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    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Apr 03, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    UP News: बिना डॉक्टर बने गोरखपुर AIIMS से बाहर होंगे चार छात्र, जारी होगा नोटिस

    Updated: Thu, 03 Apr 2025 05:00 AM (GMT+05:30)

    गोरखपुर एम्स (AIIMS Gorakhpur) से चार छात्रों पर बिना डॉक्टर बने ही बाहर होने का खतरा मंडरा रहा है। ये सभी पहले वर्ष की परीक्षा पास नहीं कर पाए हैं। अ ...और पढ़ें

    एमबीबीएस 2019 का एक और 2020 बैच के तीन छात्र-छात्राएं बिना डॉक्टर बने ही AIIMS बाहर हो जाएंगे। जागरण
    एमबीबीएस 2019 का एक और 2020 बैच के तीन छात्र-छात्राएं बिना डॉक्टर बने ही AIIMS बाहर हो जाएंगे। जागरण

    HighLights

    1. वर्ष 2020 बैच के तीन और 2019 का एक छात्र नहीं पास कर सका पहली परीक्षा
    2. पिछले वर्ष दया के आधार पर दिया गया था एक वर्ष का मौका

    जागरण संवाददाता, गोरखपुर। नीट उत्तीर्ण कर एम्स गोरखपुर में प्रवेश लेने वाले एमबीबीएस 2019 का एक और 2020 बैच के तीन छात्र-छात्राएं बिना डॉक्टर बने ही बाहर हो जाएंगे। इन सभी ने अब तक पहले वर्ष की परीक्षा ही पास नहीं की है।

    तीन छात्रों को पिछले वर्ष दया के आधार पर मौका दिया गया था लेकिन इसमें भी वह परीक्षा पास नहीं कर सके। अब इन सभी को नोटिस जारी करने की तैयारी है। इन छात्रों के बार-बार फेल होने की वजह से कैंपस में नीट परीक्षा की शुचिता को लेकर सवाल खड़े होने लगे हैं।

    वर्ष 2019 में एम्स में एमबीबीएस की पढ़ाई शुरू हुई थी। इस बैच का एक छात्र अब तक परीक्षा नहीं पास कर सका है। नियमानुसार साढ़े चार वर्ष के एमबीबीएस के कोर्स को अधिकतम आठ वर्ष में पूरा कर लेना चाहिए। हर डेढ़ वर्ष पर परीक्षा होती है। तीन परीक्षा में पास होने के बाद एक वर्ष की अनिवार्य इंटर्नशिप होती है। इसके बाद एमबीबीएस का कोर्स पूरा होता है और उपाधि दी जाती है।

    साढ़े चार साल के MBBS के कोर्स को अधिकतम आठ साल में पूरा कर लेना चाहिए। जागरण (सांकेतिक तस्वीर)


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    पिछले वर्ष दिया गया था मौका

    वर्ष 2019 बैच की छात्रा और दो छात्रों को पिछले वर्ष ही परिसर से बाहर करने की तैयारी थी लेकिन उनके प्रार्थना पत्र पर एकेडमिक कमेटी ने एक वर्ष और मौका दिया था। इसे दया के रूप में दिया गया था। सभी ने किसी भी हाल में परीक्षा उत्तीर्ण कर अगली कक्षा में प्रवेश लेने का वादा किया था लेकिन ऐसा नहीं हो सका।

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    चार छात्र-छात्राएं दया के रूप में एक वर्ष अतिरिक्त मिलने के बाद भी फर्स्ट प्रोफेशनल की परीक्षा पास नहीं कर पाए हैं। इनका मामला इंस्टीट्यूट बाडी में रखा जाएगा। निर्णय के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। -डा. आराधना सिंह, चेयरमैन मीडिया सेल, एम्स गोरखपुर

    छात्रा ने लगाया है भ्रष्टाचार का आरोप

    वर्ष 2020 बैच की एक छात्रा ने परिसर में भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए कम उपस्थिति के आधार पर परीक्षा से वंचित करने का आरोप लगाया है। छात्रा का कहना है कि तत्कालीन कार्यकारी निदेशक की कुछ बातें पता चल गई थीं। इस कारण उन्होंने परीक्षा से वंचित करा दिया था।