फिरोजाबाद: नेफ्रोलॉजिस्ट के बिना चल रही डायलिसिस यूनिट, युवती की मौत पर उप मुख्यमंत्री ने मांगी रिपोर्ट
फिरोजाबाद के मेडिकल कॉलेज अस्पताल में डायलिसिस के दौरान एक युवती की मौत हो गई, जिससे यूनिट में नेफ्रोलाजिस्ट की कमी और एंबुलेंस की अनुपलब्धता उजागर हु ...और पढ़ें

फाइल फोटो।
HighLights
डायलिसिस के दौरान युवती की मौत, नेफ्रोलाजिस्ट नहीं था।
एंबुलेंस ने मरीज को ले जाने से मना किया, परिजन दौड़े।
उप मुख्यमंत्री ने मामले का संज्ञान लिया, जांच के आदेश।
जागरण संवाददाता, फिरोजाबाद। स्वशासी राजकीय मेडिकल कॉलेज के अस्पताल में सोमवार सुबह सिरसागंज की युवती की मृत्यु ने वहां संचालित डायलिसिस यूनिट और अस्पताल में अव्यवस्थाओं की पोल खोल दी है। प्रारंभिक जांच में पता चला है कि यूनिट बिना नेफ्रोलाजिस्ट (किडनी रोग विशेषज्ञ) के चल रही थी।
यही वजह है कि डायलिसिस के दौरान हालत बिगड़ने पर युवती को उपचार नहीं मिल सका। रही सही कसर यूनिट के बाहर खड़ी एंबुलेंस के चालक ने पूरी कर दी। उसने 300 मीटर दूर ट्रामा सेंटर तक युवती को ले जाने से मना कर दिया।
इसके बाद स्वजन उसे स्ट्रेचर से लेकर ट्रामा सेंटर की तरफ दौड़े। हालांकि वहां पहुंचने से पहले युवती ने दम तोड़ दिया। ये मामला उप मुख्यमंत्री तक पहुंच गया है।
उपचार के अभाव में सोमवार को सिरसागंज की युवती की हो गई थी मृत्यु
सिरसागंज के गांव मदनपुर निवासी मान सिंह की 20 वर्षीय बेटी कीर्ति की पांच माह से मेडिकल कॉलेज अस्पताल परिसर में संचालित यूनिट में नियमित रूप से डायलिसिस चल रही थी। सोमवार सुबह साढ़े सात बजे मां और दादी कीर्ति को लेकर आईं थीं।
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एंबुलेंस ने मिलने पर स्ट्रेचर पर लेकर दौड़े थे स्वजन, फिर भी नहीं बचा पाए जान
डायलिसिस शुरू होने के 10 मिनट बाद युवती की हालत बिगड़ने लगी, जिसे संभालने वाला वहां कोई विशेषज्ञ नहीं था। इसलिए चिकित्सक ने सरकारी ट्रामा सेंटर रेफर किया। वहां तक ले जाने के लिए स्वजन ने अस्पताल परिसर में खड़ी 108 एंबुलेंस के चालक से मदद मांगी, लेकिन उसने यह कहकर मना कर दिया कि वह किसी अन्य मरीज को लेने आया है।
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इस पर स्वजन और यूनिट का स्टाफ युवती को स्ट्रेचर पर लिटाकर दौड़ पडे। ट्रामा सेंटर पहुंचे तो चिकित्सक ने मृत घोषित कर दिया। उनके स्ट्रेचर लेकर दौड़ने का वीडियो इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित हो गया।
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सीएम तक पहुंचा मामला
मंगलवार को यह मामला उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक तक पहुंच गया। दोपहर में उनके कार्यालय से प्राचार्य डा. योगेश गोयल से रिपोर्ट मांगी गई।वहीं डीएम संतोष कुमार शर्मा ने भी जानकारी ली। प्राचार्य ने बताया कि उन्होंने मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. नवीन जैन से इस पूरे प्रकरण में रिपोर्ट मांगी है। यूनिट का संचालन करने वाली संस्था को भी नोटिस दिया गया है।
पीपीपी मॉडल पर संचालित है यूनिट
अस्पताल परिसर में डायलिसिस यूनिट पीपीपी मॉडल पर संचालित है। यहां केवल उन्हीं मरीजों की डायलिसिस हो सकती हैं, जिनकी स्थिति गंभीर नहीं है। जिनकी डायलिसिस पहले कहीं हो चुकी हो और वह किसी विशेषज्ञ से उपचार ले रहे हैं।
प्राचार्य ने इसमें अनुबंध के आधार पर नैफ्रोलॉजिस्ट, चिकित्साधिकारी, टेक्नीशियन की संख्या, नाम व उपस्थित का विवरण मांगा है। युवती की डायलिसिस से पूर्व किस चिकित्सक ने जांच की थी। यूनिट में मरीज की स्थिति गंभीर होने पर उपचार के क्या मानक हैं, कितने टेक्नीशियन, नर्स एवं कर्मचारी तैनात हैं। इसका ब्यौरा भी मांगा है।
नेफ्रोलाजिस्ट ऑन कॉल आते हैं, यूनिट प्रबंधक का कहना
सूत्रों का कहना है कि तीन मरीज पर एक टेक्नीशियन और एक नर्स की तैनाती होनी चाहिए, लेकिन यहां नेफ्रोलाजिस्ट तक तैनात नहीं हैं। हालांकि यूनिट प्रबंधक प्रवेश तोमर का कहना है कि उनके यहां नेफ्रोलॉजिस्ट ऑन कॉल आते हैं। कीर्ति की डायलिसिस पांच माह से सप्ताह में दो दिन सोमवार और गुरुवार को होती थी। रविवार को वह किसी शादी समारोह में गई थी। वहां खानपान में लापरवाही की वजह से तबीयत बिगड़ी थी।
नेफ्रोलॉजिस्ट के साथ रहता है कीर्ति का भाई
यूनिट प्रबंधक ने बताया कि कीर्ति के भाई विवेक आगरा में एक निजी अस्पताल में नेफ्रोलॉजिस्ट के साथ रहते हैं। वह बहन की गंभीर स्थिति के बारे में अच्छी तरह जानते थे। कीर्ति की हालत गंभीर थी।
गेट पर प्रसव मामले में जांच करने पहुंचे सिटी मजिस्ट्रेट
सरकारी सौ शैया अस्पताल के गेट पर 19 जून को नाथ की बगीची, रामगढ़ निवासी खुशी को प्रसव हाे गया था। इसमें स्वास्थ्यकर्मियों की लापरवाही की बात सामने आई थी। इस मामले में मंगलवार दोपहर सिटी मजिस्ट्रेट विनोद कुमार पांडेय जांच करने पहुंचे। इसमें ये बात सामने आई कि महिला को अस्पताल लाते समय ही गेट पर प्रसव हो गया था।
वहीं महिला के गर्भ में जुड़वा बच्चे थे। दूसरे बच्चे का जन्म अस्पताल में महिला चिकित्सक और स्वास्थ्यकर्मियों की निगरानी में हुआ था। एक दिन बाद प्रसूता और जुड़वा बच्चों को छुट्टी दी गई थी।