बच्चे को उम्रकैद, फिरोजाबाद में दूसरी बार सुनाई गई ये सजा, बच्ची से दुष्कर्म पर किशोर को दिया गया था 2024 में आजीवन कारावास
फ़िरोज़ाबाद में एक किशोर को बच्चे की हत्या में उम्र कैद की सजा से पहले एक अन्य बाल अपचारी को बच्ची से दुष्कर्म के मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाई ...और पढ़ें

सांकेतिक तस्वीर।
HighLights
पहले भी बच्ची से दुष्कर्म में दी जा चुकी उम्रकैद की सज़ा
फ़िरोज़ाबाद की अदालत ने अक्टूबर 2024 में दिया था दोषी करार
जागरण संवाददाता, फिरोजाबाद। बच्चे की हत्या में किशोर को उम्र कैद दिए जाने की गूंज पूरे देशभर में है। यह पहला मामला नहीं। इससे पहले भी फिरोजाबाद में एक अन्य बच्चे को आजीवन कारावास की सजा सुनाई जा चुकी है। किशोर ने एक बच्ची के साथ दुष्कर्म किया था। अदालत ने इसे अक्षम्य माना था।
किशोर उम्र के एक अन्य अपराधी को 21 महीने पहले भी इसी बाल न्यायालय ने बच्ची से दुष्कर्म के मामले में उम्र कैद की सजा सुनाई थी। थाना उत्तर क्षेत्र में 15 मार्च 2021 की शाम चार बजे खेलते हुए पड़ोसी की छत पर पहुंची 10 वर्षीय बालिका के साथ 17 वर्ष एक माह के बाल अपचारी ने दुष्कर्म किया। इस दौरान उसने 15 वर्ष के एक सह बाल अपचारी को निगरानी के लिए पास में खड़ा किया था।
बालिका को ढूंढते हुए पहुंचे भाई ने बाल अपचारी को पकड़ लिया था, लेकिन वह उसकी पिटाई कर भाग निकला। मामले की सुनवाई पहले किशोर न्याय बोर्ड में हुई। वहां से फाइल बाल न्यायालय एवं पाक्सो कोर्ट मुमताज अली के न्यायालय में भेजी गई। उन्होंने चार अक्टूबर 2024 को दोषी करार देते हुए उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
इस मामले में भी मद्रास उच्च न्यायालय द्वारा छह जनवरी 2023 को राजकुमार बनाम राज्य में दिए गए निर्णय की नजीर पेश की गई थी। वहीं सह बाल अपचारी को किशोर न्याय बोर्ड ने तीन वर्ष की सजा दी।
देर से ही सही, लेकिन बेटे को मिला न्याय
रसूलपुर क्षेत्र में भवन निर्माण सामग्री की दुकान चलाने वाले नरेंद्र कुमार 10 वर्ष बाद आए न्यायालय के निर्णय से संतुष्ट नजर आए। उन्होंने कहा कि भले ही लंबा इंतजार करना पड़ा, लेकिन न्यायालय से इंसाफ मिला है। उन्होंने बताया कि उनके तीन बेटे और एक बेटी में वीर प्रताप तीसरे नंबर का था। बाल अपचारी से उनकी कोई रंजिश नहीं थी।
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उसने पैसे वसूलने के लिए हत्या की थी। इस घटना से वह बिल्कुल टूट गए थे। सभी हैरान थे कि रुपये के लिए छह वर्षीय बच्चे की हत्या कर दी गई। बुधवार को सजा सुनाए जाने के समय वह न्यायालय में उपस्थित थे। न्यायालय ने निर्णय सुनाया तो उनकी आंखें भर आईं।
दो साल पहले मकान बेचकर चला गया बाल अपचारी का परिवार
नरेंद्र ने बताया कि बाल अपचारी साढ़े चार वर्ष तक जेल में रहा। जमानत पर छूटने के बाद उसने शादी कर ली। वह दो भाइयों में छोटा था। वह और उसके परिवार के लोग दो वर्ष पूर्व मकान बेचकर कहीं और चले गए।