गोरखपुर में सड़क-पुल पर घूम रहीं गाय-भैंस, निगम कर रहा कागजी कार्रवाई
गोरखपुर में सड़कों और नए ओवरब्रिज पर गाय-भैंसों का आतंक बढ़ रहा है, जिससे यातायात बाधित हो रहा और दुर्घटनाएं हो रही हैं। नगर निगम की 2023 की डेयरी उपव ...और पढ़ें

नौकायन रोड पर भैसों के अतिक्रमण के कारण लगा जाम। जागरण
HighLights
गोरखपुर में सड़कों, ओवरब्रिज पर मवेशियों का आतंक।
नगर निगम की कार्रवाई, नियम केवल कागजी साबित।
यातायात बाधित, दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ा।
जागरण संवाददाता, गोरखपुर। शहर की सड़कों पर डेयरी संचालकों की गाय और भैंसों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है, लेकिन नगर निगम की कार्रवाई केवल कागजी साबित हो रही है। हालात इतने बदतर हो चुके हैं कि वीआइपी इलाकों से लेकर मुख्य बाजारों और प्रमुख सड़कों तक मवेशियों का कब्जा दिखाई देता है।
गुरुवार को चौंकाने वाला नजारा तारामंडल इलाके में देखने को मिला, जहां हाल ही में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा उद्घाटित ओवरब्रिज पर से भैंसों का बड़ा झुंड बेखौफ होकर गुजरता नजर आया। इसके अलावा डीएम आवास के सामने से भैंसों का झुंड गुजरता हुआ अक्सर दिखाई दे देता है। यह दृश्य न केवल नगर निगम की कार्यशैली पर सवाल खड़े करता है, बल्कि शहर की यातायात व्यवस्था और नागरिकों की सुरक्षा पर भी गंभीर चिंता पैदा करता है।
शहर में आए दिन सड़कों के बीचों-बीच बैठी गायें और झुंड में घूमती भैंसें दुर्घटनाओं का कारण बन रही हैं। कई बार बाइक सवार और राहगीर इन मवेशियों की वजह से हादसों का शिकार हो चुके हैं, लेकिन नगर निगम की ओर से कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला जा रहा। शास्त्री चौराहा से बेतियाहाता, हनुमान मंदिर रोड, स्टेशन रोड, मेडिकल कालेज रोड आदि पर अक्सर दुधारू पालतू पशु सड़क पर नजर आ जाते हैं।
इनसे न सिर्फ यातायात बाधित होता है बल्कि दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। सबसे आश्चर्यजनक बात तो यह है कि डीएम आवास के सामने से होकर गुजरते भैंसों के झुंड आम दृश्य बन चुके हैं। जब प्रशासनिक अधिकारियों के आवास के आसपास ही यह स्थिति है, तो आम मोहल्लों और गलियों की हालत कितनी खराब होगी, इसका सहज अंदाजा लगाया जा सकता है।
नगर निगम ने वर्ष 2023 में “दुधारु पशु/डेयरी संबंधी अनुज्ञप्ति नियंत्रण एवं विनियमन उपविधि” लागू की थी। प्रविधान के तहत शहर में भी डेरी संचालित हो सकते हैं। इस के लिए लाइसेंस लेना अनिवार्य है। लेकिन गोबर बहाने से लेकर पशुओं को रखने तक के लिए कई तरह की सख्ती भी की गई है।
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नियमों के मुताबिक दो या दो से अधिक गाय-भैंस पालने वाले डेयरी संचालकों के लिए वार्षिक लाइसेंस लेना अनिवार्य किया गया। साथ ही सार्वजनिक स्थलों पर मवेशियों को छोड़ने पर प्रतिबंध लगाया गया। नियमों में जुर्माने और कार्रवाई का भी प्रावधान है। इसके बावजूद शहर में डेयरी संचालक खुलेआम नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं। सुबह और शाम सड़कों पर छोड़े गए मवेशी यातायात को बाधित करते हैं और पूरे शहर को अव्यवस्था में धकेल देते हैं।
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सबसे गंभीर बात यह है कि नगर निगम की कार्रवाई केवल खानापूर्ति तक सीमित नजर आती है। कभी-कभार अभियान चलाकर कुछ मवेशियों को पकड़ लिया जाता है, लेकिन न तो डेयरी संचालकों पर कठोर दंडात्मक कार्रवाई होती है और न ही दोबारा उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कोई स्थायी व्यवस्था बनाई जाती है। निगम की लापरवाही का आलम यह है कि करोड़ों रुपये खर्च कर बनाई गई स्मार्ट सड़कें और नए ओवरब्रिज भी अब मवेशियों के रास्ते बनते जा रहे हैं।
सार्वजनिक स्थल पर पशुओं को नहीं छोड़ सकते पशुपालक
दुधारू पशुओं/ डेयरी के लिए संबंधी अनुज्ञप्ति नियंत्रण और विनियमन उपविधि 2023 के अनुसार पशुपालक को सार्वजनिक स्थलों मसलन, गली, सड़क, पार्क के आसपास पशुओं न खुला छोड़ेगा न चलाएगा। पशुओें के परिवहन की अनुमति लेनी होगी। लोक हित में पशुओं को निगम सीमा के भीतर रखना हो तो नगर आयुक्त से अनुमति लेनी होगी।
कचरा एवं गोबर हटाने में निगम सहयोग करेगा लेकिन उसे बदले में पशुपालक को नियमानुसार भुगतान करना होगा। बीमार पशुओं को नगर निगम से नियुक्त पशु चिकित्सक निशुल्क परामर्श एवं कीटनाशी उपलब्ध कराएगा।बिना
बिना अनुमति पशुपालन पर देना होगा जुर्माना
नगर निगम के पशु कल्याण अधिकारी ने बताया कि नियमानुसार पशुपालकों को पशुओं का लाइसेंस लेना जरूरी है। अप्रैल में लाइसेंस नहीं लेने पर प्रथम माह के लिए 100 रुपये और उसके बाद के महीनों के 50 रुपये प्रति माह विलंब शुल्क लाइसेंस शुल्क के अतिरिक्त देना होगा। पहली बार उल्लंघन पर अवैध डेयरी संचालक पर 1000 रुपये और दूसरी बार उल्लंघन पर 2000 रुपये जुर्माना लगेगा। अवैध डेयरी पर अधिकतम 50 हजार रुपये जुर्माना लगाया जा सकेगा।
उल्लंघन की पुनरावृत्ति पर पशुओं को जब्त करते हुए नीलामी की जाएगी। कार्य समिति में जब्त पशुओं पर कमेटी गठित होगी। प्रत्येक व्यस्क पशु के लिए 20 हजार रुपये एवं पड़वा, पड़िया, बछड़ा एवं बछिया के लिए 10 हजार रुपये की दर निर्धारित होगी। सड़क पर पशुओं को छोड़ने वालों के खिलाफ लगातार कार्रवाई हो रही है। जुर्माना भी वसूला जा रहा है।
पशुपालकों को अपने पशुओं को सड़क पर किसी भी हाल में नहीं छोड़ना चाहिए। इससे अव्यवस्था फैलती है। इस पर रोक लगाने के लिए सड़क पर घूमने वाले पशुओं के खिलाफ लगातार कार्रवाई चल रही है। उन्हें पकड़ कर कान्हा उपवन में लाया जाता है और जुर्माना वसूलने के बाद ही छोड़ा जाता है। इस कार्रवाई को और तेज किया जाएगा। साथ ही इसको लेकर वैकल्पिक उपाय भी किए जाएंगे।
अजय जैन, नगर आयुक्त