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    यूपी में हरिहर शरण हत्याकांड के 49 साल बाद SC ने पलटा फैसला, रद की आरोपितों के उम्रकैद की सजा

    Updated: Thu, 16 Jul 2026 10:55 PM (IST)

    सुप्रीम कोर्ट ने गोंडा के 1977 के हरिहर शरण हत्याकांड में 49 साल बाद ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने जांच में विसंगतियों के चलते बचे हुए तीनों जीवि ...और पढ़ें

    हरिहर शरण हत्याकांड में सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला।

    हरिहर शरण हत्याकांड में सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला।

    HighLights

    1. सुप्रीम कोर्ट ने 49 साल बाद सुनाया ऐतिहासिक फैसला।

    2. हरिहर शरण हत्याकांड के तीन जीवित आरोपित बरी।

    3. जांच में गंभीर विसंगतियों के कारण फैसला पलटा।

    संवाद सूत्र, कर्नलगंज (गोंडा)। बसेरिया गांव में 1977 में हुए बहुचर्चित हरिहर शरण हत्याकांड में सुप्रीम कोर्ट ने लगभग 49 वर्ष के बाद एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने इस मामले में बचे तीनों जीवित आरोपितों को बरी कर दिया है। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने मामले की जांच में पाई गई गंभीर विसंगतियों के आधार पर ट्रायल कोर्ट और इलाहाबाद हाईकोर्ट के पूर्व के फैसलों को पलट दिया।

    न्यायालय ने स्पष्ट किया कि अभियोजन पक्ष आरोपितों के खिलाफ दोष साबित करने में पूरी तरह नाकाम रहा है। इस हत्याकांड में छह आरोपित थे, जिनमें से दो की मौत फैसले से पहले हो चुकी थी और एक अन्य की मौत हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान हुई।

    बचे तीन आरोपितों सूबेदार, हीरा लाल और राज बक्स की अपील को स्वीकार करते हुए कोर्ट ने उनकी सजा रद कर दी। सुप्रीम कोर्ट ने अपने निर्णय में पुलिस की कार्यप्रणाली और जांच प्रक्रिया पर गंभीर टिप्पणी की है।

    घटना 27/28 जून 1977 की है। कर्नलगंज के बसेरिया गांव में चुनावी रंजिश को लेकर हरिहरशरण की हत्या कर दी गई लेकिन, एफआइआर की सूचना 30 जून को मजिस्ट्रेट के पास पहुंची।

    अदालत के अनुसार बिना किसी ठोस कारण के हुई इस 48 घंटे की देरी से संकेत मिलता है कि गवाहों को घटनास्थल पर दिखाने के लिए कहानी बाद में गढ़ी गई।

    वारदात के बाद मृतक का शव पूरी रात घटनास्थल पर लावारिस पड़ा रहा और पुलिस या परिवारीजन द्वारा शव को सुरक्षित रखने का कोई प्रयास नहीं किया गया। इस ऐतिहासिक फैसले के बाद बरी हुए सूबेदार, हीरा लाल और राज बक्स के घरों पर बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है।

    आंखों में खुशी के आंसू

    बसेरिया के सूबेदार के आंखों से खुशी के आंसू झलक रहे थे। बताया कि आठ माह जेल में रहे। उनके चचेरे भाई हीरालाल 14 साल व राजबक्श ने ढाई साल जेल में बिताई। सूबेदार बताते हैं कि चार बीघा खेत उनका बिक गया। लड़कों की पढ़ाई पूरी नहीं हो सकी। बिटिया की शादी में भी वह नहीं आ सके। इसमें गांव के पठान बिरादरी के लोगों ने मदद की। चुनावी रंजिश में उन लोगों को फंसाया गया था। उन्हें इंसाफ मिलने में 49 वर्ष लग गए।

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