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    SC में बदतमीजी के बाद जेल भेजा गया प्रबल प्रताप, परिवार बोला- धोखाधड़ी के कारण मानसिक तनाव में था

    Updated: Mon, 13 Jul 2026 06:00 AM (IST)

    सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान बदतमीजी करने के आरोप में प्रबल प्रताप को तिहाड़ जेल भेजा गया है। ...और पढ़ें

    प्रबल प्रताप

    प्रबल प्रताप

    HighLights

    1. प्रबल प्रताप को सुप्रीम कोर्ट में बदतमीजी के बाद जेल भेजा गया।

    2. परिवार ने धोखाधड़ी और आर्थिक शोषण को मानसिक तनाव का कारण बताया।

    3. स्वजन निष्पक्ष जांच और प्रबल से मिलने की अनुमति मांग रहे हैं।

    जागरण संवाददाता, इटावा। शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में अपना केस लड़ रहे याची ने सुनवाई के दौरान बदतमीजी करने के साथ ही अपशब्द कहते हुए दस्तावेज फेंक दिए थे, जिसके बाद उसे कोर्टरूम से निकाल दिया गया था। रविवार को उसके जेल भेजे जाने पर भरथना के ग्राम नगला जय लाल भोली में रहने वाले स्वजन ने आरोप लगाए कि उसकी गिरफ्तारी को लेकर कोई अधिकारिक सूचना उन्हें नही दी गई है।

    वह लखनऊ में एलएलबी की पढ़ाई कर रहा था और अपने व साथियों के साथ हुई धोखाधड़ी व आर्थिक शोषण के कारण लंबे समय से मानसिक तनाव में था। इसी को लेकर न्याय की गुहार लेकर वह सुप्रीम कोर्ट गया था।

    प्रबल प्रताप की बड़ी बहन संध्या यादव ने बताया कि उनका भाई लखनऊ के विकास नगर स्थित एक सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट कंपनी में कार्य करता था। नौकरी के दौरान कंपनी ने उससे सिक्योरिटी के नाम पर रुपये जमा कराए थे। उसके कुछ दोस्तों ने भी उसी कंपनी में सिक्योरिटी राशि जमा कर नौकरी शुरू की थी।

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    कुछ महीनों बाद जब प्रबल और उसके साथियों ने नौकरी छोड़ दी और सिक्योरिटी राशि तथा बकाया वेतन की मांग की तो कंपनी प्रबंधन से उनका विवाद हो गया। स्वजन का आरोप है कि कंपनी ने रुपये लौटाने के बजाय एक युवती से झूठे आरोप लगवाकर छवि खराब करने का प्रयास किया। इसके बाद प्रबल ने अपने साथ हुई धोखाधड़ी एवं मानसिक उत्पीड़न की थाने में शिकायत दर्ज कराने की कोशिश की, लेकिन सुनवाई नहीं हुई।

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    पिछले वर्ष उसने लखनऊ की सीजेएम कोर्ट में कंपनी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने के लिए प्रार्थना पत्र दिया। अदालत ने पुलिस से रिपोर्ट तलब की और 26 फरवरी 2026 को मामले को निजी शिकायत के रूप में स्वीकार करते हुए प्रबल को साक्ष्य प्रस्तुत करने के निर्देश दिए, बाद में मामला खत्म हो गया।

    छह अप्रैल को प्रबल ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर मुकदमा की मांग की, लेकिन हाईकोर्ट ने याचिका खारिज कर दी। इसके बाद उसने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

    स्वजन के अनुसार 10 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान प्रबल अपनी बात रख रहा था। इसी दौरान वह अत्यधिक मानसिक तनाव में आ गया। बहन संध्या यादव का आरोप है कि पिछले 36 घंटे तक प्रबल पुलिस की हिरासत में रहा और बाद में उसे तिहाड़ जेल भेजने की जानकारी हुई है।

    परिवार का कहना है कि न तो उन्हें गिरफ्तारी की आधिकारिक सूचना दी गई और न ही यह बताया गया कि किस धाराओं में कार्रवाई की गई है। उन्होंने प्रशासन से प्रबल से मिलने की अनुमति देने और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।

    पिता बोले, बेटे पर लगाए गए आरोप निराधार

    प्रबल के पिता सुरेंद्र सिंह यादव ने कहा कि उनके बेटे पर स्वयं को चर्चित करने और लड़कियों को आपत्तिजनक संदेश भेजने जैसे जो आरोप लगाए जा रहे हैं, वे पूरी तरह निराधार और झूठे हैं। उन्होंने कहा कि इन आरोपों से पूरा स्वजन मानसिक रूप से आहत है और मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

    जेल भेजे जाने की सूचना मिलते ही फूट-फूटकर रो पड़े स्वजन

    परिवार के अनुसार, दिल्ली गए रिश्तेदार रवि यादव ने जब फोन पर तिहाड़ जेल भेजे जाने की सूचना दी तो स्वजन परेशान हो गए। मां और बहनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। स्वजन ने न्यायपालिका और प्रशासन से निष्पक्ष जांच कर प्रबल को न्याय दिलाने की मांग की है।मां कुंती देवी ने बताया कि पिछले 36 घंटे से उससे कोई संपर्क नहीं हुआ है।

    दिल्ली पहुंचे रवि यादव ने दी स्वजन को जानकारी

    प्रबल के ममेरे भाई रवि यादव ने बताया कि शनिवार दोपहर एक अज्ञात नंबर से प्रबल का फोन आया। उसने बताया कि वह सुप्रीम कोर्ट के पास स्थित तिलक मार्ग थाने में है। सूचना मिलने पर रवि उसी शाम थाने पहुंचे और उनकी प्रबल से मुलाकात हुई। रविवार सुबह जब वह दोबारा थाने पहुंचे तो पता चला कि प्रबल को जेल भेज दिया गया है।

    उन्होंने एक अधिवक्ता की सहायता ली है और उम्मीद जताई कि सोमवार को पूरे मामले की जानकारी मिल सकेगी। रवि के अनुसार, रविवार दोपहर प्रबल का मानसिक स्वास्थ्य परीक्षण दिल्ली के शाहदरा के मानसिक स्वास्थ्य अस्पताल में कराया गया। प्रबल ने उन्हें बताया कि लगभग आठ-नौ महीने पहले उसे पता चला था कि जिस कंपनी में वह कार्य कर रहा था वहां कथित रूप से हवाला और साइबर फ्रॉड से जुड़े कार्य हो रहे हैं। जब उसने इसका विरोध किया तो कंपनी ने उसे नौकरी से निकाल दिया, दो महीने का वेतन नहीं दिया और उसके बैंक खाते से भी रुपये निकाल लिए। रवि का कहना था कि कोर्ट में उसने जिन दस्तावेजों को उछाला, उनमें कंपनी के खिलाफ महत्वपूर्ण साक्ष्य मौजूद थे।

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