Antibiotics Awareness: मनमाने ढंग से एंटीबायोटिक लेने पर साधारण संक्रमण भी हो सकता है लाइलाज, गोरखपुर में चला जागरूकता कार्यक्रम
गोरखपुर में एंटीबायोटिक दवाओं के मनमाने उपयोग से बढ़ते एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (एएमआर) पर चिंता व्यक्त की गई। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्याल ...और पढ़ें
-1770976387814_m.webp)
गोवि में जागरण जगरुकता अभियान एंटीबायोटिक लापरवाही नहीं चलेगी विषय पर बोलते डा.एके त्रिपाठी। जागरण
HighLights
एंटीबायोटिक के मनमाने उपयोग से एएमआर का खतरा।
गोरखपुर विश्वविद्यालय में छात्रों ने लिया जिम्मेदार उपयोग का संकल्प।
बिना डॉक्टरी सलाह के दवा न लेने की अपील।
जागरण संवाददाता, गोरखपुर। बिना चिकित्सकीय परामर्श के एंटीबायोटिक दवाओं का सेवन भविष्य में गंभीर स्वास्थ्य संकट खड़ा कर सकता है। अनियंत्रित और अनावश्यक उपयोग से ऐसी स्थिति पैदा हो रही है कि सामान्य संक्रमण पर भी सामान्य एंटीबायोटिक दवाएं असर नहीं कर पा रही हैं। इसे एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (एएमआर) कहा जाता है, जो तेजी से उभरती वैश्विक चुनौती बन चुकी है।
दैनिक जागरण के एएमआर के खिलाफ चल रहे जनजागरूकता अभियान के अंतर्गत गुरुवार को दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के इंस्टीट्यूट आफ फार्मेसी में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों ने यह संकल्प लिया कि वे बिना डाक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक दवाओं का सेवन नहीं करेंगे और दूसरों को भी इसके प्रति जागरूक करेंगे।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वरिष्ठ फिजिशियन डा. एके त्रिपाठी ने कहा कि एंटीबायोटिक दवाएं केवल बैक्टीरिया जनित संक्रमण में प्रभावी होती हैं, लेकिन लोग सर्दी-खांसी, वायरल बुखार या हल्के गले के संक्रमण में भी स्वयं दवा ले लेते हैं। यह प्रवृत्ति बेहद खतरनाक है। जब एंटीबायोटिक का अनावश्यक, अनियमित या अधूरा कोर्स लिया जाता है तो शरीर में मौजूद बैक्टीरिया धीरे-धीरे दवा के प्रति प्रतिरोधक क्षमता विकसित कर लेते हैं। परिणामस्वरूप भविष्य में वही दवा असर नहीं करती और साधारण संक्रमण भी जटिल व लाइलाज रूप ले सकता है।

गोवि में जागरण जागरुकता अभियान एंटीबायोटिक लापरवाही नहीं चलेगी विषय पर बोलते डा.एके त्रिपाठी। जागरण
डा. त्रिपाठी ने कहा कि एएमआर के कारण इलाज की अवधि लंबी हो जाती है, अस्पताल में भर्ती होने की नौबत आ सकती है और उपचार का खर्च भी कई गुणा बढ़ जाता है। कई बार महंगी और अधिक शक्तिशाली दवाओं का सहारा लेना पड़ता है, जिनके दुष्प्रभाव भी अधिक होते हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि डाक्टर द्वारा बताई गई दवा का पूरा कोर्स निर्धारित समय तक लें और दवा बीच में बंद न करें।
खबरें और भी
यह भी पढ़ें- गोरखपुर में टमाटर से आम तक... छत पर गमलों में लहलहा रही अनोखी खेती
उन्होंने छात्रों को समझाया कि एंटीबायोटिक का जिम्मेदारी से उपयोग करना समय की आवश्यकता है। इसमें फार्मेसी के विद्यार्थियों की भी अहम भूमिका है, क्योंकि वे भविष्य में दवा वितरण और परामर्श की प्रक्रिया से जुड़े रहेंगे। यदि वे जागरूक रहेंगे तो समाज में सही संदेश पहुंचाया जा सकेगा।
अंत में उपस्थित लोगों ने सामूहिक रूप से संकल्प लिया कि वे स्वयं भी एंटीबायोटिक का दुरुपयोग नहीं करेंगे और परिवार व समाज में इसके दुष्परिणामों के बारे में जागरूकता फैलाएंगे। संचालन राजकिशोर ने किया।
इस अवसर पर डायरेक्टर प्रो. अमित कुमार निगम, डा. सत्यपाल सिंह, डा. सरिता सिंह, भुवनेश प्रताप सिंह, अवधेश मिश्रा, अजय कुमार यादव, बिंदु कुमारी समेत अनेक छात्र-छात्राएं उपस्थित रहीं।