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    गोरखपुर में लोन का झांसा देकर खुलवाते थे 'म्यूल अकाउंट', दो जालसाज गिरफ्तार

    Updated: Sun, 26 Jul 2026 09:53 AM (IST)

    गोरखपुर पुलिस ने लोन का झांसा देकर जरूरतमंदों के नाम पर 'म्यूल अकाउंट' खुलवाकर साइबर ठगी करने वाले दो जालसाजों को गिरफ्तार किया है। आरोपितों ने छह माह ...और पढ़ें

    तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए किया गया है। जागरण

    तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए किया गया है। जागरण

    HighLights

    1. लोन का झांसा देकर 'म्यूल अकाउंट' खुलवाते थे जालसाज।

    2. छह माह में 50 लाख रुपये का लेनदेन किया गया।

    3. दो आरोपित गिरफ्तार, आपत्तिजनक दस्तावेज व उपकरण बरामद।

    जागरण संवाददाता, गोरखपुर। लोन दिलाने का झांसा देकर जरूरतमंद लोगों के नाम पर बैंक खाते खुलवाना, इंटरनेट बैंकिंग और सिम अपने कब्जे में लेकर उन्हीं खातों को साइबर ठगी के लिए इस्तेमाल करना। चिलुआताल पुलिस ने ऐसे ही एक गिरोह का पर्दाफाश करते हुए दो आरोपितों को गिरफ्तार किया है।

    दोनों पादरी बाजार स्थित शताब्दीपुरम के पास 'साई फाइनेंस' के नाम से कार्यालय चलाते थे। पुलिस जांच में सामने आया कि गिरोह ने महज छह माह में दो खातों के जरिए करीब 50 लाख रुपये का लेनदेन किया। शनिवार की शाम दोनों को कोर्ट में पुलिस ने पेश किया जहां से जेल भेज दिया गया।

    एसपी उत्तरी ज्ञानेंद्र कुमार ने बताया कि दौलतपुर अमवा निवासी सुभाष मौर्य, झुंगिया गेट पर मोबाइल रिपेयरिंग की दुकान चलाते हैं, 24 जुलाई की सुबह चिलुुआताल पुलिस को प्रार्थना पत्र देकर बताया कि नई दुकान खोलने के लिए लोन की तलाश में थे। इसी दौरान उनकी मुलाकात गुलरिहा के हीरागंज नारायणपुर निवासी शशि शेखर द्विवेदी और चिलुआताल के अमवा टोला निवासी धरमवीर प्रजापति से हुई।

    आरोपितों ने पहले लोन पास न होने की बात कही, फिर सरकारी योजना का लाभ दिलाने का भरोसा देकर उत्तर प्रदेश ग्रामीण बैंक में उनके नाम से करंट अकाउंट खुलवा दिया। इसके बाद इंटरनेट बैंकिंग की आइडी, पासवर्ड, क्यूआर कोड और खाते से लिंक मोबाइल सिम अपने पास रख लिया। पीड़ित के अनुसार कुछ दिन बाद आरोपितों ने उनके खाते से 25 हजार रुपये दूसरे खाते में ट्रांसफर कराया।

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    इसके बाद एनसीआरपी (राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल) पर दर्ज शिकायत के चलते उनका बैंक खाता फ्रीज हो गया। बैंक पहुंचने पर पता चला कि उनके खाते के जरिए 50 लाख रुपये का लेनदेन किया गया है, जबकि उन्होंने न तो कोई रकम जमा की थी और न ही निकाली थी।

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    पुलिस की जांच में पता चला कि दोनों आरोपित जरूरतमंद और कम पढ़े-लिखे लोगों को सरकारी फंड और आसान लोन का लालच देकर उनके नाम पर 'म्यूल अकाउंट' खुलवाते थे। बाद में साइबर ठगी से प्राप्त रकम उन्हीं खातों में मंगाकर इंटरनेट बैंकिंग के जरिए दूसरे खातों में स्थानांतरित कर निकाल लेते थे।

    एसपी उत्तरी ज्ञानेंद्र कुमार ने बताया कि शनिवार की सुबह दोनों आरोपितों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से तीन मोबाइल फोन, 20 चेक, पांच चेकबुक, पांच सिम कार्ड रैपर, दो आधार कार्ड, एक प्रिंटर, दो की-बोर्ड, दो टेलीफोन और एक माउस बरामद किया है। मामले की जांच जारी है और यह पता लगाया जा रहा है कि इस तरीके से कितने लोगों के बैंक खातों का इस्तेमाल साइबर ठगी में किया गया।