'डॉक्टर साहब, कहीं मेरे साथ भी वैसा न हो जाए..', गोरखपुर AIIMS में बढ़े मिक्स्ड एंग्जायटी-डिप्रेशन के मामले
गोरखपुर एम्स में मिश्रित चिंता-अवसाद के मामलों में वृद्धि देखी जा रही है, जिसका मुख्य कारण चर्चित व्यक्तियों की आत्महत्या या असामयिक मृत्यु जैसी घटनाओ ...और पढ़ें

गोरखपुर एम्स। जागरण
HighLights
गोरखपुर एम्स में चिंता-अवसाद के मामले बढ़े हैं।
चर्चित घटनाओं का मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा प्रभाव।
मानसिक लक्षणों को अनदेखा न करें, विशेषज्ञ से मिलें।
अरुण मुन्ना, गोरखपुर। डॉक्टर साहब, मुझे बहुत डर लग रहा है... कहीं मेरे साथ भी वैसा न हो जाए। हाल के दिनों में मनोरोग विशेषज्ञों के पास पहुंचने वाले अनेक रोगियों की बातचीत कुछ इसी चिंता से शुरू हो रही है। किसी चर्चित व्यक्ति की आत्महत्या, असामयिक मृत्यु या मानसिक तनाव से जुड़ी घटनाओं का उनके मानसिक स्वास्थ्य पर भी गहरा प्रभाव पड़ रहा है। एम्स गोरखपुर के मनोरोग विभाग में मिक्स्ड एंग्जायटी डिप्रेशन घबराहट और अवसाद एक साथ के कई रोगी पहुंचे हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, जो लोग पहले से चिंता या अवसाद से जूझ रहे होते हैं। उन पर इसका प्रभाव अधिक गहरा पड़ता है। वह किसी चर्चित घटना, व्यक्ति, खिलाड़ी, अभिनेता इत्यादि संग होने वाली घटना के बाद स्वयं को भी उसी परिस्थिति में देखने लगते हैं।
एम्स के मनोरोग विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डा. ऋचा ने बताया कि हाल ही में एक ऐसा रोगी परामर्श के लिए आया, जिसे पहले हल्के अवसाद की समस्या रह चुकी थी। उपचार के बाद वह सामान्य जीवन जी रहा था, लेकिन एक चर्चित घटना के बाद उसके भीतर फिर भय उत्पन्न हो गया। परामर्श के दौरान वह बार-बार यही कह रहा था कि कहीं वह भी उसी मानसिक स्थिति का शिकार न हो जाए। धीरे-धीरे उसकी बेचैनी, घबराहट और चिंता बढ़ने लगी।
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चिकित्सक का कहना है कि कोविड महामारी के बाद लोगों में मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को लेकर संवेदनशीलता काफी बढ़ गई है। अब सामान्य लक्षण भी कई लोगों को गंभीर बीमारी जैसे प्रतीत होने लगते हैं। इंटरनेट मीडिया पर लगातार मानसिक रोगों और दुखद घटनाओं से जुड़ी सामग्री देखना भी भय और तनाव को बढ़ाने का कारण बन रहा है।
विशेषज्ञ का कहना है कि जब कोई प्रसिद्ध अभिनेता या कोई हाईप्रोफाइल व्यक्ति मानसिक तनाव अथवा आत्महत्या जैसी घटना से जुड़ता है तो उसका व्यापक सामाजिक प्रभाव पड़ता है। अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मृत्यु के बाद भी देशभर में चिंता, अवसाद और मानसिक तनाव से जुड़े मामलों में वृद्धि देखी गई थी। विशेष रूप से युवा वर्ग और वे लोग, जो किसी प्रसिद्ध व्यक्ति को अपना आदर्श मानते हैं, ऐसी घटनाओं से अधिक प्रभावित होते हैं।
इन लक्षणों की न करें अनदेखी
चिकित्सक बताती हैं कि लगातार भय, उदासी, घबराहट, अकेलेपन की भावना, नींद में कमी, बेचैनी या नकारात्मक विचारों को सामान्य तनाव मानकर अनदेखा नहीं करना चाहिए। समय पर विशेषज्ञ से परामर्श, परिवार का सहयोग और सकारात्मक दिनचर्या मानसिक स्वास्थ्य को संभालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।