इटावा में मोहम्मद गोरी के सेनापति की मजार होगी ध्वस्त, आदेश के खिलाफ दायर अपील खारिज
मोहम्मद गोरी के सेनापति शमशुद्दीन की मजार के ध्वस्तीकरण आदेश के खिलाफ दायर अपील खारिज कर दी गई है। यह मजार इटावा सफारी पार्क के पास आरक्षित वन क्षेत्र ...और पढ़ें

मोहम्मद गोरी के सेनापति की मजार।
HighLights
मोहम्मद गोरी के सेनापति की मजार ध्वस्तीकरण आदेश
अपील मुख्य वन संरक्षक कानपुर ने खारिज की
मजार आरक्षित वन क्षेत्र में अवैध रूप से निर्मित
जागरण संवाददाता, इटावा। मोहम्मद गोरी के सेनापति शमशुद्दीन की मजार के ध्वस्तीकरण आदेश के खिलाफ दायर अपील मुख्य वन संरक्षक कानपुर ने सुनवाई के बाद खारिज कर दी है। यह अपील मजार के सदर फजले इलाही ने दायर की दी थी। अपीलीय अधिकारी से फिलहाल उन्हें कोई राहत नहीं मिली है।
इटावा सफारी पार्क के पास स्थित आरक्षित वन क्षेत्र के करीब .0281 हेक्टेयर क्षेत्रफल में मोहम्मद गोरी के सेनापति शमशुद्दीन की मजार बनी हुई है। जिसे यहां बीहड़ वाले सैयद के नाम से जाना जाता है। चूंकि आरक्षित वन क्षेत्र में भारत सरकार की अनुमति के बिना किसी प्रकार का निर्माण नहीं हो सकता इसलिए इस मजार के ध्वस्तीकरण को लेकर वन विभाग के रेंजर अशोक कुमार शर्मा ने नियत प्राधिकारी वन न्यायालय की कोर्ट में वाद दायर किया था।
दो महीने तक चली थी सुनवाई
दो महीने तक चली सुनवाई के दौरान मजार के सदर फजले इलाही अथवा अन्य कोई भी व्यक्ति मजार के नाम राजस्व अभिलेखों में भूमि दर्ज होने का कोई साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सका। न्यायालय प्राधिकृत अधिकारी वन ने 17 अप्रैल को मजार को आरक्षित वन भूमि मानते हुए अवैध घोषित कर दिया था और 3600 वर्गफीट जमीन पर कब्जा बेदखली एवं ध्वस्तीकरण के आदेश दिए थे।
13 मई को सुनी गई थी बहस
मजार के सदर फजले इलाही ने इस आदेश के खिलाफ प्रथम अपीलीय अधिकारी कानपुर मंडल एवं मुख्य वन संरक्षक एमके जानू के समक्ष अपील दायर की। 13 मई को उनकी अपील पर दोनों पक्षों की ओर से बहस सुनी गई। वहां भी मजार के संबंध में राजस्व भू अभिलेखों संबंधी कोई दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किया जा सका। प्रथम अपीलीय अधिकारी ने 18 मई को उनकी अपील खारिज कर दी। वन रेंजर अशोक कुमार शर्मा ने बताया कि आदेश के अध्ययन के बाद अग्रिम कार्रवाई की जाएगी।