डिजिटल युग में भी गीताप्रेस की धार्मिक पुस्तकों की बढ़ी डिमांड, बिक्री में हुई रिकॉर्ड वृद्धि
डिजिटल माध्यमों के बढ़ते प्रभाव के बावजूद गीताप्रेस की धार्मिक पुस्तकों की मांग लगातार बढ़ रही है, जो मुद्रित साहित्य के महत्व को दर्शाती है। ...और पढ़ें

प्रतीकात्मक तस्वीर
HighLights
गीताप्रेस की बिक्री 2019-20 में 58 करोड़ से बढ़कर 138 करोड़ हुई।
दिसंबर 2025 तक 101 करोड़ से अधिक प्रतियां प्रकाशित की गईं।
श्रीमद्भगवद्गीता और श्रीरामचरितमानस की सर्वाधिक मांग रही।
गजाधर द्विवेदी, गोरखपुर। डिजिटल माध्यमों के बढ़ते प्रभाव और ई-पुस्तकों और इंटरनेट आधारित सामग्री की बढ़ती लोकप्रियता के बावजूद गीताप्रेस की धार्मिक पुस्तकों की मांग में लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है। यह प्रवृत्ति इस धारणा को चुनौती देती है कि डिजिटल युग में मुद्रित पुस्तकों का महत्व तेजी से कम हो रहा है।
धार्मिक साहित्य के प्रति लोगों की आस्था और मुद्रित पुस्तकों के प्रति विश्वास आज भी मजबूत बना हुआ है। आज भी बड़ी संख्या में पाठक धार्मिक ग्रंथों को मुद्रित स्वरूप में पढ़ना और अपने संग्रह में रखना पसंद कर रहे हैं। आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2019-20 में गीताप्रेस की पुस्तकों की बिक्री 58 करोड़ रुपये की थी जो वर्ष 2025-26 में बढ़कर 138 करोड़ रुपये तक पहुंच गई।
गीताप्रेस दिसंबर 2025 तक विभिन्न पुस्तकों की 101 करोड़ से अधिक प्रतियां प्रकाशित कर चुका है। प्रकाशित पुस्तकों में सबसे अधिक मांग श्रीमद्भगवद्गीता और श्रीरामचरितमानस की रही है। 1844 लाख प्रतियां श्रीमद्भगवद्गीता तथा 1321 लाख प्रतियां श्रीरामचरितमानस की प्रकाशित की जा चुकी हैं। इसके अलावा पुराण, उपनिषद, भक्ति साहित्य, धार्मिक पुस्तिकाएं और संस्कार संबंधी साहित्य भी बड़ी संख्या में प्रकाशित किए जा चुके हैं।
गीताप्रेस की लोकप्रियता का एक प्रमुख कारण पुस्तकोंं की शुचिता, शुद्धता व मूल्य नीति है। संस्थान धार्मिक पुस्तकों की बिक्री लागत से कम कीमत पर करता है, जिससे समाज के हर वर्ग के लोगों तक धार्मिक साहित्य आसानी से पहुंच सके। कम कीमत और उच्च गुणवत्ता के कारण ग्रामीण क्षेत्रों से लेकर महानगरों तक इसके पाठकों का व्यापक आधार बना हुआ है।
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गीताप्रेस के लगातार बढ़ते प्रकाशन और बिक्री के आंकड़े यह स्पष्ट करते हैं कि डिजिटल क्रांति के दौर में भी मुद्रित धार्मिक साहित्य का महत्व कम नहीं हुआ है। बल्कि श्रद्धा, विश्वास, गुणवत्ता और किफायती मूल्य के कारण गीताप्रेस आज भी देश के करोड़ों पाठकों की पहली पसंद बना हुआ है। बढ़ती बिक्री इस बात का प्रमाण है कि तकनीक के विस्तार के बावजूद पुस्तक संस्कृति, विशेषकर धार्मिक साहित्य के क्षेत्र में, अपनी मजबूत उपस्थिति बनाए हुए है।
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इस वर्ष इतने करोड़ की पुस्तकें बिकीं
- 2019-20- 58.13 करोड़
- 2020-21- 52.17 करोड़
- 2021-22- 77.62 करोड़
- 2022-23- 108.49 करोड़
- 2023-24- 135 करोड़
- 2024-25- 133 करोड़
- 2025-26- 138 करोड़
डिजिटल माध्यमों के विस्तार के बावजूद धार्मिक पुस्तकों के प्रति लोगों की आस्था और विश्वास में कोई कमी नहीं आई है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु आज भी श्रीमद्भगवद्गीता, श्रीरामचरितमानस और अन्य धार्मिक ग्रंथों को मुद्रित स्वरूप में पढ़ना पसंद करते हैं। यही कारण है कि संस्थान की पुस्तकों की बिक्री लगातार बढ़ रही है। गीताप्रेस का उद्देश्य लाभ कमाना नहीं, बल्कि अधिक से अधिक लोगों तक सुलभ दरों पर धार्मिक साहित्य पहुंचाना है। आने वाले समय में भी इसी प्रतिबद्धता के साथ गीताप्रेस कार्य करता रहेगा।
डॉ. लालमणि तिवारी, प्रबंधक गीताप्रेस