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    गोरखपुर AIIMS में मिली बॉम्बे रक्तसमूह की रोगी, इलाज के लिए भर्ती हुई थी महिला

    Updated: Wed, 11 Mar 2026 12:12 PM (IST)

    गोरखपुर एम्स में इलाज के लिए भर्ती 40 वर्षीय महिला में अत्यंत दुर्लभ बॉम्बे रक्त समूह पाया गया है। यह एम्स गोरखपुर में ऐसा पहला मामला है। ...और पढ़ें

    गोरखपुर एम्स। जागरण

    गोरखपुर एम्स। जागरण

    HighLights

    1. गोरखपुर एम्स में 40 वर्षीय महिला में बॉम्बे रक्त समूह मिला।

    2. यह अत्यंत दुर्लभ रक्त समूह 10,000 में से एक में होता है।

    3. एम्स गोरखपुर में यह पहला बॉम्बे रक्त समूह मामला है।

    जागरण संवाददाता, गोरखपुर। एम्स गोरखपुर में उपचार कराने के लिए भर्ती हुई 40 वर्ष की महिला का रक्त समूह बॉम्बे वाला मिला है। बॉम्बे रक्त समूह बहुत दुर्लभ होता है। 10 हजार में से किसी में यह रक्त समूह मिलता है। एम्स गोरखपुर में पहली बार यह मिला है।

    ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग के प्रभारी डॉ. सौरभ मूर्ति ने बताया कि भारतीय जनसंख्या में बॉम्बे रक्त समूह वाले मामले 10 हजार में से किसी एक में मिलते हैं। इसका मिलना अत्यंत दुर्लभ और चिकित्सकीय रूप से महत्वपूर्ण हो जाता है। इस रक्त समूह वाले व्यक्तियों में एच एंटीजन अनुपस्थित होता है। इस कारण यह सिर्फ बॉम्बे फीनोटाइप वाले दाताओं से ही सुरक्षित रूप से रक्त प्राप्त कर सकते हैं।

    इन्होंने की इम्यूनोहेमेटोलाजिकल जांच
    सीनियर रेजिडेंट डॉ. मोनिषा, डॉ. निरंजन, जूनियर रेजिडेंट डॉ. पार्शा

    एंटीबाडीज की कर चुके हैं पहचान
    डॉ. सौरभ मूर्ति ने बताया कि एम्स गोरखपुर के ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग की इम्यूनोहेमेटोलाजी प्रयोगशाला में दुर्लभ एंटीसीरा और उन्नत परीक्षणों के लिए आवश्यक अभिकर्मकों की उपलब्धता है। इनकी सहायता से एंटीबाडी स्क्रीनिंग व आइडेंटिफिकेशन, एल्यूशन, एडसार्प्शन जैसे जटिल परीक्षण नियमित रूप से किए जाते हैं। विभाग इससे पहले भी विभिन्न मरीजों में एंटी एम, एंटी डी, एंटी सी जैसी एंटीबाडीज की पहचान कर चुका है।

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    ऐसे पड़ा बॉम्बे रक्त समूह नाम
    वर्ष 1952 में मुंबई (तत्कालीन बाम्बे) में डॉ. वाईएम भेंडे ने इस रक्त समूह की खोज की थी। यह अत्यंत दुर्लभ रक्त समूह सबसे पहले बॉम्बे के ही कुछ व्यक्तियों में पाया गया था। यह सामान्य ओ ग्रुप से अलग है क्योंकि इसमें एच एंटीजन अनुपस्थित होता है। इस रक्त समूह को एचएच या ओएच फेनोटाइप भी कहा जाता है। यह मुख्य रूप से भारतीय उपमहाद्वीप में पाया जाता है। इसके दुर्लभ होने के कारण, इस समूह वाले व्यक्तियों को ही इस समूह का रक्त दिया जा सकता है।

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    ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग का यह कार्य प्रशंसनीय है। एम्स गोरखपुर पूर्वांचल की जनता को अत्याधुनिक निदान एवं रक्त आधान सेवाएं प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। यह उपलब्धि हमारे उत्कृष्टता, सुरक्षा और रोगी‑केंद्रित देखभाल के संकल्प को दर्शाती है।-डॉ. विभा दत्ता, कार्यकारी निदेशक, एम्स