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Antibiotics Awareness: बच्चों को बुखार आए तो अपने मन से एंटीबायोटिक न दें, दिक्कतें बढ़ेंगी

Published: Mon, 16 Feb 2026 10:21 AM (IST)

बदलते मौसम में बच्चों को सर्दी, खांसी, जुकाम या बुखार होने पर बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक न दें। ...और पढ़ें

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HighLights

  1. बच्चों को वायरल बुखार में एंटीबायोटिक न दें।

  2. अनावश्यक एंटीबायोटिक से एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस बढ़ता है।

  3. मौसमी बीमारियों में डॉक्टर से सलाह लेना आवश्यक है।

जागरण संवाददाता, गोरखपुर। बदलते मौसम में यदि बच्चों को सर्दी, खांसी, जुकाम बुखार हो तो अपने मन से एंटीबायोटिक न दें। क्योंकि इस समय वायरल संक्रमण होता है, इसमें एंटीबायोटिक काम नहीं करती। यह दवा केवल बैक्टीरियल संक्रमण में काम करती है। इस दवा के अनावश्यक उपयोग एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (एएमआर) विकसित होगा, इसकी वजह से जब जरूरत पड़ेगी तो सामान्य एंटीबायोटिक काम नहीं करेगी।

यह बातें टीबी अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक व वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डा. एके वर्मा ने कही। वह दैनिक जागरण के लोकप्रिय कार्यक्रम (हेलो डाक्टर) में रविवार को जनता को दूरभाष पर परामर्श दे रहे थे। उन्होंने कहा कि दिन में गर्मी और सुबह-शाम ठंड के कारण सर्दी, खांसी, जुकाम, वायरल बुखार और गले के संक्रमण के मामले बढ़ रहे हैं। इस समय बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता अपेक्षाकृत कमजोर होती है, इसलिए विशेष सावधानी जरूरी है।

बच्चों को सुबह-शाम हल्के गर्म कपड़े पहनाएं और पसीना आने पर तुरंत कपड़े न बदलें। बाहर से आने पर हाथ-पैर साबुन से धुलवाएं और साफ पानी ही पिलाएं। ठंडी चीजें, आइसक्रीम व खुले में बिकने वाले खाद्य पदार्थों से परहेज कराएं।

घर का ताजा और संतुलित भोजन दें, जिसमें हरी सब्जियां, दाल, फल शामिल हो। बुखार या संक्रमण के लक्षण दिखने पर स्वयं दवा न दें, बल्कि चिकित्सक से परामर्श लें। समय पर इलाज और सावधानी बरतकर बच्चों को मौसमी बीमारियों से सुरक्षित रखा जा सकता है। प्रस्तुत हैं डा. एके वर्मा द्वारा जनता को दिए गए परामर्श।

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सवाल- छह साल की बेटी है, वह सेरेब्रल पाल्सी की शिकार है। उसके लिए फिजियोथेरेपी चल रही है लेकिन इस समय उसे कब्ज हो गया है। -कामना श्रीवास्तव, शाहपुर
जवाब- फाइबरयुक्त चीजें उसे खाने के लिए दें। सलाद, हरी सब्जियां, फल खिलाएं। पर्याप्त पानी पिलाएं।
सवाल- 10 सप्ताह की बच्ची है, जब हवा खुलती है तो तेज दुर्गंध आती है।
-जागृति सिंह, खजनी
जवाब- यह सामान्य लक्षण है। अपने आप ठीक हो जाएगा। यदि दूध पी रही है और सक्रिय है तो घबराने की जरूरत नहीं है।
सवाल- बच्चों को मोटापा से कैसे बचाया जाए?
-राजकुमार यादव एडवोकेट, तुर्कमानपुर
जवाब- उन्हें फास्ट फूड खिलानना बंद करें। मोबाइल न दें ताकि उन्हें खेलने-कूदने का मौका मिले।
सवाल- नौ साल की बच्ची है। उसे बुखार व खांसी है।
-दीपक सिंह, खजनी
जवाब- पैरासिटामाल दे दीजिए। नमक-पानी से गरारा कराइए। पीने को भी गरम पानी ही दीजिए।
सवाल- आठ साल का बच्चा है, पढ़ने में ठीक है लेकिन पढ़ना नहीं चाहता।
-शिव शंकर त्रिपाठी, पीपीगंज
जवाब- कोई बच्चा पढ़ना नहीं चाहता, उसे पढ़ाना पड़ता है। उस पर ध्यान देना होगा, समझाना होगा कि पढ़ना जरूरी है।
सवाल- 10 साल का बच्चा है। 10 दिन से उसके सीने में जकड़न व खांसी है।
-सुलेमान, मियां बाजार
जवाब- गरम पानी पिलाएं, भाप दें। आराम न मिले तो टीबी अस्पताल में आकर दिखा लें।
सवाल- 12.5 साल की बच्ची है, उसकी लंबाई नहीं बढ़ रही है।
-मतिराम गुप्ता, राजनगर कालोनी
जवाब- लंबाई बढ़ाने की कोई दवा नहीं है। उसे बैटमिंटन खेलने के लिए प्रेरित करें। लंबाई 18-19 साल तक बढ़ती है, इसलिए घबराएं नहीं।
सवाल- एक सप्ताह का बच्चा है, दूध नहीं पी रहा है। पेशाब भी नहीं कर रहा है।
-मनीष, गीताप्रेस रोड
जवाब- लक्षण ठीक नहीं हैं। क्योंकि बच्चे का 24 घंटे में छह बार पेशाब करना जरूरी है। उसे बाल रोग विशेषज्ञ को दिखा दीजिए। यदि संभव हो तो टीबी अस्पताल लेकर आ जाइए। जांच के बाद दवा दे दी जाएगी।
सवाल- सात साल का बेटा है, उसे चक्कर आ रहा है और पेट में सूजन भी दिख रही है।
-अभिमन्यु गुप्ता, सूबा बाजार
जवाब- टीबी अस्पताल में लाकर दिखा दीजिए।
सवाल- पांच साल की बच्ची है। उसके स्कूल से बार-बार शिकायत आ रही है कि अपनी सीट पर बैठती नहीं है, पढाई के दौरान उसका ध्यान इधर-उधर जाता है। किसी डाक्टर को दिखा दीजिए। -रुपाली त्रिपाठी, पीपीगंज
जवाब- टीबी अपताल में उसे दिखा दीजिए।
सवाल- छह साल का बेटा है, वह भोजन नहीं करना चाहता, जबरदस्ती खिलाना पड़ता है। -बीना अग्रवाल, रायगंज
जवाब- बच्चों को जबरदस्ती ही खिलाना पड़ता है। उसकी पसंद का भोजन बनाइए और कीड़ी की दवा खिला दीजिए।

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