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    दिसंबर तक एलएचबी कोचों से चलने लगेंगी सभी एक्सप्रेस ट्रेनें, पूर्वोत्तर रेलवे की खास पहल

    Updated: Sun, 24 May 2026 10:36 AM (GMT+05:30)

    पूर्वोत्तर रेलवे की सभी एक्सप्रेस ट्रेनें दिसंबर 2026 तक आधुनिक एलएचबी कोचों से लैस हो जाएंगी, जिससे यात्रा सुरक्षित और आरामदायक होगी। पुराने आईसीएफ क ...और पढ़ें

    पैसेंजर ट्रेनों की जगह चलेंगी मेमू, पुराने कोचों से बनेंगे मालगाड़ियों के वैगन। जागरण

    पैसेंजर ट्रेनों की जगह चलेंगी मेमू, पुराने कोचों से बनेंगे मालगाड़ियों के वैगन। जागरण

    HighLights

    1. दिसंबर 2026 तक सभी एक्सप्रेस ट्रेनों में एलएचबी कोच।

    2. यात्रा सुरक्षित, आरामदायक होगी, झटके नहीं लगेंगे, गति बढ़ेगी।

    3. पैसेंजर ट्रेनें मेमू से बदलेंगी, पुराने कोच बनेंगे मालगाड़ी वैगन।

    जागरण संवाददाता, गोरखपुर। पूर्वोत्तर रेलवे की सभी एक्सप्रेस ट्रेनें दिसंबर 2026 तक आधुनिक लिंक हाफमैन बुश (एलएचबी) कोचों से चलने लगेंगी। इज्जतनगर मंडल की केवल तीन जोड़ी एक्सप्रेस ट्रेनें ही अभी पुराने आइसीएफ (इंटिग्रल कोच फैक्ट्री) कोचों से चल रही हैं। इनमें भी एलएचबी लगाने की तैयारी शुरू हो चुकी है।

    मुख्यालय गोरखपुर रूट से चलने वाली लगभग 100 एक्सप्रेस ट्रेनों में एलएचबी कोच लगाए जा चुके हैं। जिसमें गोरखपुर स्टेशन से बनकर चलने वाली 24 एक्सप्रेस ट्रेनें भी शामिल हैं। गोरखपुर रूट पर चलने वाली हावड़ा-काठगोदाम एक्सप्रेस ही सिर्फ आइसीएफ कोच से चल रही है।

    इस ट्रेन में भी पांच जून से नए एलएचबी कोच लगने शुरू हो जाएंगे। एलएचबी कोचों के लगने से यात्रा सुरक्षित और आरामदायक होती जा रही है। सफर में यात्रियों को झटके नहीं लग रहे। दुर्घटना होने पर कोच एक से दूसरे के ऊपर नहीं चढ़ेंगे। ट्रेनों की अधिकतम रफ्तार 160 से 200 किमी प्रति घंटे हो जाएगी।

    पूर्वोत्तर रेलवे के मुख्यालय गोरखपुर से होकर प्रतिदिन करीब 110 यात्री ट्रेनें चलती हैं। इनमें करीब दस ट्रेनें पैसेंजर (सवारी गाड़ी) हैं। इनमें अभी आइसीएफ कोच ही लग रहे हैं। गोरखपुर से बनकर चलने वाली पैसेंजर ट्रेनें भी आइसीएफ कोचों से ही चल रही हैं। इन पैसेंजर ट्रेनों में कोच नहीं, बल्कि ट्रेनों को बदलने की ही तैयारी चल रही है।

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    अब पैसेंजर ट्रेनों की जगह इलेक्ट्रिक से चलने वाली मेमू ट्रेनें चलाई जाएंगी। पूर्वोत्तर रेलवे प्रशासन ने रेलवे बोर्ड से 80 मेमू ट्रेनों का प्रस्ताव भेजा है। पैसेंजर ट्रेनों के कोच भी एक्सप्रेस ट्रेनों से निकलने वाले आइसीएफ कोचों की तरह न्यू माडिफाइड गुड्स वैगन (एनएमजी) बना दिए जाएंगे। जिनका उपयोग आटोमोबाइल्स की ढुलाई में किया जाएगा।

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    दरअसल, आइसीएफ कोच धीरे-धीरे इतिहास बनने की तरफ अग्रसर है। इन कोचों का निर्माण पूरी तरह बंद हो गया है। अब सिर्फ एलएचबी कोच ही बन रहे हैं और इनका ही उपयोग किया जा रहा है। गोरखपुर स्थित यांत्रिक कारखाना में एलएचबी कोचों की मरम्मत के लिए आधुनिक शेड का निर्माण किया गया है।

    जर्मन तकनीक पर आधारित हैं एलएचबी कोच
    एलएचबी कोच जर्मन तकनीक पर आधारित हैं, जो स्टेनलेस स्टील से बने होते हैं। हल्के होते हैं, जिससे दुर्घटना के समय जिससे जान-माल का नुकसान कम होता है। परंपरागत आइसीएफ कोचों में चेन वाली कपलिंग लगती है, इससे यात्रियों को झटके लगते रहते हैं।

    दुर्घटना के समय नुकसान भी अधिक होता है। नए वाले एलएचबी कोचों में सेंटर बफर कपलिंग (सीबीसी) के चलते झटके नहीं लगते। बोगियों के अंदर पर्याप्त जगह मिलती है। गेट और टायलेट सुविधाजनक होते हैं।