RO/ARO परीक्षा में गोंडा के युवाओं का जलवा, समीक्षा अधिकारी बनकर लहराया परचम
उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) ने समीक्षा अधिकारी (आरओ) और सहायक समीक्षा अधिकारी (एआरओ) परीक्षा के परिणाम घोषित कर दिए हैं। ...और पढ़ें
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दीपक मिश्रा और अंकितेश शुक्ल।

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जागरण टीम, गोंडा। उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) ने समीक्षा अधिकारी (आरओ) और सहायकर समीक्षा अधिकारी (एआरओ) पद के लिए हुई परीक्षा का परिणाम घोषित कर दिया है। जिले अंकितेश शुक्ल,ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह और दीपक कुमार मिश्र का चयन समीक्षा अधिकारी पद पर हुआ है।
विकास खंड बेलसर के धनई पट्टी के रहने वाले उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षा मित्र संघ के प्रदेश अध्यक्ष शिव कुमार शुक्ल के बेटे अंकितेश शुक्ल का चयन समीक्षा अधिकारी के पद पर हुआ है।
उन्होंने हाई स्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षा श्री शास्त्री शिक्षण संस्थान इंटर कालेज मधईपुर से की थी। वर्तमान में वह लखनऊ में रह कर तैयारी कर रहे थे। शिवकुमार शुक्ल ने बताया के बेटे ने पहले प्रयास में परीक्षा कर मान बढ़ाया है।
माता विमला देवी, प्राथमिक शिक्षा मित्र संघ के जिलाध्यक्ष अवधेश मणि मिश्र, शिवमूर्ति पांडेय सहित अन्य हर्ष व्यक्त कर बधाई दी।
इटियाथोक के भटपी पंचायत के तुर्क पुरवा ने दीपक कुमार मिश्रा ने यूपीपीएससी परीक्षा पास कर क्षेत्र का मान बढ़ाया है। उनका चयन समीक्षा अधिकारी पद पर हुआ है। दीपक ने बताया कि उनके पिता भानु प्रकाश मिश्र किसान है।
उन्होंने कक्षा आठ तक की पढ़ाई परिषदीय विद्यालय में की उसके बाद हाई स्कूल की परीक्षा एक प्राइवेट विद्यालय में किया।दीपक ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक किया। वहीं से डीएलएड पास करके शिक्षक बन गए। वर्तमान में वह बिहार में तैनात हैं।
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बताया कि उनके दादा एक प्रावेट विद्यालय में पढ़ाते हैं। उन्हीं से उनको प्रेरणा मिली। उनका आइएएस बनने का सपना है। कृष्ण गोपाल मिश्र सहित तमाम लोगों ने शुभकामना दी है।
नवाबगंज के रामापुर भगाही गांव के किसान रघुनंदन सिंह के बेटे ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह का चयन समीक्षा अधिकारी के पद पर हुआ है। सोमवार की सुबह जैसे ही परिणाम की जानकारी मिली सब में खुशी की लहर दौड़ गई। मिठाई बांटी गई और पटाखे फोड़कर जश्न मनाया गया। ज्ञानेंद्र की सफलता संघर्ष और निरंतर प्रयास का परिणाम है। वर्ष 2016 में उनका चयन लेखपाल पद पर हुआ था।
इसके बाद वर्ष 2020 में तरबगंज के कंपोजिट विद्यालय परासपट्टी मझवार में सहायक अध्यापक बने और वर्तमान में वहीं कार्यरत हैं। वर्ष 2022 में उनका चयन उद्यान अधिकारी पद पर भी हुआ लेकिन, उन्होंने उसे कार्यभार नहीं ग्रहण किया और अपनी तैयारी जारी रखी। ज्ञानेंद्र ने अपनी सफलता का श्रेय अपने किसान पिता रघुनंदन सिंह और गृहिणी माता गायत्री सिंह के त्याग, मेहनत और आशीर्वाद को दिया।