योगी कैबिनेट विस्तार: 32 साल में शून्य से शिखर तक पहुंचीं कृष्णा, जहां रखा कदम...वहीं मिली सफलता
कृष्णा पासवान ने 32 साल के जनसेवा के सफर में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता से मंत्री पद तक का मुकाम हासिल किया। फतेहपुर की पहली महिला मंत्री बनीं कृष्णा ने निष ...और पढ़ें

32 साल में शून्य से शिखर तक पहुंचीं कृष्णा।

समय कम है?
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जागरण संवाददाता, फतेहपुर। 32 साल पहले जनसेवा के जुनून से कृष्णा पासवान को शून्य से शिखर तक पहुंचा दिया। वर्ष 1994 में गांव-गांव साइकिल से भाजपा की आवाज बुलंद करने वाली कृष्णा ने राजनीति में जैसे ही कदम रखा सफलता उनके कदम चूमने लगी।
गोपालपुर कुसुंभी में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता रहीं कृष्णा ने जब 1995 में अपनी नौकरी छोड़कर खेसहन वार्ड से चुनाव लड़ा तो उन्हें कई तरह के सामाजिक ताने सुनने पड़े, पर चुनाव में जीत दर्ज कर सदस्य जिला पंचायत बनीं तो गांव-समाज ने उन्हें सिर-माथे बैठाया।
कृष्णा पासवान के राजनीतिक करियर को मुख्य बात यह है कि वह निष्ठा, समर्पण और जुझारूपन की प्रतिमूर्ति बनकर उभरी, जिसका नतीजा रहा कि जिला पंचायत राजनीति, क्षेत्र पंचायत और विधानसभा चुनाव में वह जनता की पहली पसंद रहीं। करियर में यदि सिर्फ 2007 के विधानसभा का चुनाव में सिर्फ पांच हजार वोटों से पराजय को छोड़ दिया जाए तो कभी पराजय का मुंह ही नहीं देखा।
अपने दम पर वह दो बार सदस्य जिला पंचायत, चौथी बार विधायक हैं, जबकि अपने बेटे विकास पासवान के हसवा ब्लाक प्रमुख बनाने में सफल रहीं। कृष्णा की राजनीति का फार्मूला सबका साथ, सबका विकास व सबका विश्वास वाला रहा, जिसका फायदा यह रहा कि उनके राजनीति प्रतिद्वंदी सफल नहीं हो पाए। बसपा, सपा और कांग्रेस के दिग्गज भी उनके सामने टिक नहीं पाए और वह विजय पताका लहराती गयीं।
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दोआबा से पहली महिला मंत्री बनीं कृष्णा
यह पहला अवसर है कि फतेहपुर की मूल निवासी के रूप में कृष्णा ने मंत्री बनकर जिले का मान बढ़ाया है। महिला के रूप में वह पहली मंत्री बनीं। यूं तो योगी सरकार-एक में भी उन्हें समाज कल्याण विभाग का मंत्री बनाए जाने की चर्चा थी, लेकिन किसी कारण से उस बार उन्हें मंत्री नहीं बनाया गया था। लेकिन योगी-सरकार दो में उन्हें राज्यमंत्री बनाया गया है।
फतेहपुर से यूपी सरकार में यह रह चुके मंत्री
इंद्रजीत कोरी, छोटेलाल, जागेश्वर प्रसाद, अचल सिंह, नरेश उत्तम पटेल, अमरजीत सिंह जनसेवक, मुन्ना लाल मौर्य, राजेंद्र पटेल, राधेश्याम गुप्ता, अयोध्या प्रसाद पाल, रणवेंद्र प्रताप सिंह, जय कुमार सिंह जैकी।
ढाई करोड़ की मालिकन है कृष्णा पासवान
विधानसभा चुनाव 2022 में दिए गये हलफनामे की बात की जाए तो उनकी हैसियत 2.40 करोड़ के आसपास है। जिसमें 99.50 लाख की चल संपत्तियां और 1.44 करोड़ की अचल संपत्तियां है। उस समय उन पर 45.50 लाख का कर्ज भी था। यह संपत्ति उन्होंने कृषि और विधायक पेंशन से अर्जित बताया था। हलफनामें में कोई भी आपराधिक मामला नहीं होना बताया था।
कृष्णा पासवान का राजनीतिक सफर-
- वर्ष 1992 में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता गोपालपुर कुसंभी में बनीं।
- वर्ष 1995 में नौकरी छोड़कर खेसहन वार्ड से सदस्य जिला पंचायत बनीं।
- वर्ष 2000 में गाजीपुर वार्ड से सदस्य जिला पंचायत का चुनाव जीतीं।
- वर्ष 2002 में किशनपुर विधानसभा सीट से बसपा के मुरलीधर गौतम को हराकर भाजपा से विधायक बनीं।
- वर्ष 2007 में बसपा के मुरलीधर गौतम से चुनाव हारी और फतेहपुर भाजपा जिलाध्यक्ष बनीं ।
- वर्ष 2007 में संगठन में रहते हुए अनुसूचित मोर्चा की राष्ट्रीय मंत्री बनाई गयीं।
- वर्ष 2010 में कानपुर-बुंदेलखंड की क्षेत्रीय संयोजक बनाई गयीं।
- वर्ष 2012 में भाजपा प्रदेश संगठन में प्रदेश उपाध्यक्ष के पद पर काम किया।
- वर्ष 2012 में किशनपुर विधानसभा सीट खत्म होकर परिसीमन के जरिए खागा सुरक्षित सीट बनीं यहां पर लगातार तीन बार विधायक चुनीं गईंं।
(नोट- 2017 से 2022 तक विधानमंडल में सचेतक और 2022 से वर्तमान तक विधान मंडल की बाल विकास पुष्टाहार समिति की सभापति हैं।)
कृष्णा पासवान की पारिवारिक पृष्ठभूमि
- शिक्षा- हाईस्कूल
- पति- श्रीपाल पासवान, कृषक
- पुत्र-विकास पासवान (हसवा ब्लाक प्रमुख है), शैलेंद्र पासवान (उद्योग पति पेट्रोल पंप व स्कूल आदि), विवेक पासवान (अविवाहित)
- पुत्रवधू-श्रद्धा एमबीबीएस (पत्नी विकास), अर्चना गृहणी (पत्नी शैलेंद्र)
- बेटियां-उमां गृहणी पति बाल विकास पुष्टाहार में अधिकारी (मेरठ), सुमन गृहणी पति पीडब्ल्यूडी विभाग में इंजीनियर (जनपद अयोध्या), अनामिका (अविवाहित)