सावन का पहला सोमवार: दूधेश्वरनाथ में उमड़ रहा आस्था का सैलाब, दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की लगीं कतारें
गाजियाबाद के दूधेश्वरनाथ मंदिर में सावन के पहले सोमवार पर शिवभक्तों की भारी भीड़ उमड़ रही है। विशेष शुभ योगों के साथ 24 घंटे जलाभिषेक और पूजा-अर्चना क ...और पढ़ें
HighLights
दूधेश्वरनाथ मंदिर में सावन के पहले सोमवार पर उमड़ी आस्था।
24 घंटे जलाभिषेक और विशेष पूजा-अर्चना के व्यापक इंतजाम।
प्रीति, आयुष्मान, सुकर्मा, शिव योग का दुर्लभ संयोग बना।
जागरण संवाददाता, गाजियाबाद। सिद्धपीठ श्री दूधेश्वरनाथ मठ महादेव मंदिर सावन के पहले सोमवार पर दर्शन के लिए रात से ही शिवभक्तों की कतारें लग रही हैं। मंदिर के पीठाधीश्वर एवं जूना अखाड़ा के अंतरराष्ट्रीय प्रवक्ता श्रीमहंत नारायण गिरि महाराज के पावन सानिध्य और अध्यक्षता में सोमवार को भगवान दूधेश्वर की विशेष पूजा-अर्चना, जलाभिषेक और रुद्राभिषेक का आयोजन किया गया।
देश-विदेश से लाखों श्रद्धालुओं के मंदिर पहुंचने की संभावना को देखते हुए जिला प्रशासन, पुलिस और मंदिर प्रबंधन ने व्यापक व्यवस्थाएं की हैं। मंदिर के मीडिया प्रभारी एसआर सुथार ने बताया कि भगवान दूधेश्वर का जलाभिषेक रविवार रात 12 बजे से शुरू होकर सोमवार रात 12 बजे तक लगातार चलेगा।
24 घंटे श्रद्धालुओं के लिए खुले रहेंगे कपाट
इस दौरान मंदिर के कपाट पूरे 24 घंटे श्रद्धालुओं के लिए खुले रहेंगे। सबसे पहले श्रीमहंत नारायण गिरि महाराज भगवान दूधेश्वर का पूजन एवं जलाभिषेक करेंगे, जिसके बाद श्रद्धालुओं के लिए दर्शन शुरू होंगे। रात दो बजे भगवान का दिव्य एवं भव्य श्रृंगार किया जाएगा, जो भक्तों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र रहेगा।
वहीं प्राचीन देवी मंदिर, द्वारका पुरी के महंत गिरिशानंद गिरि महाराज धूप एवं दीप आरती संपन्न कराएंगे। दोपहर की आरती के बाद भगवान को छप्पन भोग अर्पित किया जाएगा। श्रीमहंत नारायण गिरि महाराज ने बताया कि इस बार सावन का पहला सोमवार विशेष शुभ संयोग लेकर आया है। इस दिन प्रीति योग, आयुष्मान योग, सुकर्मा योग और शिव योग का दुर्लभ संयोग बन रहा है।
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इन शुभ योगों में भगवान शिव की आराधना, जलाभिषेक और रुद्राभिषेक करने से सभी कष्ट दूर होते हैं तथा सुख, समृद्धि और आरोग्य का आशीर्वाद प्राप्त होता है। मंदिर में आठों प्रहर पूजन और रुद्राभिषेक भी कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा के लिए सभी आवश्यक इंतजाम किए गए हैं, ताकि सावन का पहला सोमवार हर शिवभक्त के लिए यादगार और ऐतिहासिक बन सके।