गाजियाबाद में कोड के चक्कर में फंसी कमर्शियल वाहनों की फिटनेस, VLTD लगने के बाद भी पोर्टल पर नहीं हो रहे अपडेट
गाजियाबाद में 1 अप्रैल 2019 से पहले पंजीकृत व्यावसायिक वाहनों के फिटनेस, परमिट और ट्रांसफर के काम व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस (वीएलटीडी) के कोड न मिलने से अटके हुए हैं।

डीलरों के साथ बैठक करते एआरटीओ प्रशासन अशोक कुमार श्रीवास्तव। जागरण
HighLights
वीएलटीडी कोड न मिलने से वाहन कार्य बाधित
व्यावसायिक वाहनों के फिटनेस, परमिट, ट्रांसफर रुके
एआरटीओ ने शासन से कोड आवंटन का आश्वासन दिया
जागरण संवाददाता, गाजियाबाद। एक अप्रैल 2019 से पहले पंजीकृत व्यावसायिक वाहनों में व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस (वीएलटीडी) लगने के बाद भी फिटनेस, परमिट नवीनीकरण और ट्रांसफर के काम अटक रहे हैं।
बुधवार को एआरटीओ प्रशासन अशोक कुमार श्रीवास्तव ने डीलरों और वीएलटीडी लगाने वाली कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर समस्या जानी, जहां विक्रेताओं ने साफ कहा कि उन्हें अभी तक कोड आवंटित नहीं हुए हैं, इसी कारण पोर्टल पर डिवाइस मान्य नहीं दिख रही।
पोर्टल पर दर्ज करने के लिए नहीं है कोड
विक्रेताओं ने बताया कि वे वाहनों में नियमानुसार वीएलटीडी और पैनिक बटन फिट कर रहे हैं, लेकिन डिवाइस का यूनिक आईडी राज्य के ट्रैकिंग सिस्टम और पोर्टल पर दर्ज करने के लिए जरूरी कोड उनके पास उपलब्ध नहीं है। बिना इस कोड के, सिस्टम डिवाइस को स्थापित एवं सक्रिय नहीं मानता, जिससे आरटीओ की ऑनलाइन प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही है।
एक अप्रैल से पहले फिट हो चुके हैं डिवाइस
विक्रेताओं ने कहा कि 1 अप्रैल 2019 से पहले के वाहनों में बड़ी संख्या में डिवाइस फिट हो चुके हैं, पर कोड न होने से वे सिस्टम में पंजीकृत नहीं हो पा रहे। परिणामस्वरूप वाहन स्वामियों के फिटनेस, परमिट और ट्रांसफर के कार्य लंबित हैं और वे रोजाना आरटीओ के चक्कर लगा रहे हैं।
एआरटीओ प्रशासन अशोक कुमार श्रीवास्तव ने आश्वासन दिया कि इस संबंध में शासन स्तर पर वार्ता कर वेंडरों को शीघ्र कोड अलाट कराने की अपील की गई है। कोड मिलते ही डिवाइस आइडी वाहन नंबर से मैप होंगे और पोर्टल पर स्टेटस अपडेट होते ही लंबित कार्यवाही शुरू कर दी जाएगी।
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