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    गाजियाबाद के सरकारी अस्पतालों में मरीजों की रिकॉर्ड भीड़, स्वास्थ्य सेवाओं पर दबाव

    Updated: Mon, 06 Apr 2026 08:25 PM (GMT+05:30)

    गाजियाबाद के सरकारी अस्पतालों में 11 महीनों में 43 लाख से अधिक मरीज पहुंचे, जो पिछले साल से 3.46 लाख ज्यादा हैं। 50 लाख आबादी वाले जिले में मरीजों की ...और पढ़ें

    गाजियाबाद के सरकारी अस्पतालों में 11 महीनों में 43 लाख से अधिक मरीज पहुंचे। फाइल फोटो

    गाजियाबाद के सरकारी अस्पतालों में 11 महीनों में 43 लाख से अधिक मरीज पहुंचे। फाइल फोटो

    जागरण संवाददाता, गाजियाबाद। 50 लाख की आबादी वाले जिले में संचालित सरकारी अस्पतालों में मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट से पता चला है कि पिछले 11 महीने में सरकारी अस्पतालों में 43, 96077 मरीज पहुंचे जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में 40, 49,764 मरीज ही पहुंचे थे। यानि इस साल 3,46,313 मरीज अधिक पहुंचे।

    यह स्थिति तब है जबकि अभी तक सरकारी अस्पतालों में एमआरआइ की सुविधा नहीं है। कैंसर रोगियों के इलाज के लिए कोई इंतजाम नहीं है।

    शासन के निर्देश पर डे केयर सेंटर बनाने की तैयारी चल रही है। जिले में पिछले एक साल से दिल का डाक्टर नहीं है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से लेकर जिला अस्पताल तक में फिजिशियन ही मरीजों की ईसीजी रिपोर्ट देखकर दवाएं दे रहे हैं।न्यूरोलाजिस्ट नहीं है।

    आइसीयू है लेकिन संसाधन कमजोर हैं। जिला महिला अस्पताल में आइसीयू न होने से गंभीर हालत होने पर गर्भवती महिलाओं को हायर सेंटर रेफर कर दिया जाता है। रिपोर्ट में यह भी पता चला है कि मरीजों की बढ़ती संख्या के चलते एक चिकित्सक औसतन ओपीडी में रोज 79.3 मरीज देख रहा है।

    जिले में वर्तमान में 232 चिकित्सक तैनात हैं ।खास बात यह है कि सबसे अधिक मरीजों की भीड़ 70 साल पुराने जिला एमएमजी अस्पताल में लगती है। यहां पर प्रतिदिन 3000 से अधिक मरीज पहुंचते हैं। दूसरे नंबर पर संजयनगर स्थित संयुक्त अस्पताल में रोज 1000 से अधिक मरीज पहुंचते हैं।

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    डूंडाहेड़ा में संचालित 50 बेडेड जिला संयुक्त अस्पताल में मरीजों की संख्या 500 के आसपास है। जिला महिला अस्पताल में भी रोज 500 से अधिक महिला मरीज पहुंच रहीं है।

    इसके अलावा छह सामुदायिक स्वास्थ्य केदों पर भी प्रतिदिन 300 से लेकर 500 मरीज पहुंच रहे हैं। लोनी स्थित संयुक्त अस्पताल में 500 से 1000 के बीच मरीज पहुंच रहे हैं। खास बात यह की कोविड के बाद सेहत को लेकर लोग भी खुद गंभीर हुए हैं। जांच को खुद ही चिकित्सक से अनुरोध करते हैं।

    साहिबाबाद को नहीं मिला जिला अस्पताल

    जिले के साथ प्रदेश की सबसे बड़ी विधानसभा साहिबाबाद में कई साल बाद भी जिला अस्पताल की नींव नहीं रखी गई है। कई बार वसुंधरा में इसके लिये जमीन तक चिन्हित की गई।

    नगरीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के माध्यम से ही स्वास्थ्य सेवाओं को लोगों तक पहुंचाने का प्रयास जारी है। एम्स का सेटलाइट सेंटर भी पाइपलाइन में है। लोगों ने कई बार पुरजोर मांग की लेकिन अस्पताल की नींव नहीं रखी गई है।

    इस दिन का उद्देश्य 

    आम जनता को सेहत के प्रति जागरूक बनाना,हेल्थ केयर से जुड़ी समस्याओं पर पब्लिक डायलाग शुरू करना,सरकारों को स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लिए प्रेरित करना,नई जनरेशन को 'हेल्दी लाइफस्टाइल' के लिए मोटिवेट करना।

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