गोरखपुर से जब भी दौड़ी डॉल्फिन रेस्क्यू एंबुलेंस, मिली सफलता
महराजगंज नहर से बचाई गई डॉल्फिन को गोरखपुर की राप्ती नदी में सुरक्षित छोड़ा गया। डॉल्फिन रेस्क्यू एंबुलेंस ने 52 किमी का सफर तय कर अपनी 100% सफलता दर ...और पढ़ें

फोटो- वीडियो ग्रैब
HighLights
महराजगंज से बचाई डॉल्फिन गोरखपुर की राप्ती नदी में छोड़ी गई।
डॉल्फिन रेस्क्यू एंबुलेंस ने नौवां सफल अभियान पूरा किया।
प्रधानमंत्री मोदी ने डॉल्फिन रेस्क्यू एंबुलेंस सेवा की सराहना की।
आशुतोष मिश्र, गोरखपुर। तीन दिन के कठिन अभियान के बाद महराजगंज की देवरिया शाखा नहर से रेस्क्यू डाॅल्फिन अब गोरखपुर स्थित राप्ती के राजघाट तट में अठखेलियां कर रही है। इससे पहले 52 किमी लंबे ग्रीन कारिडोर का उसका सफर डाल्फिन रेस्क्यू एंबुलेंस से पूरा हुआ।
इस खास एंबुलेंस की सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि यह जब भी दौड़ी सफलता ही इसकी मंजिल बनी। जनवरी 2026 में शुरू हुई डाॅल्फिन रेस्क्यू एंबुलेंस सेवा को इसीलिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ''मन की बात'' में सराह चुके हैं।
राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन के तहत 2013 से संचालित गंगा डाल्फिन रेस्क्यू अभियान में जनवरी, 2026 में यह खास एंबुलेंस जुड़ी। इससे पहले 2013 से 2025 तक उत्तर प्रदेश में कम-से-कम 40 गंगा डाॅल्फिन का रेस्क्यू किया गया।
इन अभियानों की सफलता दर लगभग 90% रही। राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन की ओर से पूर्व में जारी एक विज्ञप्ति के अनुसार, जनवरी 2026 में शुरू हुई डाॅल्फिन रेस्क्यू एंबुलेंस के माध्यम से सात मई, 2026 तक प्रदेश में आठ गंगा डाॅल्फिन का रेस्क्यू कर उन्हें सुरक्षित नदी में छोड़ा गया।
रेस्क्यू अभियान की सफलता दर 100 प्रतिशत रही। सोमवार को पहली बार महराजगंज और गोरखपुर की सड़कों पर यह एंबुलेंस दौड़ी, तब भी सफलता का यह रिकार्ड और दृढ़ हुआ।
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एंबुलेंस में चल रहे गोरखपुर चिड़ियाघर के उपनिदेशक डा. योगेश प्रताप सिंह और टीएसए फाउंडेशन के डा. शैलेन्द्र सिंह की टीम ने गोरखपुर के राजघाट तट से सटी राप्ती में डाल्फिन को सुरक्षित छोड़ा। इस तरह नौवां सफल अभियान संपन्न कर इस एंबुलेंस ने अपनी उपयोगिता को एक बार और सिद्ध किया।
राप्ती में और बढ़ेगा गंगा डाॅल्फिन का कुनबा
गोरखपुर चिड़ियाघर के उपनिदेशक डा. योगेश प्रताप सिंह के मुताबिक, देश में लगभग 6000 गंगा डाल्फिन पाई जाती हैं। इनमें से करीब 1000 गंगा डाॅल्फिन प्रदेश की विभिन्न नदियों में हैं। गोरखपुर क्षेत्र की राप्ती नदी की बात करें तो उसमें अनुमानित संख्या आठ है। सोमवार को गर्भवती डाॅल्फिन के छोड़े जाने के बाद नदी में उनका कुनबा और बढ़ने की उम्मीद है।