गाजियाबाद की हाईराइज सोसायटियों में सुरक्षा के दावे खोखले, लाखों की मेंटेनेंस के बावजूद बाहरी लोगों की एंट्री आसान
गाजियाबाद की हाईराइज सोसायटियों में 24 घंटे सुरक्षा के दावे खोखले साबित हो रहे हैं, जहां बिना जांच के वाहनों और लोगों की एंट्री से निवासियों की चिंता ...और पढ़ें
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गाजियाबाद शहर का दृश्य।
HighLights
गाजियाबाद की सोसायटियों में सुरक्षा दावों की खुली पोल।
बिना जांच वाहनों, लोगों की एंट्री से निवासी असुरक्षित।
गौर सिद्धार्थम घटना के बाद निवासियों का जोरदार प्रदर्शन।
जागरण संवाददाता, गाजियाबाद। शहर की हाईराइज सोसायटियों में 24 घंटे सुरक्षा के दावों पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। हर महीने लाखों रुपये मेंटेनेंस शुल्क वसूलने के बावजूद कई सोसायटियों में हालात ऐसे हैं कि बाहरी लोग पैदल ही नहीं, बल्कि कारों से भी बिना प्रभावी जांच और सत्यापन के परिसर में प्रवेश कर जा रहे हैं।
मुख्य गेटों पर पर्याप्त सुरक्षा गार्ड नहीं हैं, कई स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लंबे समय से खराब पड़े हैं और विजिटर एंट्री व सत्यापन व्यवस्था महज औपचारिकता बनकर रह गई है। इसका नतीजा यह है कि बाहरी लोगों की आवाजाही आसान हो गई है और निवासी खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।
बिना रोक-टोक वाहनों की एंट्री से बढ़ी चिंता
हाल के दिनों में सामने आई घटनाओं ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सिद्धार्थ विहार स्थित गौर सिद्धार्थम सोसायटी में 29 जुलाई की देर शाम एक बाहरी युवक परिसर में पहुंच गया। आरोप है कि उसने टहल रही महिला के साथ अभद्र टिप्पणी की और विरोध करने पर अशोभनीय हरकतें कीं।
महिलाओं के शोर मचाने पर आसपास मौजूद लोगों ने युवक को पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया। घटना के विरोध में शनिवार को बड़ी संख्या में निवासियों ने मुख्य गेट पर धरना देकर रखरखाव प्रबंधन और सुरक्षा एजेंसी के खिलाफ प्रदर्शन किया।
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प्रदर्शनकारियों का कहना था कि यदि गेट पर पहचान सत्यापन, वाहन जांच और निगरानी व्यवस्था प्रभावी होती तो बाहरी व्यक्ति परिसर तक नहीं पहुंच पाता। निवासियों का कहना है कि अधिकांश सोसायटियों में सुरक्षा व्यवस्था कागजों पर मजबूत दिखाई जाती है, लेकिन जमीनी स्तर पर कई खामियां बनी हुई हैं। ऐसे में महिलाओं, बच्चों और वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है।
अधिकांश हाईराइज सोसायटियों में दुपहिया वाहनों एवं पैदल आने वालों की एंट्री पर प्रभावी निगरानी नहीं होती। इसी का फायदा उठाकर बाहरी लोग बिना जानकारी के अंदर पहुंच जाते हैं। हर महीने बाइक चोरी, बंद फ्लैटों में चोरी और निवासियों से बदसलूकी जैसी घटनाएं सामने आती रहती हैं।
- दीपांशु मित्तल, निवासी, ब्रेव हार्ट्स सोसायटी
कई सोसायटियों में न तो सभी सीसीटीवी कैमरे चालू हैं और न ही विजिटर व वाहनों का कड़ाई से सत्यापन होता है। सुरक्षा एजेंसियों की नियमित मानिटरिंग और जवाबदेही तय किए बिना ऐसी घटनाओं पर रोक लगाना मुश्किल होगा।
- कपिल गोयल, निवासी, वीवीआइपी एड्रेसस