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    17 साल पहले साहिबाबाद से चुराई गई हथिनी वाया जम्मू कश्मीर पहुंच गई गुजरात, महावत ने लगाई कोर्ट में गुहार

    Updated: Wed, 13 May 2026 10:10 PM (IST)

    साहिबाबाद से 17 साल पहले चोरी हुई हथिनी 'गोयनी' अब गुजरात के एक पशु पार्क में मिली है। पीड़ित गयूर अली ने हथिनी की सुपुर्दगी के लिए कोर्ट में अर्जी दी ...और पढ़ें

    असालतपुर गांव से 17 साल पहले चोरी हुई हथिनी गोयनी गुजरात के पशु पार्क में है। एआई इमेज

    असालतपुर गांव से 17 साल पहले चोरी हुई हथिनी गोयनी गुजरात के पशु पार्क में है। एआई इमेज 

    HighLights

    1. 17 साल पहले साहिबाबाद से हथिनी गोयनी चोरी हुई।

    2. चोरी हुई हथिनी अब गुजरात के पशु पार्क में मिली।

    3. मालिक ने हथिनी की सुपुर्दगी के लिए कोर्ट में अर्जी दी।

    जागरण संवाददाता, साहिबाबाद। टीला मोड़ थाना क्षेत्र के असालतपुर गांव से 17 साल पहले चोरी हुई हथिनी गोयनी गुजरात के पशु पार्क में है। हथिनी चोरी के मामले में लक्ष्मण और लक्की के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई थी। पीड़ित ने हथिनी को सुपुर्दगी में लेने के लिए कोर्ट में अर्जी लगाई है। उधर, पुलिस ने मामले में अंतिम रिपोर्ट (एफआर) लगा दी है। 17 साल से हथिनी न मिलने से पीड़ित परेशान है।

    असालतपुर निवासी गयूर अली ने वर्ष 2000 में बिहार सोनपुर हाथीसार के मेले से ढाई लाख रुपये में एक हथिनी खरीदी थी। चोरों ने एक जनवरी 2008 को उसे चोरी कर लिया। उन्होंने पुलिस से शिकायत कर हथिनी को बरामद कराने की मांग की। पुलिस से मदद न मिलने पर उन्होंने स्वयं हथिनी को खोजना शुरू किया। सोशल मीडिया के माध्यम से उन्होंने हथिनी को खोज लिया। हथिनी जम्मू-कश्मीर में मिली थी।

    छह अक्टूबर 2022 को उन्होंने कोर्ट में न्याय की गुहार लगाई। एक बार अर्जी खारिज होने के बाद दूसरी बार प्रयास किया। तब कहीं 27 सितंबर 2022 को जम्मू-कश्मीर नरवाल मंडी निवासी लक्ष्मण और लक्की के खिलाफ हथिनी चोरी की रिपोर्ट दर्ज हो सकी। गयूर के अधिवक्ता दिलशाद चौधरी ने बताया कि जांच के दौरान हथिनी के गुजरात स्थित पशु पार्क में होने की जानकारी मिली।

    उसे सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर वहां भेजा गया था। उन्होंने बताया कि मामले के रिवीजन की याचिका लगाई गई है। सुप्रीम कोर्ट का आदेश होने के कारण याचिका को सेशन कोर्ट में लगाया गया है। एसीपी शालीमार गार्डन अतुल कुमार सिंह ने बताया कि पुलिस की ओर से मामले में एफआर लगाई जा चुकी है।

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