार दिया गया, जिसके बाद बेहतर इलाज के लिए आगरा रेफर किया गया। पुष्पांजलि अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों की टीम ने तत्काल जांच की और आपरेशन का निर्णय लिया। आपरेशन सफल रहने के बाद स्वजन और पुलिस अधिकारियों ने राहत की सांस ली।
घटना की सूचना मिलते ही इटावा पुलिस के अधिकारी लगातार अस्पताल प्रशासन के संपर्क में बने हुए हैं। पुलिस विभाग के अधिकारी समय-समय पर डेविड के स्वास्थ्य की जानकारी ले रहे हैं। साथी पुलिसकर्मी और स्वजन भी उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना कर रहे हैं।
उधर, इसी फायरिंग में घायल हुए दूसरे सिपाही पुष्पेंद्र की हालत अब स्थिर बताई जा रही है। डाक्टरों के अनुसार बदमाशों की गोली उनके कंधे को चीरते हुए निकल गई थी, जिससे उन्हें गंभीर लेकिन नियंत्रित चोट आई। उनका उपचार भी लगातार जारी है और स्वास्थ्य में सुधार हो रहा है।
गौरतलब है कि शिकोहाबाद में बदमाशों की तलाश के दौरान एसओजी टीम पर अपराधियों ने अचानक ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी थी। जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने भी मोर्चा संभाला, लेकिन हमले में सिपाही डेविड चौहान और पुष्पेंद्र घायल हो गए थे।
घटना के बाद दोनों को अस्पताल पहुंचाया गया। एसएसपी बृजेश कुमार श्रीवास्तव ने बताया डेविड की हालत पर डाक्टरों की विशेष नजर बनी हुई है। संक्रमण और अन्य चिकित्सकीय जटिलताओं से बचाव के लिए उसे आइसीयू में रखा गया है।