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    नो ट्रिपिंग जोन गाजियाबाद में बिजली कटौती से बढ़ी परेशानी, सोसायटियों में तीन गुना महंगा बिल चुका रहे लोग

    Updated: Wed, 29 Jul 2026 08:38 PM (IST)

    गाजियाबाद को यूपीपीसीएल ने नो ट्रिपिंग जोन घोषित किया है, फिर भी रोजाना 4-6 घंटे बिजली कटौती हो रही है। ...और पढ़ें

    टीला मोड में फाल्ट ठीक करते कर्मी। सौ. सुधी पाठक

    टीला मोड में फाल्ट ठीक करते कर्मी। सौ. सुधी पाठक

    HighLights

    1. गाजियाबाद नो ट्रिपिंग जोन होने के बावजूद कटौती जारी।

    2. जेनरेटर से आपूर्ति पर तीन गुना अधिक खर्च उठा रहे लोग।

    3. बिजली खपत घटने पर भी आपूर्ति में सुधार नहीं हुआ।

    जागरण संवाददाता, साहिबाबाद। उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन लिमिटेड (यूपीपीसीएल) ने गाजियाबाद के शहरी क्षेत्र को नो ट्रिपिंग जोन में रखा है। यानी बिना ट्रिपिंग के 24 घंटे आपूर्ति होनी चाहिए।

    इसके बाद भी रोजाना चार से छह घंटे तक बिजली कटौती हो रही है। जबकि जून के मुकाबले जुलाई के अंतिम सप्ताह में बिजली की खपत में करीब 400 मेगावाट की गिरावट आई है।

    बिजली कटौती होने पर शहर की कॉलोनियों के लोगों को बिजली आपूर्ति के लिए वैकल्पिक व्यवस्था नहीं रहती। लोगों को बिना बिजली के ही रहना पड़ता है, लेकिन सोसायटियों में बिजली आपूर्ति के लिए जेनरेटर का विकल्प रहता है।

    बिजली कटौती होने पर जेनरेटर सेट चालू कर दिया जाता है। इससे लोगों को बिजली तो मिल जाती है, लेकिन आर्थिक भार कई गुना तक बढ़ जाता है। लोगों को सामान्य बिजली की तुलना में तीन गुना तक बिजली बिल चुकाना पड़ता है।

    सामान्य बिजली का शुल्क सात रुपये प्रति यूनिट देना होता है, जबकि जेनरेटर से आपूर्ति होने पर किसी सोसायटी में 17 रुपये तो किसी में 28 से 30 रुपये तक वसूले जा रहा है। एओए पदाधिकारियों का कहना है कि जेनरेटर से आपूर्ति होने पर खर्चा बढ़ जाता है।

    इन क्षेत्रों में सबसे अधिक बिजली कटौती

    भोपुरा, टीला मोड, मोहननगर आदि की सोसायटी के लोगों को सबसे अधिक बिजली कटौती झेलनी पड़ रही है। आक्सी होम सोसायटी के राकेश कुमार ने बताया कि बिजली पर चार से पांच हजार रुपये हर माह खर्च होते थे।

    अब 12 से 13 हजार रुपये हर माह खर्च हो रहे हैं। दिल्ली-99 के अमित प्रकाश ने बताया कि चार से पांच घंटे तक बिजली कट रही है। कई बार दिनभर भी बिजली गायब रहती है। जबकि अधिकारी 24 घंटे आपूर्ति का दावा करते हैं।

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    1800 से 1900 मेगावाट हो रही बिजली की खपत

    जून में बिजली की खपत 2200 मेगावाट तक पहुंच गई थी। अब बिजली की खपत 1800 से 1900 मेगावाट रह गई है। इतनी गिरावट के बाद भी अभी तक आपूर्ति में सुधार देखने को नहीं मिल रहा है। अधिकारी लगातार कार्य कराने के दावे करते हैं। इस पर करोड़ों का बजट खर्च भी किया जाता है। इसके बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है।

    बुधवार को भी विभिन्न इलाकों में गुल रही बिजली

    बुधवार को भी ट्रांस हिंडन के विभिन्न इलाकों में बिजली गुल रही। टीला मोड में 33केवी लाइन में फाल्ट होने के कारण कृष्ण विहार कुटी, पंचशील और डिफेंस कॉलोनी की बत्ती गुल रही। करीब पांच घंटे बाद बिजली आपूर्ति सामान्य हो सकी। इसके अलावा राजेंद्र नगर और श्याम पार्क में भी चार घंटे बिजली गुल रही।

    रोस्टर के अनुसार ही बिजली आपूर्ति की जा रही है। कुछ इलाकों में ओवरलोडिंग के कारण समस्या बनी हुई है। इस कारण छोटे-छोटे फाल्ट से आपूर्ति प्रभावित होती है। सुधार के लिए 70 करोड़ से विभिन्न कार्य किए जा रहे हैं।
    -बृजेश कुमार, मुख्य अभियंता, विद्युत निगम जोन-तीन।

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