देवरिया में पकड़े गए घुसपैठियों के बांग्लादेश-म्यांमार के पते खंगाले जाएंगे, जांच में सीबीआई-एटीएस भी शामिल
देवरिया में पकड़े गए म्यांमार और बांग्लादेश के दो नागरिकों व तीन नाबालिगों के मामले की जांच अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहुंच गई है। एसपी देवरिया ने विदे ...और पढ़ें

तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए किया गया है। जागरण
HighLights
ट्रेन से कश्मीर जाते समय पकड़े गए विदेशी नागरिक।
एसपी देवरिया ने विदेश मंत्रालय को सत्यापन हेतु लिखा पत्र।
सीबीआई, एटीएस, एसटीएफ भी जांच में शामिल।
जागरण संवाददाता, गोरखपुर। गुवाहाटी से होकर दिल्ली के रास्ते कश्मीर जाने के दौरान देवरिया में पकड़े गए म्यांमार व बांग्लादेश के नागरिकों के मामले की जांच अब अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंच गई है। सीमा पार घुसपैठ, अवैध आव्रजन और संभावित मानव तस्करी नेटवर्क की आशंका को देखते हुए केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआइ), उत्तर प्रदेश एटीएस और एसटीएफ को भी मामले की जानकारी भेजी गई है। वहीं पुलिस अधीक्षक देवरिया ने विदेश मंत्रालय को पत्र लिखकर आरोपितों द्वारा बताए गए पतों का सत्यापन कराने का अनुरोध किया है।
16 अप्रैल को अवध-असम एक्सप्रेस में एस्कार्ट ड्यूटी पर तैनात आरपीएफ जवान को कुछ यात्रियों पर संदेह हुआ। सिवान जिले के जीरादेई के पास पूछताछ में मामला संदिग्ध लगने पर उन्हें रोका गया। बाद में देवरिया में जांच के दौरान दस्तावेज तथा पहचान संदिग्ध पाए गए।जिसके बाद उन्हें हिरासत में ले लिया गया। पूछताछ में एक युवक की पहचान म्यांमार के मौन्डू स्थित फोकीरा बाजार का निवासी सद्दाम हुसैन पुत्र नूर अहमद के रूप में हुई।
उसने बताया कि हरियाणा के मेवात जिल में स्थित नूंह में रहता है। वहीं जाहिर हुसैन उर्फ जाहिद हुसैन उर्फ आयात हुसैन ने म्यांमार के मौन्डू जिले के साथ-साथ बांग्लादेश के काक्स बाजार स्थित कुटुपालांग कैंप का पता दर्ज कराया है। तीन अपचारियों में दो लड़कियां थी। पूछताछ में उन्होंने स्वयं को म्यांमार का निवासी बताते हुए दावा किया कि बांग्लादेश के काक्स बाजार स्थित रोहिंग्या शरणार्थी शिविर में रहते हैं।
देवरिया पुलिस ने आरोपितों को विदेशी अधिनियम व मानव तस्करी के आरोप में जेल भेज दिया। नाबालिग लड़कियों को बाराबंकी व एक किशोर को गोरखपुर स्थित बाल संप्रेक्षण गृह भेज दिया गया। विवेचना में पुलिस को म्यांमार व बांगलादेशी नागरिकों के साथ ही अपचारियों द्वारा बताए गए पते तथा पहचान संबंधी सूचना पर संदेह उत्पन्न हुआ। इसके बाद पुलिस अधीक्षक देवरिया अभिजीत आर शंकर ने विदेश मंत्रालय को पत्र भेजकर दोनों देशों में बताए गए पतों और नागरिकता अभिलेखों का सत्यापन कराने का अनुरोध किया है।
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पुलिस इस बात की भी पड़ताल कर रही है कि भारत आने के बाद ये लोग किन-किन राज्यों और क्षेत्रों में रहे, इनके संपर्क में कौन-कौन लोग आए और इनके आवागमन की पूरी श्रृंखला क्या रही। जांच एजेंसियों का मानना है कि म्यांमार और बांग्लादेश में बताए गए पतों की पुष्टि होने के बाद पूरे नेटवर्क की कई अहम कड़ियां सामने आ सकती हैं।
सूत्रों के अनुसार केंद्रीय एजेंसियां इस संभावना की भी जांच कर रही हैं कि मामला केवल अवैध घुसपैठ तक सीमित है या इसके पीछे मानव तस्करी अथवा अंतरराज्यीय नेटवर्क भी सक्रिय है।