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    गाजियाबाद में बनेगा यूपी का पहला डॉग क्रेमेटोरियम, मंत्रोच्चारण के साथ होगा कुत्तों का अंतिम संस्कार

    Updated: Mon, 03 Aug 2026 05:25 AM (IST)

    गाजियाबाद नगर निगम प्रदेश में पहली बार कुत्तों के सम्मानजनक अंतिम संस्कार के लिए सीएनजी आधारित शवदाह गृह बना रहा है। यहां पालतू कुत्तों का शुल्क लेकर ...और पढ़ें

    एआई जेनेरेटेड इमेज।

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    HighLights

    1. गाजियाबाद में प्रदेश का पहला सीएनजी डॉग शवदाह गृह।

    2. पालतू व आवारा कुत्तों का होगा सम्मानजनक अंतिम संस्कार।

    3. इच्छुक पशुपालकों के लिए मंत्रोच्चार, अस्थि विसर्जन की सुविधा।

    हसीन शाह, गाजियाबाद। प्रदेश में पहली बार नगर निगम कुत्तों के शवों के सम्मानजनक अंतिम संस्कार की व्यवस्था करने जा रहा है। विजय नगर जोन स्थित एबीसी (एनिमल बर्थ कंट्रोल) सेंटर के पास अत्याधुनिक सीएनजी आधारित शवदाह गृह बनाया जाएगा।

    यहां इच्छुक पशुपालकों की मांग पर मंत्रोच्चारण और विधि-विधान के साथ अंतिम संस्कार कराया जाएगा। इतना ही नहीं, एजेंसी द्वारा अस्थियों के संग्रह और उनके विसर्जन की भी व्यवस्था कराई जाएगी।

    नगर निगम ने इसके निर्माण के लिए टेंडर जारी कर दिया है। शवदाह गृह निर्माण कार्य और संचालन सार्वजनिक निजी भागीदारी (पीपीपी) माडल के तहत एजेंसी द्वारा किया जाएगा।

    बड़ी संख्या में कुत्ते पालने का चलन

    शहर में बड़ी संख्या में लोग कुत्तों को परिवार के सदस्य की तरह पालते हैं। ऐसे में उनकी मृत्यु के बाद सम्मानजनक अंतिम विदाई की व्यवस्था नहीं होने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।

    कई लोग निजी स्तर पर अंतिम संस्कार कराते हैं, जबकि कुछ मामलों में शवों का विज्ञानी तरीके से निस्तारण नहीं हो पाता। इसे देखते हुए नगर निगम ने आधुनिक सीएनजी शवदाह गृह बनाने का निर्णय लिया है।

    इसका संचालन करने वाली निजी एजेंसी पालतू कुत्तों के अंतिम संस्कार के लिए निर्धारित शुल्क वसूलेगी। जबकि शहर में मृत मिलने वाले आवारा कुत्तों का अंतिम संस्कार पूरी तरह निश्शुल्क किया जाएगा।

    शवदाह गृह की खास बात यह होगी कि यहां केवल शवों का निस्तारण ही नहीं होगा, बल्कि इच्छुक पशुपालकों की धार्मिक आस्था का भी सम्मान किया जाएगा। यदि कोई परिवार चाहता है तो पंडित की मौजूदगी में मंत्रोच्चारण के साथ अंतिम संस्कार कराया जाएगा तो एजेंसी शुल्क लेकर उसकी व्यवस्था करेगी।

    हालांकि यह व्यवस्था पशु पालक की मांग पर होगी। एजेंसी खुद से धार्मिक मान्यता के अनुसार अंतिम संस्कार नहीं करेगी। यदि कोई पशु पालक सामान्य अंतिम संस्कार कराना चाहता है तो शव का बिना धार्मिक धार्मिक रीति-रिवाजों के उसका अंतिम संस्कार कर दिया जाएगा।

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    शुल्क कितना लिया जाएगा अभी तय नहीं किया गया है।

    एजेंसी शुल्क लेकर करेगी अस्थि विसर्जन 

    यदि कोई पशु पालक खुद अस्थि विसर्जन करना चाहता है तो वह कर सकता है। यदि किसी पशुपालक को एजेंसी से अस्थि विसर्जन कराना है तो उसके लिए शुल्क देना होगा। एजेंसी धार्मिक मान्यताओं के आधार पर उसका विसर्जन करेगी।

    अंतिम संस्कार कराने के समय ही एजेंसी द्वारा पशुपालक से पूछा जाएगा कि क्या उन्हें अस्थि चाहिए ? ऐसे में पशुपालक अगले दिन आकर कुत्ते की अस्थि ले सकेगा।

    पर्यावरण को होगा फायदा 

    नगर निगम अधिकारियों का मानना है कि इस व्यवस्था से खुले स्थानों पर पशुओं के शव फेंकने या असंगठित तरीके से निस्तारण की समस्या पर रोक लगेगी। इससे शहर में स्वच्छता व्यवस्था बेहतर होगी और पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।

    सीएनजी आधारित शवदाह गृह होने के कारण पारंपरिक तरीकों की तुलना में प्रदूषण भी कम होगा। नगर निगम ने इसकी टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी है। चयनित एजेंसी को निर्माण के साथ संचालन की जिम्मेदारी भी सौंपी जाएगी। इसके बदले एजेंसी नगर निगम को प्रतिवर्ष निर्धारित राजस्व भी देगी।

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    कुत्तों के शवों के अंतिम संस्कार के लिए पीपीपी माडल के तहत सीएनजी शवदाह गृह बनाया जाएगा। पशु पालक की इच्छा पर एजेंसी शव की अस्थियां सुरक्षित रखेगी। टेंडर जारी कर दिया गया है।

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    डॉ. अनुज कुमार, उप मुख्य पशु चिकित्सा एवं कल्याण अधिकारी।