तीन राज्यों में काटी फरारी, गोरखपुर मुठभेड़ में खत्म हुआ एक लाख के इनामी बदमाश मुस्तफिजुल रहमान का सफर
एक लाख के इनामी बदमाश मुस्तफिजुल रहमान उर्फ बाबू का दो दशक लंबा फरारी का सफर गोरखपुर में मुठभेड़ में समाप्त हो गया। वह उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और गुज ...और पढ़ें
HighLights
एक लाख का इनामी बदमाश मुस्तफिजुल रहमान मुठभेड़ में मारा गया।
दो दशकों से पुलिस को चकमा दे रहा था यह अपराधी।
यूपी, महाराष्ट्र, गुजरात में ठिकाने बदल कर फरारी काट रहा था।
जागरण संवाददाता, गोरखपुर। उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और गुजरात में ठिकाने बदलकर पुलिस को चकमा देने वाला एक लाख रुपये का इनामी बदमाश मुस्तफिजुल रहमान उर्फ बाबू दो दशक तक पुलिस के लिए चुनौती बना रहा। उसके विरुद्ध आजमगढ़ के अलावा महाराष्ट्र के अमरावती ग्रामीण जिले हत्या, हत्या के प्रयास, आपराधिक षड्यंत्र, धमकी, चोरी और पुलिस हिरासत से फरार होने के 10 मुकदमे दर्ज थे।
15 साल तक फरारी के दौरान उसने अपना पूरा नेटवर्क बदल लिया था। मोबाइल नंबर, सिम, ठिकाने और संपर्क लगातार बदलने की वजह से एसटीएफ और आजमगढ़ पुलिस को उसकी तलाश में भटकती रही।
पुलिस रिकार्ड के अनुसार वर्ष 2008 में मुस्तफिजुल रहमान उर्फ बाबू ने अपने गांव खुंदनपुर के रहने वाले कमालुद्दीन पर जानलेवा हमला किया। इसके बाद 2011 में गांव के एहत्साम हसन पर दिनदहाड़े फायरिंग की। वर्ष 2012 में इरशाद अहमद की हत्या के मामले में उसका नाम सामने आया।
इन घटनाओं के बाद वह पुलिस की निगरानी सूची में शामिल हो गया। फरवरी 2021 में मेहनगर के पूर्व बसपा नेता कलामुद्दीन खान उर्फ कमालू की हत्या के बाद मुस्तफिजुल प्रदेश के सबसे वांछित अपराधियों में शामिल हो गया। पुलिस जांच में सामने आया कि उसने मुख्तार अंसारी गिरोह से जुड़े शार्प शूटरों के साथ मिलकर हत्या की साजिश रची थी।
इस घटना के बाद उसकी गिरफ्तारी पर एक लाख रुपये का इनाम घोषित किया गया। दिसंबर 2024 में गुजरात के वापी से गिरफ्तार होने के बाद आजमगढ़ पुलिस उसे ट्रेन से वापस ला रही थी। महाराष्ट्र के अमरावती रेलवे स्टेशन के पास वह शौचालय जाने का बहाना बनाकर चलती ट्रेन से कूद गया और फरार हो गया। इस घटना के बाद पुलिस ने उसके खिलाफ कार्रवाई और तेज कर दी।
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यूपी एसटीएफ और आजमगढ़ पुलिस की स्वाट लगातार महाराष्ट्र, गुजरात और नेपाल सीमा से लगे इलाकों में उसकी तलाश करती रही। एसटीएफ अधिकारियों के अनुसार मुस्तफिजुल गिरफ्तारी से बचने के लिए किसी भी ठिकाने पर सात दिन से अधिक नहीं रुकता था।
वह लगातार मोबाइल नंबर बदलता था और सीमित लोगों से ही संपर्क रखता था। इसी रणनीति के कारण वह वर्षों तक पुलिस की पकड़ से दूर रहा। सोमवार की रात खोराबार के रामनगर कड़जहां फोरलेन पर हुई मुठभेड़ में उसके अपराध का सफर समाप्त हो गया। अब एसटीएफ बदमाश के आर्थिक नेटवर्क, फरारी के दौरान मदद करने वालों और उसके सहयोगियों की भूमिका की जांच कर रही है।