गोरखपुर जनगणना 2027: कोई पीएम आवास की कर रहा मांग, कहीं राशन कार्ड, पेंशन का छलका दर्द
गोरखपुर में जनगणना 2027 के दौरान प्रगणकों को सरकारी योजनाओं जैसे पीएम आवास, पेंशन और राशन कार्ड से जुड़ी जनता की मांगों और शिकायतों का सामना करना पड़ ...और पढ़ें

-ग्रामीण इलाकों में जवाब जुटाने पहुंच रहे प्रगणकों पर उल्टे सवालों की बौछार
HighLights
प्रगणकों को पीएम आवास, पेंशन, राशन कार्ड पर सवाल
जनगणना बनी जनता की उम्मीदों और शिकायतों का मंच
तकनीकी दिक्कतें, मानचित्र संबंधी भ्रम भी उजागर हुए
जागरण संवाददाता, गोरखपुर। 'बाबू, पहले यह बताइए कि प्रधानमंत्री आवास कब मिलेगा?'… 'हमरी वृद्धा पेंशन क्यों बंद हो गई?'… 'राशन कार्ड में नाम जुड़ जाएगा न?' जनगणना 2027 के तहत प्रगणकों को दूसरे दिन भी ऐसे कई सवालों का सामना करना पड़ा। सरकार ने उन्हें मकानों, परिवारों और बुनियादी सुविधाओं का ब्योरा जुटाने के लिए भेजा है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में कई लोग उन्हें सीधे सरकारी मदद पहुंचाने वाला अधिकारी समझ बैठ रहे हैं।
नतीजा यह है कि जनगणना की औपचारिक प्रक्रिया कई जगह उम्मीदों, शिकायतों, जिज्ञासाओं और दिलचस्प संवादों की चौपाल में बदल गई है। सवाल पूछने निकले प्रगणकों को पहले खुद सवालों के घेरे में खड़ा होना पड़ रहा है। कहीं लोग उनसे आवास योजना की आस लगाए बैठे हैं तो कहीं वृद्धावस्था पेंशन, राशन कार्ड, नौकरी और सरकारी लाभ से जुड़े सवालों की झड़ी लगा रहे हैं। इस बीच तकनीकी दिक्कतें, लोगों की शंकाएं और गांवों की सहज आत्मीयता इस पूरी कवायद को एक अलग रंग भी दे रही है।
खजनी ब्लाक कार्यालय से सटे एक गांव में पहुंचे एक प्रगणक ने जैसे ही मकान की स्थिति, कमरों की संख्या और परिवार की जानकारी दर्ज करनी शुरू की, सामने बैठे बुजुर्ग किसान ने सवाल दाग दिया। 'साहब! प्रधानमंत्री आवास का फार्म भरे थे, अभी मिला नहीं। अबकी प्रधानमंत्री आवास लिख दीजिए।' प्रगणक ने समझाया कि उनका काम केवल जानकारी दर्ज करना है, काफी देर बातचीत के बाद स्थिति स्पष्ट हुई, तब जाकर आगे के सवाल शुरू हो सके।
कैंपियरगंज क्षेत्र के एक गांव में तो एक बुजुर्ग महिला ने प्रगणक की तरफ कुर्सी बढ़ाने के साथ ही अपनी समस्या सुनानी भी शुरू कर दी। 'बेटा, हमारी वृद्धा पेंशन बंद हो गई है, तुम सरकारी आदमी हो, लगवा दो।' प्रगणक ने मोबाइल एप पर डेटा भरते हुए समझाने की कोशिश की कि उनका संबंध पेंशन विभाग से नहीं है, लेकिन महिला का जवाब था- ''सरकार भेजी है तो कुछ काम तो कराओ।'
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बांसगांव और बेलघाट ब्लाक के कुछ गांवों में तकनीकी दिक्कतें भी सामने आई। मोबाइल एप के जरिए जानकारी दर्ज करते समय नेटवर्क कमजोर पड़ गया।
पिपराइच क्षेत्र में एक महिला ने परिवार की जानकारी देने से पहले राशन कार्ड में बेटे का नाम जुड़वाने की मांग रख दी। उसने साफ कहा—'पहले बताइए मदद होगी कि नहीं, फिर जानकारी देंगे।' काफी समझाने के बाद उसने सहयोग किया।
कुल मिलाकर गांवों में जनगणना सिर्फ आंकड़ों की कवायद नहीं रह गई है। यह लोगों की उम्मीदों, शिकायतों, भरोसे और सरकार से जुड़ी आकांक्षाओं का आईना भी बनती दिख रही है।
मौके पर नक्शा फेल
गोरखपुर। जनगणना कार्य में लगे कई प्रगणकों को मानचित्र और विभागीय लैंडमार्क में अंतर के कारण परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। दिग्विजयनगर वार्ड के हुमायूंपुर उत्तरी में ब्लाक-115 के प्रगणक को विभागीय मानचित्र में दर्शाए गए लैंडमार्क खोजने में काफी कठिनाई हुई। उमा तिराहा से डीह बाबा स्थान, देवकी गैस सर्विस कार्यालय होते हुए जागेश्वर चौक पीपल के पेड़ तक का क्षेत्र मानचित्र में स्पष्ट नहीं मिलने से भ्रम की स्थिति बनी रही। मामले को गंभीरता से लेते हुए स्थानीय पार्षद ऋषि मोहन वर्मा ने जोन प्रभारी सहायक नगर आयुक्त अविनाश प्रताप सिंह से दूरभाष पर वार्ता कर समस्या दूर कराने की मांग की।
जनगणना में नहीं मांगा जाएगा ओटीपी, अफवाहों से रहें सावधान
गोरखपुर। जिला जनगणना अधिकारी एवं अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) जय प्रकाश ने स्पष्ट किया है कि जनगणना-2027 के दौरान किसी भी नागरिक से ओटीपी नहीं मांगा जाएगा। उन्होंने बताया कि प्रथम चरण में मकान गणना एवं मकान सूचीकरण का कार्य 22 मई से 20 जून 2026 तक चलेगा। इस दौरान प्रगणक अपने निर्धारित क्षेत्र में घर-घर जाकर मकानों की गणना, क्रमांक अंकन और नागरिकों से निर्धारित प्रश्नों के उत्तर प्राप्त करेंगे।
जिन नागरिकों ने स्व-गणना (सेल्फ एन्यूमरेशन) कर ली है, उन्हें केवल अपना स्व-गणना आईडी नंबर प्रगणक को देना होगा। प्रगणक उस आइडी को ऐप में दर्ज कर उनकी गणना पूरी कर देगा, जिससे दोबारा प्रश्नों का उत्तर देने की जरूरत नहीं होगी। जिला जनगणना अधिकारी ने नागरिकों से सतर्क रहने और जनगणना कर्मियों को पूरा सहयोग देने की अपील की है।