फिरोजाबाद: बेटी-पुत्रवधू से दुष्कर्म का दोषी अंतिम सांस तक रहेगा जेल में, पीड़िताओं के बयान बने सजा का आधार
फिरोजाबाद में अपनी बेटी और पुत्रवधू से दुष्कर्म के दोषी राम स्वरूप गोस्वामी को फास्ट ट्रैक कोर्ट ने अंतिम सांस तक जेल में रहने की सजा सुनाई है। ...और पढ़ें

सांकेतिक तस्वीर।
HighLights
दोषी राम स्वरूप को अंतिम सांस तक जेल।
बेटी और पुत्रवधू से दुष्कर्म का मामला।
पीड़िताओं के बयान बने सजा का आधार।
जागरण संवाददाता, फिरोजाबाद। अपनी ही बेटी और पुत्रवधू से दुष्कर्म करने वाले को फास्ट ट्रैक कोर्ट ने मंगलवार को अंतिम सांस तक जेल में रहने की सजा सुनाई है। विरोध करने पर वह पीड़िताओं और परिवार के अन्य लोगों को धमकाता था। उस पर एक लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया है।
मामला थाना दक्षिण में मई 2024 का है। 11 मई को दोषी राम स्वरूप गोस्वामी ने गुमशुदगी दर्ज कराते हुए पुलिस को बताया कि उसकी पत्नी, बेटा, बहू, बेटियां और उनके बच्चे गायब हो गए हैं। पूरा परिवार गायब होने की सूचना पर पुलिस सक्रिय हो गई। खोजबीन करने पर गायब स्वजन को अलीगढ़ से बरामद कर लिया।
विरोध करने पर देता था धमकी, निजात पाने को घर छोड़ गया था परिवार
पत्नी ने पुलिस को बताया कि रामस्वरूप अपनी बेटी और बहू के साथ जबरन दुष्कर्म करता है। विरोध पर जान से मारने की धमकी देता है। उसकी करतूत से परेशान होकर पूरा परिवार अलीगढ़ चला गया था। पीड़िताओं ने भी न्यायालय में यही बयान दिए। इसके बाद रामस्वरूप और उसके बेटे विकास को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। जांच के बाद विवेचक ने मामले में दुष्कर्म, धमकी, साजिश समेत अन्य धाराओं में आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया।
पीड़िताओं के बयान बने सजा का आधार, फास्ट ट्रैक कोर्ट ने दिया निर्णय
मामले की सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (फास्ट ट्रैक कोर्ट) संख्या- एक देव दत्त के न्यायालय में हुई। अभियोजन की तरफ से एडीजीसी मनोज कुमार ने पक्ष रखा। साक्ष्य एवं गवाहों के बयान के आधार पर न्यायालय ने राम स्वरूप को दोषी पाया। उसे आजीवन कारावास (जीवन की शेष अवधि होगा) की सजा सुनाई। अर्थदंड की 80 प्रतिशत धनराशि दोनों पीड़िताओं को आधी-आधी दी जाएगी। न्यायालय ने बेटे विकास को दोष मुक्त करार दिया।
बिना मेडिकल पीड़िता के बयान के आधार पर ठहराया जा सकता है दोषी
बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने न्यायालय में कहा कि इस मामले में पीडिताओं का मेडिकल नहीं कराया गया है, जिससे बलात्कार की पुष्टि नहीं होती हो। वहीं पीड़ित पक्ष के अधिवक्ता ने उच्चतम न्यायालय द्वारा संतोष प्रसाद उर्फ संतोष कुमार बनाम स्टेट आफ बिहार (2020)3 एसएससी 643 के प्रकरण का उदाहरण दिया। इसमें यह कहा गया है कि अभियुक्त को एकमात्र पीड़िता के बयान के आधार पर दोषी ठहराया जा सकता है, बशर्ते पीड़िता का बयान ठोस, अकाट्य एवं विश्वसनीय हो।
खबरें और भी
यह भी पढ़ें- 50 रुपये में आगरा से गोवर्धन जाएंगी 1100 बसें, मुड़िया मेला के श्रद्धालुओं के लिए यूपी रोडवेज का प्लान तैयार
न्यायालय ने पीडिताओं के बयानों का अवलोकन व विश्लेषण किया। इससे यह पता चलता है कि इस प्रकरण की दोनों पीड़िताओं के बयान बलात्संग के संबंध में ठोस, अकाट्य व विश्वसनीय है। इस प्रकार इस प्रकरण की दोनों पीडिताओं और एक मात्र चश्मदीद साक्षी के बयानों को केवल चिकित्सीय आख्या के अभाव में नकारा नहीं जा सकता।
यह भी पढ़ें- 390 करोड़ से बनेगी 51 KM लंबी सड़क, आगरा-जलेसर रोड का सफर होगा सुहाना
पश्चाताप न होना बना कड़ी सजा की वजह
पीड़ित पक्ष के अधिवक्ता ने तर्क दिया कि दोषी ने पूरे समाज को कलंकित किया है। न्यायालय ने भी यह माना कि रामस्वरूप ने घिनौना कृत्य किया है। इसके साथ ही न्यायालय में उसके आचरण से लगता है कि उसे अपने किए का पश्चाताप भी नहीं है। इसलिए उसे कड़ी सजा दिया जाना ही न्यायोचित होगा।