मोबाइल फोन बच्चों को कर रहा सामाजिकता से दूर, खराब हो रही आंखें, मन बेचैन
डिजिटल शिक्षा और बढ़ते स्क्रीन टाइम से बच्चों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है। मोबाइल पर होमवर्क और ऑनलाइन पढ़ाई से आंखों की समस्या, सिरदर्द और चश ...और पढ़ें

मोबाइल के अधिक उपयोग से कम उम्र में ही बच्चों को लगाना पड़ रहा चश्मा। सांकेतिक तस्वीर
HighLights
बढ़ते स्क्रीन टाइम से बच्चों की आंखों को नुकसान।
मोबाइल पर होमवर्क से आंखों की समस्या बढ़ रही है।
डिजिटल दुनिया बच्चों को सामाजिकता से दूर कर रही।
जागरण संवाददाता, गोरखपुर। डिजिटल शिक्षा के बढ़ते चलन के बीच बच्चों का स्क्रीन टाइम तेजी से बढ़ रहा है, जिसका सीधा असर उनके स्वास्थ्य, खासकर आंखों पर पड़ रहा है। चिकित्सकों का कहना है कि मोबाइल फोन पर होमवर्क भेजे जाने और आनलाइन पढ़ाई के कारण कम उम्र के बच्चों में आंखों की समस्या, सिरदर्द और चश्मा लगने की शिकायतें लगातार बढ़ रही हैं। एक घंटे से अधिक का स्क्रीन टाइम आंखों को खराब कर रहा है और मस्तिष्क को विकृत। देर रात तक मोबाइल देखने से वे अनिद्रा, चिड़चिड़ापन, मेनिया व अवसाद के शिकार हो रहे हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, हाल के वर्षों में बच्चों में डिजिटल आई स्ट्रेन, आंखों में जलन, पानी आना और सूखापन जैसी समस्याएं आम हो गई हैं। मोबाइल स्क्रीन छोटी होने के कारण बच्चे उसे आंखों के बेहद पास रखकर देखते हैं, जिससे आंखों की मांसपेशियों पर अधिक दबाव पड़ता है। बात केवल पढ़ाई तक नहीं रह गई है, उससे आगे निकल गई है और बीमारी की मूल वजह यही है।
बच्चे मोबाइल पर पढ़ाई करते-करते इंटरनेट मीडिया के आकर्षण में फंस रहे हैं। अनेक वेबसाइटों पर लाइक-कमेंट देखते-देखते उनका मस्तिष्क विकृत हो रहा है। आनलाइन गेम उन्हें परिवार व समाज से दूर कर रहा है। डिजिटल दुनिया उन्हें केवल बीमार कर रही है। छोटे बच्चों को भी स्वजन मोबाइल थमा दे रहे हैं, इससे वे आटिज्म के शिकार हो रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि स्कूलों द्वारा मोबाइल फोन पर होमवर्क भेजना बच्चों के स्वास्थ्य के लिए नई चुनौती बन गया है। कागज पर लिखकर किए जाने वाले होमवर्क की तुलना में मोबाइल पर पढ़ाई करने से आंखों को कहीं अधिक नुकसान होता है। लगातार स्क्रीन देखने से कम उम्र में ही बच्चों को चश्मा लगाने की नौबत आ रही है।
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उम्र के अनुसार स्क्रीन टाइम
- दो वर्ष से कम उम्र के बच्चों को स्क्रीन से पूरी तरह दूर रखना चाहिए।
- दो से पांच वर्ष के बच्चों के लिए अधिकतम एक घंटा स्क्रीन टाइम पर्याप्त है।
- छह से 12 वर्ष के बच्चों के लिए पढ़ाई समेत दो घंटे तक स्क्रीन देखना सुरक्षित माना जाता है।
तकनीक शिक्षा में सहायक है, लेकिन उसका अनियंत्रित प्रयोग बच्चों की सेहत के लिए घातक साबित हो सकता है। डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल सीमित और संतुलित तरीके से किया जाना चाहिए। मोबाइल पर काम करते समय हर 20 मिनट बाद दूर की वस्तु देखने की आदत डालनी चाहिए।
-डा. वाई सिंह, नेत्र रोग विशेषज्ञ
अधिक स्क्रीन टाइम से बच्चों को मायोपिया, आंखो में थकान और धुंधलापन होने का खतरा रहता है। इसके अलावा नींद की दिक्कत, मोटापा, एकाग्रता में कमी आना, सीखने में समस्या, शारीरिक विकास में कमी, आटिज्म, घबराहट, आक्रामकता और मोबाइल एडिक्शन जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
-डा. गोपाल अग्रवाल, मानसिक रोग विशेषज्ञ